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मनरेगा डिजिटल अटेंडेस के रास्ते भ्रष्टाचार वाले शिष्टाचार पर केंद्र का एक और प्रहार

विनोबा भावे ने एकबार कहा था कि भ्रष्टाचार तो शिष्टाचार हो गया है। जब सभी लोग ऐसा करने लगें तो यह भ्रष्टाचार नहीं शिष्टाचार हो जाता है। भ्रष्टाचार के विरोध को लेकर विनोबा भावे के इस विचार की झलक वर्तमान केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली में साफतौर पर मिलती है, जो किसी कीमत पर भ्रष्टाचार को बर्दाश्त न करने की नीति पर काम कर रही है महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत नियोजित श्रमिकों की उपस्थिति को डिजिटली दर्ज करने को लेकर केंद्र सरकार ने आदेश दिया है। यह उपस्थिति 1 जनवरी, 2023 से दर्ज होगी। सरकार के इस आदेश का मतलब है कि अब मनरेगा में काम करने वाले श्रमिकों की उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज होगी। सरकार के इस फैसले से इस योजना में और अधिक पारदर्शिता आएगी।

सभी कार्यस्थलों के लिए अनिवार्य
जानकारी के लिए बता दूं कि 16 मई, 2022 से उन कार्यस्थलों के लिए ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य कर दिया था। हालांकि यह 20 या अधिक श्रमिकों वाले कार्यस्थलों के लिए ही अनिवार्य था। लेकिन केंद्र सरकार के नवीनतम आदेश में यह साफ है कि अब सभी कार्यस्थलों के लिए यह अनिवार्य है। चाहे कर्मचारियों की संख्या कितनी भी हो। मनरेगा के डिजिटल उपस्थिति के माध्यम से केंद्र सरकार ने एक बार फिर भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार किया है, क्योंकि मनरेगा में कई तरह की शिकायतें समय-समय पर सुनने को मिलती रहती हैं।
किसी राज्य में बिना काम किए श्रमिकों के खाते में रकम आ रही थी तो कहीं कोई और मामला था। केंद्र सरकार की इन सब शिकायतों पर नजर थी और यही कारण है कि उसने मनरेगा को लेकर ये बड़ा फैसला लिया। वैसे पिछले आठ साल में देश में भ्रष्टाचार को लेकर केंद्र सरकार का जीरो टॉलरेंस से ये संदेश गया है कि भ्रष्टाचार को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चलिए समझते हैं आठ साल पहले वर्तमान केंद्र सरकार ने भ्रष्टाचार को लेकर कार्रवाई कहां से शुरू किया और आज मनरेगा के डिजिटल अटेंडेंस के माध्यम से भ्रष्टाचार को लेकर इस सरकार की क्या सोच है।
8 साल पहले और अब
लगभग आठ साल पहले भ्रष्टाचार ने व्यापक स्तर पर जन-जीवन को प्रभावित कर रखा था। नौकरशाही हो या राजनीति, व्यापार हो या समाज या धर्म, यहां तक कि व्यक्तिगत, पारिवारिक जीवन में भी भ्रष्टाचार फैला हुआ था। समस्या यह थी कि जबतक जन-जीवन से भ्रष्टाचार दूर नहीं होता, तबतक न तो देश का विकास हो पा रहा था और न ही व्यक्ति का। 8 साल पहले हर गली-चौराहे पर यही चर्चा आम थी कि भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने चाहिए लेकिन जब सरकार के मंत्रियों पर ही घोटाले के आरोप लगे हों तो ऐसे में सवाल किससे और सजा किसे और कौन दे।
सच्चाई यह थी कि जब सरकारी मशीनरी ही इससे प्रभावित थी तो कानून कोई कारगर उपाय कैसे लागू करता। 2014 में नई सरकार सत्ता में आई और उसने महसूस किया कि भ्रष्टाचार समाज के चरित्र और स्वभाव से जुड़ी हुआ है। इसके लिए सर्वप्रथम समाज का नेतृत्व करनेवाले लोग जैसे नेता, अधिकारी, धर्म गुरुओं को अपने आदर्श चरित्र का उदाहरण जन सामान्य के समक्ष रखना चाहिए। इन लोगों के आचरण का ही अनुकरण समाज के अन्य लोग करते हैं। महात्मा गांधी ने भी जैसा समाज बनाना चाहा, उसके अनुसार पहले स्वयं को बनाया।
कालेधन पर बड़ी कार्रवाई
जब पीए मोदी ने 2014 में केंद्र की सत्ता संभाली और उसके बाद से ही भ्रष्टाचार पर समय-समय पर लगातार प्रहार करते रहे हैं। उन्होंने सत्ता संभालते ही कहा था कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार और कालेधन पर कार्रवाई करेगी। पीएम की ये बातें तब लोगों को समझ में आने लगीं जब उन्होंने भ्रष्टाचार के दीमक को खत्म करने के लिए कई बड़े और कड़े कदम उठाए, जिन्में नोटबंदी प्रमुख था। और सबसे बड़ी बात कि पीएम के इस निर्णय का जनता ने दिल से स्वागत किया।
यूपीआई से डिजिटल पेमेंट्स में क्रांति
नोटबंदी के बाद पीएम ने यूपीआई से डिजिटल पेमेंट्स की बात कही, जिससे अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता आई। कोविड महामारी के बाद इसको अपनाने की में गति में और ज्यादा तेजी आई। जेफरीज की एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2022 में देश में खुदरा डिजिटल भुगतानों में यूपीआई की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत है। बड़ी बात यह है कि डेबिट व क्रेडिट कार्ड से होने वाले लेन-देन की तुलना में इससे की गई लेनदेन लगभग 4.5 गुना अधिक है। आज भारत में ही नहीं, विश्व के कई देशों में इस पेमेंट सिस्टम का उपयोग हो रहा है, जो देश को गौरवान्वित कर रहा है।
