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बिहार की जनता को नागनाथ और सांप नाथ के खिलाफ विकल्प के लिए खुद करनी होगी पहल : प्रशांत

पटना : बिहार में जन सुराज की संकल्पना के साथ अपने लिए राजनीतिक जमीन तलाशने निकले चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की ओर इशारा करते हुए कहा कि राज्य की जनता के पास अभी दो ही राजनीतिक विकल्प ‘नागनाथ और सांपनाथ’ हैं लेकिन इसके खिलाफ एक मजबूत विकल्प उसे तभी मिलेगा जब वह खुद (जनता) इसके लिए पहल करेगी।

श्री किशोर ने सोमवार को पूर्वी चंपारण जिले के मधुबन के तालिमपुर गांव में जन सुराज पदयात्रा के 86 वें दिन जनसभा को संबोधित करते हुए श्री लालू प्रसाद यादव और श्री नीतीश कुमार पर जमकर निशाना साधा और कहा कि पिछले 30 साल से बिहार में नागनाथ और सांपनाथ की सरकार चल रही है। राज्य की जनता के पास बस दो ही विकल्प नागनाथ और सांपनाथ रह गया है लेकिन अब प्रदेश की जनता को साथ मिलकर नया विकल्प खोजना पड़ेगा।देश के कई प्रमुख दलों के लिए अब तक चुनावी रणनीति बनाने वाले श्री किशोर ने कहा कि बिहार में दल बनाने की प्रक्रिया है कि जो आदमी राजनीति में आता है वो दल बना लेता है और खुद उस दल का नेता बन जाता है। उसके बाद अगला नेता अपने बेटा को बना देता है। आम जनता पूरी जिंदगी झंडा लेकर घूमती है और उसके हाथ कुछ नहीं लगता है।

श्री किशोर ने कहा कि बिहार में शराबबंदी के लागू होने से हर साल जनता का 20 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। बिहार की जनता का यह पैसा उन भ्रष्ट पुलिसवालों और अफसरों की जेब में जा रहा है जो घर-घर होम डिलीवरी करवा रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम आपको नीतीश कुमार, लालू यादव और मोदी जी का उदाहरण देने नहीं आए हैं। हम यहां आपको यह बताने आए हैं कि बबूल का खेती करेंगे तो उस पेड़ से आम नहीं मिलेगा।”चुनावी रणनीतिकार ने कहा कि बिहार की जनता को अपनी समस्या के बारे में पता है लेकिन जनता उस समस्या का समाधान नहीं निकाल पा रही है। बिहार कभी नहीं सुधर सकता ये बात मान कर सब नेताओं ने भी अपने हाथ खड़े कर लिए हैं। उन्होंने कहा कि बिहार तभी सुधरेगा जब बिहार की जनता इसे ईमानदारी से सुधारने की जिम्मेदारी लेगी।

श्री किशोर ने कहा कि बिहार की जनता में यह काबिलियत है कि वह बिहार को आने वाले 10 वर्षों में अग्रणी राज्यों में शामिल करा सकती है। उन्होंने कहा कि बिहारी शब्द ने आज दूसरे राज्यों में गाली का रूप ले लिया है, आज बिहारी मतलब बेवकूफ, अनपढ़ माना जाने लगा है लेकिन बिहार के लोग बेवकूफ नहीं है। बिहार ज्ञान की भूमि रही है। देवताओं को भी बिहार में आ कर ज्ञान की प्राप्ति हुई है। इस मिट्टी का गौरव करना हम बिहारियों को सीखना पड़ेगा।जन सुराज पदयात्रा के दौरान श्री किशोर अब तक लगभग 1000 किलोमीटर से अधिक पैदल चल चुके हैं। इसमें 550 किलोमीटर से अधिक पश्चिम चंपारण में पदयात्रा हुई और पूर्वी चंपारण में अब तक 350 किलोमीटर से अधिक पैदल चल चुके हैं। इस दौरान वह शिवहर में आठ दिन रुके और अलग-अलग गांवों-प्रखंडों में गए। शिवहर में उन्होंने 140 किलोमीटर से अधिक की पदयात्रा की। इस दौरान जनसभाओं के साथ ही श्री किशोर ने स्थानीय लोगों के साथ संवाद भी स्थापित किया ।(वार्ता)

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