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सूर्य ग्रहण से पहले भगवान महाकाल ने सूर्यदेव के रूप में दर्शन दिए, हुआ श्रृंगार

भोपाल । उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल ने सूर्यग्रहण के पहले अपने भक्तों को सूर्यदेव के रूप में दर्शन दिए। महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार को अल सुबह भस्मारती के बाद बाबा महाकाल का सूर्यदेव के रूप में श्रृंगार किया गया। सूर्यग्रहण के चलते भगवान महाकाल का यह विशेष श्रृंगार किया गया है।

महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के 4 बजे मंदिर के कपाट खोलने के पश्चात बाबा महाकाल को जल से स्नान कराया गया। इसके बाद पंडे पुजारियों ने दूध, दही, घी, शहद फलों के रस से बने पंचामृत से बाबा महाकाल का अभिषेक पूजन किया। सूर्य ग्रहण होने के चलते भगवान महाकाल का चन्दन से सूर्य के स्वरूप में श्रृंगार किया गया।

महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। भस्म आरती के दौरान महाकाल को भांग, चंदन, सिंदूर अर्पित कर मस्तक पर रजत त्रिशूल और चंद्र के साथ मोगरे के पुष्प का धारण कराए गए। मस्तक पर तिलक और सिर पर शेषनाग का रजत मुकुट धारण कर रजत की मुंडमाला और रजत जड़ी रुद्राक्ष की माला के साथ सुगन्धित पुष्प से बनी फूलों की माला अर्पित की गई। इसके बाद फल और मिष्ठान का भोग लगाया। भस्म आरती में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने सूर्यदेव के रूप में सजे भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया। शाम को सूर्य ग्रहण होने से पहले हजारों श्रद्धालु मंदरि पहुंचे और भगवान के दर्शन किए।

एक दिन पहले सोमवार को देश में सबसे पहले ज्योतिर्लिंग महाकाल महाकाल के मंदिर में दीपावली मनाई गई थी। मंदिर तड़के बजे भस्म आरती में सबसे पहले पुजारियों ने भगवान महाकाल को अन्नकूट का भोग लगाकर फुलझड़ी से आरती की। मंदिर के पट खुलने के के बाद पुजारियों ने भगवान महाकाल का पंचामृत अभिषेक-पूजन किया। पुजारी परिवार की महिलाओं ने भगवान महाकाल को केसर चंदन का उबटन लगाया। इसके उपरांत पुजारियों ने भगवान महाकाल को गर्म जल से अभ्यंग (संपूर्ण) स्नान कराया।

भगवान को सोने चांदी के आभूषण व नवीन वस्त्र धारण कराकर भव्य श्रृंगार किया गया। इसके बाद अन्नकूट में विभिन्न प्रकार के पकवान, फल, सूखे मेवे, विभिन्न फलों के रस आदि का भोग लगाकर फुलझड़ी से आरती की गई। शाम को श्री महाकाल महालोक में एक लाख दीप प्रज्वलित किए गए। इसके बाद प्रदेशभर में सोमवार को धन, संपदा, समृद्धि व ऐश्वर्य का पर्व दीपावली हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। लोगों ने रात में घरों व प्रतिष्ठानों में जले समृद्धि के दीप जलाए और रंगारंग आतिशबाजी की, जो देर रात तक जारी रही।(हि.स.)

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