भ्रष्टाचारियों पर गौरवगान बर्दाश्त नहीं
पीएम ने कहा था कि हमने देखा है, जेल की सजा होने के बावजूद भी, भ्रष्टाचार साबित होने के बावजूद भी, कई बार भ्रष्टाचारियों का गौरवगान किया जाता है। ईमानदारी का ठेका लेकर घूमने वाले लोग, भ्रष्टाचारी के साथ फोटो खिंचवाते हैं। उन्हें शर्म नहीं आती है। ये स्थिति भारतीय समाज के लिए ठीक नहीं है। भ्रष्टाचार को लेकर पीएम की दो टूक से साफ है कि पीएम देश के विकास के लिए क्या सोचते हैं इस मसले पर।
सोच बदली कि रिश्वत के बिना भी काम संभव
भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने वाली संस्थाओं को वर्तमान केंद्र सरकार ने बिना किसी हस्तक्षेप के काम करने की छूट दी। मंत्री हों या अफसर या फिर जनता, केंद्र सरकार की कार्य प्रणाली से सभी को यह मैसेज गया कि भ्रष्टाचार किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पीएम का साफ संदेश है कि भ्रष्टाचार करने वाला चाहे कितना ही बड़ा आदमी हो, उसके खिलाफ कार्रवाई करनी है। यही कारण है कि पहले भी और हाल के दिनों में भी भ्रष्टाचार को अंजाम देनेवाले लोगों पर प्रवर्तन निदेशालय अर्थात ED ने बड़ी कार्रवाई शुरू की। सरकार के इस अडिग फैसले का असर यह हुआ कि भ्रष्टाचारी गलत काम करने से डरने लगे और आम आदमी में सरकार को लेकर यह मैसेज गया कि उनका काम बिना रिश्वत दिए भी हो सकता है।
लालकिले से ऐलान
पीएम मोदी ने इस बार 15 अगस्त को लालकिले की प्राचीर से एक निर्णायक ऐलान किया। वह ऐलान था भ्रष्टाचार और परिवारवाद के खिलाफ एक निर्णायक जंग का। पीएम मोदी देश के विकास के लिए भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, परिवारवाद, जनता के पैसे की लूट, आतंकवाद को खतरनाक मानते हैं। यही कारण है कि सीमा पार की जनता और हुक्मरान भी पीएम की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीतियों की सराहना कर रहे हैं। पीएम जब कहते हैं कि हमारी कोशिश है कि जिन्होंने देश को लूटा है, उनको लौटाना भी पड़े, हम इसकी कोशिश कर रहे हैं तो देश को लेकर प्रधान सेवक की चिंता साफ झलकती है। पीएम मोदी ने लोगों से अपील की, ‘मेरे 130 करोड़ देशवासी आप मुझे आशीर्वाद दीजिए, आप मेरा साथ दीजिए, मैं आज आपसे साथ मांगने आया हूं, आपका सहयोग मांगने आया हूं, ताकि मैं इस लड़ाई को लड़ सकूं और इस लड़ाई को देश जीत पाए।’ पीएम का ये आह्वान देश के विकास और उसके भविष्य के लिए बहुत मायने रखता है।
गलत हाथों में जाने से 20 लाख करोड़ बचा
पिछले आठ वर्षों में DBT अर्थात प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के द्वारा मोबाइल और आधार सहित अन्य आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए 20 लाख करोड़ रुपये को गलत हाथों में जाने से बचाया गया। प्रत्‍यक्ष लाभ अंतरण के अंतर्गत वार्षिक नकद राशि (2019-20) में 178.13 करोड़ रुपये जारी किया गया। प्रत्‍यक्ष लाभ अंतरण के उद्देश्य हैं- अधिक मात्रा में खाद्यान्‍नों की वास्‍तविक आवाजाही को कम करना, आहार में विविधता को बढ़ाना, लीकेज को कम करना, अपनी खपत का चुनाव करने के लिए लाभार्थियों को अधिक स्‍वायत्‍तता प्रदान करना, बेहतर लक्ष्‍य की सुविधा प्रदान करना, वित्‍तीय समावेशन को बढ़ाना।
भ्रष्टाचारी अफसरों पर गिरी गाज
भ्रष्टाचारी अफसरों (27) से देश को बचाने के लिए उन्हें जबरन रिटायरमेंट देकर बाहर किया गया। आईपीएस और आईआरएस जैसे अफसरों पर यह कार्रवाई लगातार जारी है ताकि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके और पैसा सही हाथों तक पहुंच सके। अनुमानित है कि केंद्र सरकार की सख्ती के कारण प्रवर्तन निदेशालय ने 8 साल में लगभग एक लाख करोड़ रुपये जब्त किए हैं। इतना ही नहीं, देशभर में व्यक्ति से लेकर बड़ी कंपनियों पर पड़नेवाले छापे से सैकड़ों करोड़ रुपये जब्त किए गए और ये कार्रवाइयां आज भी जारी हैं और आगे भी जारी रहेंगी, क्योंकि ‘न खाता हूं न खाने दूंगा’ के नारे के साथ पीएम मोदी ने भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार किया है। केंद्र सरकार ने हर मोर्चे पर भ्रष्टाचार कम करने का पूरा प्रयास किया है और अब इसका असर भी दिखने लगा है। मनरेगा का डिजिटल अटेंडेंस इस प्रयास की एक अगली कड़ी है और इस कड़ी में सरकार के इस कदम को भ्रष्टाचार पर किए जाने वाले एक बड़े प्रहार के रूप में देखा जाना चाहिए।

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