
नई दिल्ली । दिल्ली हाई कोर्ट ने दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे बच्चों के इलाज के लिए ऑनलाइन क्राऊड फंडिंग के प्लेटफार्म का देश के टॉप निजी और सरकारी कंपनियों के बीच व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया है ताकि उनके पास से फंड एकत्र किया जा सके। जस्टिस प्रतिभा सिंह की बेंच ने केंद्र सरकार को ये निर्देश देते हुए कहा कि ये कंपनियां कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) के तहत इन प्लेटफार्म को फंड दे सकती हैं।
इसके पहले सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वो दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे बच्चों के इलाज के लिए दिल्ली के एम्स और देश के दूसरे केंद्रों में इलाज जल्द शुरू कराएं। सुनवाई के दौरान कोर्ट को ये सूचित किया गया था कि इलाज कराने वाले बच्चों के परिजनों ने इलाज जल्द शुरू करने के लिए प्राधिकारों से संपर्क किया था लेकिन कोई जवाब नहीं मिल रहा है, खासकर दिल्ली के एम्स से। सुनवाई के दौरान एम्स की ओर से वकील तनवीर ओबेराय ने कहा था कि किस किस्म की बीमारी के लिए कौन सा इलाज और दवाइयां दी जाएं। इसके लिए विशेषज्ञों की एक कमेटी का गठन किया गया है। उन्होंने कहा था कि एम्स में दुर्लभ बीमारियों के इलाज शुरू करने से पहले विशेषज्ञ कमेटी की रिपोर्ट केंद्र सरकार के समक्ष स्वीकृति के लिए रखा जाना है।
सुनवाई के दौरान कुछ याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा था कि हमें आश्चर्य है कि एम्स जैसा संस्थान अभी तक बीमारी की गंभीरता के बारे में ही विचार कर रहा है। उन्होंने कहा था कि कोर्ट के आदेश के एक महीने से ज्यादा बीत गए हैं। उसके बावजूद अभी तक एम्स ने इलाज शुरू नहीं किया। तब कोर्ट ने कहा था कि एम्स का जवाब संतोषजनक नहीं है। वो जल्द से जल्द इलाज शुरु कराए। सिद्धार्थ लूथरा ने बताया था कि कई सार्वजनिक उपक्रम कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के तहत दुर्लभ बीमारियों से ग्रस्त बच्चों के इलाज के लिए फंड मुहैया करा रहे हैं। ये सार्वजनिक उपक्रम की ओर से दिया गया फंड 1200 करोड़ तक का है।
7 दिसंबर, 2021 को कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस बात के लिए फटकार लगाई थी कि दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए आवंटित धन का पूरा उपयोग नहीं कर रही है। कोर्ट ने केंद्र सरकार के हलफनामे का जिक्र करते हुए कहा था कि पिछले तीन सालों में दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए आवंटित 193 करोड़ रुपये धन का उपयोग नहीं किया गया। 4 अगस्त, 2021 को केंद्र ने कोर्ट को बताया था कि दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे बच्चों के इलाज के लिए आनलाइन क्राऊड फंडिंग का प्लेटफार्म लांच कर दिया गया है। केंद्र सरकार की ओर से एएसजी चेतन शर्मा ने कहा था कि आनलाइन पोर्टल काम करने लगा है। इसका लिंक http://rarediseases.aardeesoft.com है। उन्होंने कहा था कि सरकारी कंपनियों और निजी कारपोरेट से इस पोर्टल के जरिये धन देने के लिए प्रेरित करने की कोशिश की जा रही है। केंद्र सरकार के इस प्रयास की हाई कोर्ट ने सराहना करते हुए पोर्टल के व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया था।
उल्लेखनीय है कि अर्नेश शॉ नामक बच्चे ने याचिका दायर की थी। कोर्ट ने नेशनल कंसोर्टियम फॉर रिसर्च , डेवलपमेंट एंड थेराप्युटिक फॉर रेयर डिसीजेस नामक कमेटी का गठन करने और रेयर डिसीजेस फंड गठित करने का आदेश दिया था।(हि.स.)



