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एक दशक में पद्म सम्मान मिलने की प्रक्रिया में आया बड़ा बदलाव: मोदी

नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पद्म सम्मान पाने वाली हस्तियों को शुभकामनाएं देते हुए रविवार को कहा कि पिछले एक दशक में पद्म सम्मान मिलने के सिस्टम में बड़ा बदलाव आया है और पद्म सम्मान के प्रति लोगों का भाव भी बदला है।श्री मोदी ने आकाशवाणी से प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 109वीं कड़ी में कहा कि जो लोग निस्वार्थ भावना के साथ समाज को, देश को, सशक्त करने का काम कर रहे हैं, उन्हें पद्म सम्मान से सम्मानित करने का तरीका बदला है और यही वजह है कि अब इस सम्मान के लिए लोग बड़ी संख्या में अपने विशिष्ट कार्यों के साथ खुद आगे आकर पद्म सम्मान के लिए नामांकन कर रहे हैं।

उन्होंने कहा “मुझे इस बात की बहुत खुशी है कि पिछले एक दशक में पद्म सम्मान का सिस्टम पूरी तरह से बदल चुका है। अब ये पीपल्स पद्म बन चुका है। पद्म सम्मान देने की व्यवस्था में कई बदलाव भी हुए हैं। अब इसमें लोगों के पास ख़ुद को भी नामांकित करने का मौका रहता है। यही वजह है कि इस बार 2014 की तुलना में 28 गुना ज्यादा नामांकन प्राप्त हुए हैं। इससे पता चलता है कि पद्म सम्मान की प्रतिष्ठा, उसकी विश्वसनीयता, उसके प्रति सम्मान हर वर्ष बढ़ता रहा है। मैं पद्म सम्मान पाने वाले सभी लोगों को फिर अपनी शुभकामनाएँ देता हूँ।

“श्री मोदी ने कहा “देश ने तीन दिन पहले पद्म पुरस्कारों का ऐलान किया है तो ‘मन की बात’ में ऐसे लोगों की चर्चा स्वाभाविक है। इस बार भी ऐसे कई देशवासियों को पद्म सम्मान मिला है जिन्होंने जमीन से जुड़कर समाज में बड़े-बड़े बदलाव लाने का काम किया है। इन प्रेरणाप्रद लोगों की जीवन-यात्रा के बारे में जानने को लेकर देश-भर में बहुत उत्सुकता दिखी है। मीडिया की हेडलाइंस, अखबारों के फ्रंट पेज से दूर ये लोग बिना किसी दिखावे के समाज सेवा में जुटे थे। इन लोगों के बारे में पहले शायद ही कुछ देखने-सुनने को मिला है लेकिन अब मुझे खुशी है कि पद्म सम्मान घोषित होने के बाद ऐसे लोगों की हर तरफ चर्चा हो रही है। लोग उनके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने को उत्सुक हैं।

“उन्होंने कहा, “पद्म पुरस्कार पाने वाले ये अधिकतर लोग अपने अपने क्षेत्र में काफी अनूठे काम कर रहे हैं। जैसे कोई एम्बुलेंस सर्विस मुहैया करवा रहा है तो कोई बेसहारों के लिए सिर पर छत का इंतजाम कर रहा है। कुछ ऐसे भी हैं जो हजारों पेड़ लगाकर प्रकृति-संरक्षण के प्रयासों में जुटे हैं। एक ऐसे भी हैं जिन्होंने चावल की 650 से अधिक किस्मों के संरक्षण का काम किया है। एक ऐसे भी हैं जो ड्रग्स और शराब की लत की रोकथाम के लिए समाज में जागरूकता फैला रहे हैं। कई लोग तो स्वयं सहायता समूह विशेषकर नारी शक्ति के अभियान से लोगों को जोड़ने में जुटे हैं। देश में इस बात को लेकर भी बहुत प्रसन्नता है कि सम्मान पाने वालों में 30 महिलाएं हैं। ये महिलाएँ जमीनी स्तर पर अपने कार्यों से समाज और देश को आगे ले जा रही हैं।

“श्री मोदी ने पद्म सम्मान पाने वाले लोगों के योगदान को देशवासियों के लिए प्रेरित करने वाला बताया और कहा कि इस बार सम्मान पाने वालों में बड़ी संख्या उन लोगों की है, जो शास्त्रीय नृत्य, शास्त्रीय संगीत, लोक नृत्य, थिएटर और भजन की दुनिया में देश का नाम रोशन कर रहे हैं। प्राकृत, मालवी और लम्बाडी भाषा में बहुत ही शानदार काम करने वालों को भी ये सम्मान दिया गया है। विदेश के भी कई लोगों को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है जिनके कार्यों से भारतीय संस्कृति और विरासत को नई ऊंचाई मिल रही है। इनमें फ्रांस,ताईवान, मैक्सिको और बंगलादेश के नागरिक भी शामिल हैं।(वार्ता)

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