
कोलकाता । अवैध तरीके से नियुक्त किए गए शिक्षकों को बर्खास्त करने के हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद उनकी नौकरी बरकरार रखने के लिए अतिरिक्त पद सृजित करने का फैसला राज्य मंत्री मंडल की ओर से लिए जाने को लेकर कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। कलकत्ता हाई कोर्ट के न्यायाधीश अभिजीत गांगुली की एकल पीठ में शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान जब शिक्षा सचिव मनीष जैन ने इस बात का खुलासा किया कि राज्य मंत्रिमंडल ने ऐसे लोगों की नियुक्ति के लिए अतिरिक्त पद सृजित करने का फैसला लिया था तब न्यायाधीश ने तीखी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि राज्य में लोकतंत्र सटीक लोगों के हाथ में नहीं है। आवश्यकता पड़ने पर सत्तारूढ़ पार्टी का प्रतीक चिह्न खत्म करने के लिए चुनाव आयोग को पत्र लिखा जाएगा। पार्टी की संवैधानिक वैधता भी परखी जाएगी।
हालांकि न्यायाधीश ने यह केवल मौखिक टिप्पणी की है। उन्होंने लिखित में कोई आदेश नहीं दिया है। इस पर तृणमूल कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने न्यायमूर्ति अभिजीत गांगुली को अरण्यदेब गांगुली कह कर संबोधित किया और कहा कि जितना बुत्ता है लगा लीजिए जो कर सकते हैं कर लीजिए कुछ होने वाला नहीं है।पार्टी के वकील और श्रीरामपुर से तृणमूल के सांसद कल्याण बनर्जी ने भी इसे लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि न्यायाधीशों को भी कानूनी सीमा में बोलना चाहिए। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस इतनी कमजोर पार्टी नहीं है कि इस तरह की धमकियों से डर जाएगी। न्यायाधीश ने ये बातें केवल मौखिक तौर पर कही है। अगर उनमें साहस है तो इसे अपने आदेश में लिखकर दिखाएं। उसके बाद हम लोग इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।(हि.स.)



