Health

पेट के कैंसर से बचाव के लिए जरूरी है उचित पोषण युक्त खानपान

  • सुरेन्द्र किशोरी

कैंसर रोगियों की तेजी से बढ़ती संख्या के मद्देनजर भारत ही नहीं, विश्व के तमाम देशों में लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहे हैं। अमेरिकन एसोसिएशन फॉर कैंसर रिसर्च के अनुसार नवम्बर माह को पेट (गैस्ट्रिक) कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। जिससे लोगों में कैंसर के संबंध में ज्यादा अच्छे से ज्ञान हो, समय रहते इलाज संभव हो सके।क्योंकि कैंसर बहुत ही घातक एवं आक्रामक बीमारी है, यह रोगी को व्यक्तिगत एवं पारिवारिक दोनों प्रकार से प्रभावित करती है। कैंसर शारिरिक, मानसिक, भावनात्मक समस्या के साथ-साथ इलाज बहुत महंगा होने के कारण आर्थिक रूप से भी प्रभावित करती है। कैंसर के कारण व्यक्ति की कार्यशैली एवं भविष्य की योजनाओं को भी प्रभावित करता है या पूरी तरह बदल देता है।

इस बीमारी की आक्रामकता एवं गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि विश्व स्वस्थ्य संगठन के अनुसार 2020 में दुनिया भर में कैंसर से होने वाली मौतों की संख्या एक करोड़ से थी, यानी प्रत्येक छह मौत में एक मौत कैंसर के कारण हुई। जबकि केवल भारत में लगभग 11 लाख 57 हजार (2019) कैंसर रोगी में करीब लाख 84 हजार रोगी की मौत हो गई। कैंसर एक बहुचरण प्रक्रिया है, जिसमें सामान्य कोशिकाओं के ट्यूमर कोशिकाओं में परिवर्तन होने से उत्पन्न होता है जो आमतौर पर एक पूर्व कैंसर कोशिका या घाव से घातक ट्यूमर तक बढ़ता है।

बेगूसराय के लडुआरा निवासी रिसर्च स्कॉलर मेहरजबीं तमन्ना बताती हैं कि कैंसर व्यक्ति में अनुवंशिक कारणों और बाहरी एजेंटों की तीन श्रेणियों के बीच परस्पर क्रिया का परिणाम है। यह तीन एजेंट हैं भौतिक कार्सिनोजेन्स (Physical Carcinogens) जैसे की पराबैंगनी एवं आयनकारी विकिरण, रासायनिक कार्सिनोजेन्स (Chemical Carcinogens) जैसे कि एस्बेटसट, तंबाकु के धुंए के घटक अल्कोहल, एफलाटॉक्सिन (एक खाद्य संदूषक) और आर्सेनिक (पिने के पानी को दूषित करता है) तथा जैविक कार्सिनोजेन्स (Biological carcinogens) कुछ वायरस वैक्टीरिया या परजीवी से संक्रमण।

इसके अलावा भी कई कारण है जैसे तंबाकू, शराब, एल्कोहलिक पेय पदार्थ, अस्वस्थ्य एवं असंतुलित आहार शारीरिक निष्क्रियता, वायु प्रदूषण इत्यादि। उम्र बढ़ने के साथ-साथ कैंसर होने के जोखिम भी बढ़ जाते हैं। पेट में पाया जाने वाला हेलिकोबैक्टर पाइलोरी मानव पेपिलोमा वायरस (एच.पी.वी.), हेपेटाइटिस-बी वायरस, हेपेटाइटिस-सी वायरस और एपस्टीन-बार वायरस (2) शामिल है। हेपेटाइटिस-बी एवं सी वायरस और कुछ प्रकार के एचपीवी लीवर और सर्वाइकल कैंसर के खतरे हैं। कैंसर कई प्रकार के होते है जैसे कि स्तन कैंसर, फेफड़े की कैंसर, प्रोस्टेट, त्वचा, पेट, लीवर इत्यादि।

लेकिन नवम्बर माह विशेषकर पेट की कैंसर (Stomach cancer) की जागरूकता के लिए है तथा गैस्ट्री कैंसर की रोकथाम एवं सही पोषण जरूरी है। कैंसर की रोकथाम की दिशा में हमें कई महत्वपूर्ण कदम उठाने की जरूरत है। इसके लिए जीवन भर शरीर की सही वजन बनाए रखना, बॉडीमास इन्डेक्स को 21 से 23 के बीच बनाए रखना चाहिए। औसत शारीरिक गतिविधि बनाए रखें तथा रोजाना 30 मिनट चलना, जॉगिंग या व्यायाम करना (हल्का एवं मध्यवर्गीय व्यायाम, ऊर्जा (Energy), औसत ऊर्जा सघन वाला (125KCal/100gm) भोजन का उपयोग करें तथा चीनी, शर्करा युक्त पेय उच्च ऊर्जा सघन वाला (225-275K Cal/100gm) एवं उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले भोजन पिज्जा, सॉसेज, क्रीम वाला जूस, आइसक्रीम, फास्ट फूड, चॉकलेट पूर्ण वसा वाला दूध (Full fat milk), पेस्ट्री, तला-भुना एवं धुएं वाली आग पर बना खाना खाने से बचें।

