
नयी दिल्ली : केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली जिसमें कम से कम 14 उग्रवादी मारे गए जिनमें कई इनामी उग्रवादी थे। इस दौरान सैकड़ों ने आत्मसमर्पण किया या उन्हें गिरफ्तार किया गया।मंत्रालय द्वारा गत सितंबर के उत्तरार्ध तक के आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में सात माओवादी मारे गए और 436 को गिरफ्तार किया गया या उन्होंने आत्मसमर्पण किया। इसी तरह झारखंड में चार माओवादी मारे गए और 120 गिरफ्तार हुए या उन्होंने आत्मसमर्पण किया। इस दौरान बिहार में 36 माओवादियों को गिरफ्तार/आत्मसमर्पण किया गया। इसी तरह मध्य प्रदेश में भी सुरक्षाबलों ने तीन माओवादियों को मार गिराया ।
मंत्रालय के अनुसार “वर्ष 2022 में सुरक्षा बलों ने वामपंथी उग्रवादियों के खिलाफ लड़ाई में ऑपरेशन ऑक्टोपस, ऑपरेशन डबल बुल, ऑपरेशन चक्रबंध में अभूतपूर्व सफलता हासिल की हैं।”मंत्रालय की और से जारी 2022 की गतिविधियों पर जारी रिपोर्ट में कहा गया है, “ यह सफलता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि मारे गए इन माओवादियों में से कई के सिर पर लाखों का इनाम था और (मारे गए उग्रवादी) मिथिलेश महतो पर एक करोड़ों का इनाम था।”प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के बाद पहली बार छत्तीसगढ़ और झारखंड की सीमा पर स्थित ‘बुढ़ापहाड़’ तथा बिहार के चक्रबंधा और भीमाबंध के अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में प्रवेश करके माओवादियों सफलतापूर्वक बाहर निकल दिया है।
शीर्ष माओवादियों के गढ़ रहे इन क्षेत्रों में अब सुरक्षा बलों के स्थायी शिविर स्थापित कर दिए हैं।इन स्थानों पर भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद, विदेशी ग्रेनेड, एयरो बम और आईईडी बरामद किए गए ।गृह मंत्री अमित शाह ने श्री मोदी इस “निर्णायक सफलता” के लिए सीआरपीएफ और राज्य सुरक्षा बलों को बधाई दे चुके हैं।देश में 2009 में वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से संबंधित हिंसा की 2258 घटनाएं हुई थी। 2021 में 509 घटनाएं हुई जो इसमें 77 प्रतिशत की गिरावट दर्शाती है। 2010 में ऐसी घटनाओं में नागरिक और सुरक्षा बलों के जवानों सहित 1005 लोगों की मृतयु हुई थी। 2021 में 147 मौत हुईं।
पिछले दो वर्षों में वामपंथी उग्रवादी हिंसा की घटनाओं और इसके परिणामस्वरूप होने वाली मौतों में क्रमशः 24 और 27 प्रतिशत की कमी आई है।वामपंथी उग्रवाद से निपटने के लिए2015 में एक राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना शुरू की गई थी। नीति में बहु-आयामी रणनीति की परिकल्पना की गई है जिसमें सुरक्षा संबंधी उपाय, विकास हस्तक्षेप, स्थानीय समुदायों के अधिकारों और अधिकारों को सुनिश्चित करना आदि शामिल है ।
इसी नीति के तहत छत्तीसगढ़ के बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा जिलों के आंतरिक क्षेत्रों से भर्ती रैली के माध्यम से सीआरपीएफ में मूल निवासी आदिवासी युवाओं को कांस्टेबल के रूप में भर्ती करने के लिए कांस्टेबल के पद के लिए शैक्षिक योग्यता में छूट दी गयी। इन जिलों के 400 आदिवासी युवाओं को भर्ती किया जाएगा। गृह मंत्रालय ने कहा है कि उन्हें भर्ती के लिए शारीरिक मानकों में उचित छूट भी दी जाएगी।(वार्ता)



