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महिलाओं और बच्चों को मिलेगा त्वरित न्याय, 2031 तक जारी रहेगी फास्ट ट्रैक कोर्ट योजना

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय (एफटीएससी) योजना को 31 मार्च 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दी है। योजना पर 3,788.04 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके तहत देशभर में 850 विशेष न्यायालय संचालित होंगे। वर्तमान में 779 न्यायालय कार्यरत हैं। योजना का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों को समयबद्ध न्याय दिलाना, लंबित मामलों में कमी लाना और पीड़ितों के अनुकूल न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करना है।

नई दिल्ली। दुष्कर्म और बच्चों के विरुद्ध यौन अपराधों से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई और समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय (एफटीएससी) योजना को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को इस केंद्र प्रायोजित योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दी।

योजना के तहत 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक कुल 3,788.04 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 2,353.15 करोड़ रुपये और राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों का हिस्सा 1,434.89 करोड़ रुपये होगा। केंद्र सरकार अपने हिस्से की राशि निर्भया फंड से उपलब्ध कराएगी।

850 फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों का होगा संचालन

योजना के तहत देशभर में विशेष पॉक्सो न्यायालयों सहित कुल 850 फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों के संचालन का प्रावधान किया गया है। वर्तमान में 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 779 एफटीएससी कार्यरत हैं, जिनमें 399 विशेष पॉक्सो न्यायालय शामिल हैं।

न्यायालयों की संख्या बढ़ाकर 850 करने का उद्देश्य उन अतिरिक्त जिलों को योजना के दायरे में लाना है, जहां दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम के तहत बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। नए न्यायालयों की स्थापना लंबित मामलों के आंकड़ों के आधार पर की जाएगी।

प्रत्येक न्यायालय में न्यायिक अधिकारी और छह सहायक कर्मचारी

योजना के अंतर्गत प्रत्येक फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय में एक समर्पित न्यायिक अधिकारी, विशेष लोक अभियोजक और छह सहायक कर्मचारियों की व्यवस्था की जाएगी। इससे न्यायालयों के प्रशासनिक और न्यायिक कार्यों को सुव्यवस्थित करने के साथ पुराने मामलों के शीघ्र निपटारे में मदद मिलेगी।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्धारित वित्तीय मानकों के अनुसार न्यायालयों के संचालन और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए केंद्र सरकार से सहायता मिलेगी।

अब तक 4.02 लाख से अधिक मामलों का निपटारा

फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय योजना की शुरुआत 2 अक्टूबर 2019 को आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2018 के प्रावधानों के तहत की गई थी। योजना को सर्वोच्च न्यायालय के 25 जुलाई 2019 के निर्देशों के अनुपालन में शुरू किया गया था।

योजना के प्रारंभ से अब तक इन विशेष न्यायालयों के माध्यम से 4,02,457 मामलों का निपटारा किया जा चुका है। शुरुआत में इसे एक वर्ष के लिए लागू किया गया था, जिसे बाद में 31 मार्च 2026 तक बढ़ाया गया। अब मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद योजना अगले पांच वर्षों तक जारी रहेगी।

पीड़ितों के अनुकूल न्यायिक व्यवस्था पर जोर

योजना का प्रमुख उद्देश्य दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करना तथा लंबित मामलों की संख्या में कमी लाना है। इसके साथ ही महिलाओं और बच्चों को न्यायालयों में सुरक्षित एवं संवेदनशील वातावरण उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।

योजना के तहत कमजोर गवाह बयान केंद्रों और बच्चों के अनुकूल न्यायालयों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि पीड़ितों को अपनी गवाही देने के दौरान किसी अतिरिक्त मानसिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

डैशबोर्ड से होगी न्यायालयों के कामकाज की निगरानी

योजना का क्रियान्वयन न्याय विभाग द्वारा संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के समन्वय से किया जाएगा। न्याय विभाग एफटीएससी डैशबोर्ड, नियमित प्रगति रिपोर्ट और राज्यों के व्यय विवरण के माध्यम से न्यायालयों के प्रदर्शन की निगरानी करेगा।

इसके अतिरिक्त उच्च न्यायालयों और राज्य सरकारों के साथ समीक्षा बैठकें कर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक सुझाव और प्रतिक्रिया प्राप्त की जाएगी।

सरकार को उम्मीद है कि योजना को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने से न्यायिक व्यवस्था की क्षमता मजबूत होगी, दुष्कर्म और पॉक्सो मामलों के लंबित मामलों में कमी आएगी तथा महिलाओं और बच्चों को समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

100 से अधिक लंबित पॉक्सो मामलों वाले जिलों में विशेष न्यायालय का निर्देश

फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय योजना की शुरुआत सर्वोच्च न्यायालय के स्वत: संज्ञान रिट (आपराधिक) संख्या 1/2019 में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में की गई थी। सर्वोच्च न्यायालय ने पॉक्सो अधिनियम के तहत 100 से अधिक लंबित मामलों वाले जिलों में विशेष न्यायालय स्थापित करने का निर्देश दिया था।

इसी के बाद केंद्र सरकार ने दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम के तहत यौन अपराधों से जुड़े मामलों के समयबद्ध निपटारे के लिए समर्पित फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों की स्थापना की पहल की। अब योजना के विस्तार से देश के अधिक जिलों में इस व्यवस्था का लाभ मिलने की उम्मीद है।

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