ताजा फल, सब्जियों एवं अनाज, दाल, फलियां प्राकृतिक फ्राइबर के स्रोत हैं (30 gm/d A/C to ICMR) का सेवन करना चाहिए। मांसाहारी भोजन में लाल मांस (Red meat) जैसे बीफ, पोर्क, बकरा इत्यादि का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। प्रोसेस्ट रेड मीट जैसे स्मोक्ड, साल्टी एवं केमिकल प्रीजरवेसन वाला मांस खाने से बचना चाहिए। रेड मीट (लाल मांस) सप्ताह में औसतन तीन सौ ग्राम से कम होना चाहिए। शराब एवं एल्कोहलिक पेय पदार्थ पीने से बचें, ऐसे मादक पेय कैंसर के कारण बनते हैं। वसा (Fat) का सेवन कुल कैलोरी का 25-30 ग्राम के बीच होना चाहिए।

ज्यादा वसा वाली भोजन जैसे चीज, बटर, डालडा, वनस्पति तेल इत्यादि में बने भोजन का सेवन नहीं करें या सीमित मात्रा में खाएं। फंगल बैक्ट्रीया (हानिकारक) इत्यादि से दूषित भोजन नहीं खाएं, भोजन की विविधता को प्रमुखता देनी चाहिए एवं विभिन्न प्रकार के फल, सब्जी, अनाज, मांस-मछली, वसा वाले भोजन का संतुलित मात्रा में प्रयोग जरूरी है। भोजन में कई प्रकार के पोषक पदार्थ पाए जाते हैं, जैसे विटामिन, मिनरल, प्रोटीन वसा कार्बोहाइड्रेट इत्यादि। इसी प्रकार से एंटी ऑक्सीडेंट भी ऐसा पदार्थ है जो कोशिकाओं को मुक्त कणों (Tree redicles) से होने वाले नुकसान से बचा सकता है और हृदय रोग, कैंसर रोग और अन्य बीमारियों के निदान में अहम भूमिका निभा सकता है।

कई बार खराब पोषण के कारण कैंसर रोगी में विटामिन की कमी हो जाता है, विशेष रूप से फोलिक एसिड, विटामिन-सी, पाइरिडोक्सिन, अन्य पोषक तत्वों की। एंटी ऑक्सीडेंट और विटामीन का सबसे अच्छा स्त्रोत पौधे आधारित खाद्य पदार्थ हैं, विशेष रूप से ताजा फल एवं सब्जियां। खाद्य पदार्थ जो विशेष रूप से एंटीऑक्सीडेंट में उच्च होते हैं उन्हें अक्सर ”सुपरफुड” या कार्यात्मक भोजन कहा जाता है। कुछ विशिष्ट एंटी ऑक्सीडेंट को आहार में शामिल करने के लिए दूध एवं डेयरी उत्पाद, अंडे, यकृत इत्यादि विटामीन-ए से भरपुर है। अधिकांश फल एवं सब्जियों में विटामिन-सी पाए जाते हैं, विशेषकर खट्टे फल (Citrus fruits) जामुन, संतरा, निम्बू, मोसम्मी, शिमला मिर्च इत्यादि में। नट्स एवं बीच एल्मॉड (Almond), काजू, मुंगफली, सूर्यमुखी, तीसी तील इत्यादि में विटामिन-ई पाया जाता है।

बीटा-कैरोटीन चमकीले रंग के फल और सब्जियों गाजर, मटर, पालक, आम, पपीता, संतरा इत्यादि में पाए जाते हैं। लाइकोपीन, टमाटर, तरबूज सहित गुलाबी और लाल रंगों के फल एवं सब्जीयों में पाई जाती है। ल्यूटिन हरी पत्तीदार सब्जियों, मक्का पपीता एवं संतरा में पाया जाता है। सेलेनियम चावल, मक्का, गेहूं, अन्य साबुत अनाज के साथ ही मेवा, अंडा, पनीर और फलियां में पाया जाता है। हरा आलू में कार्सिनोजेनिक पदार्थ एल्के लॉइड एवं सोलानीन नामक हानिकारक पदार्थ पाया जाता है। इसलिए हरे आलू का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

इसी प्रकार से कच्चे अंडा का भी सेवन नहीं करना चाहिए, इससे एवीडिन नामक पोषण विरोधी तत्व पाए जाते हैं जो बायोटीन नामक पोषक तत्वों से बंधकर शरीर के उपयोग के लिए अनुपलब्ध हो जाता है। इसके अलावा व्यक्ति को नियमित रूप से समय-समय पर चिकित्सीय जांच करवाते रहना चाहिए, भोजन का विशेष ध्यान रखने के लिए न्यूट्रीशयन या डाइटिशियन से सलाह लेते रहना चाहिए।

(लेखक हिन्दुस्थान समाचार से संबद्ध हैं।)

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