Varanasi

एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना का हम जश्न मना रहे: सुभाष सरकार

वाराणसी । केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डाॅ. सुभाष सरकार ने एक माह तक चलने वाले काशी तमिल संगमम की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि संगमम के रूप में हम एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना का जश्न मना रहे हैं। यही नहीं, इस कार्यक्रम के माध्यम से हम उत्तर और दक्षिण की एकता का संदेश भी दे रहे हैं। केन्द्रीय मंत्री शुक्रवार को बीएचयू एम्फीथियेटर मैदान में काशी तमिल संगमम के अंतर्गत आयोजित “तमिलनाडु में अध्यापन के पारंपरिक तरीकों तथा उनके प्रभाव” विषयक शैक्षणिक सत्र को सम्बोधित कर रहे थे।

केन्द्रीय मंत्री ने काशी-विश्वनाथष्टकम से एक श्लोक साझा किया, जिसकी जिसकी रचना श्री आदि शंकराचार्य ने की थी। उन्होंने कहा कि एक तरफ ज्ञान, दर्शन, संस्कृति, भाषा, साहित्य, कला और शिल्प का शहर वाराणसी भारत का प्रतिनिधित्व करता है तो दूसरी ओर, मंदिरों की भूमि, तमिलनाडु, संस्कृति, कला, शिल्प और साहित्य, ज्ञान का एक और तीर्थ है। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि संगमम न केवल भारत के उत्तर और दक्षिण बल्कि पूरे देश के बीच ऐतिहासिक, सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंधों के कई पहलुओं का जश्न मनाता है।

हम लोगों को एक दूसरे को पोस्टकार्ड भेजना चाहिए

केन्द्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डाॅ. सुभाष सरकार ने कार्यक्रम के दौरान एक दूसरे से कनेक्शन जोड़ने के लिए तरीका भी बताया। उन्होंने कहा कि काशी तमिल संगमम एक दूसरे को जोड़ने का माध्यम बना है। इस जुड़ाव को और मजबूत करने के लिए हमलोगों को एक दूसरे को पोस्टकार्ड भेजना चाहिए। पोस्टकार्ड हमलोगों को एक दूसरे से हमेशा जुड़े होने का अहसास कराएगा। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री ने तमिलनाडु से आए लोगों के बीच अपना पता लिखकर पोस्टकार्ड का वितरण भी किया। तमिलनाडु के लोगों ने भी अपना पता लिखकर केंद्रीय राज्य मंत्री को दिया।

डाॅ. सुभाष सरकार ने कहा कि सभी लोगों को मैं जवाब दूंगा और उनके जवाब का मुझे इंतज़ार रहेगा। इसके पहले कार्यक्रम की शुरुआत डॉ सौम्या मिश्रा के नेतृत्व में बीएचयू के कुलगीत की प्रस्तुति से हुई। मुख्य अतिथि केन्द्रीय मंत्री का सम्मान अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह देकर किया गया। कार्यक्रम में बीएचयू के प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे, प्रो. सुनील कुमार सिंह , सी मुथुलक्ष्मी, रामचंद्र, के.एस. नारायणन ने भी विचार रखा। कार्यक्रम की समन्वयक प्रो. डॉ. बिंदा दत्तात्रेय परांजपे रहीं ।(हि.स.)

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