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किशोर-किशोरियों का साथी बना परतावल साथियां केन्द्र

केंद्र पर पहुंच कर समस्या का समाधान पाते हैं किशोर किशोरियां। जिले में स्थापित हैं कुल 13 साथियां केन्द्र। सेक्सुअल एंड रिप्रोडक्टिव हेल्थ अवेयरनेस डे( 12 फरवरी पर विशेष।

महराजगंज। परतावल ब्लाॅक के एक गांव के 17 वर्षीय एक किशोर ने बताया कि उसे दस माह पहले स्वप्न दोष की शिकायत रहती थी। जिसे लेकर वह परेशान रहता था। उसने अपनी इस समस्या से अपने पीयर एजुकेटर मित्र को अवगत कराया। पीयर एजुकेटर ने किशोर को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र परतावल पर स्थित साथियां केंद्र की राह दिखायी। फिर दोनों साथ-साथ साथियां केन्द्र परतावल गए। वहां पर काऊंसलर से अपनी समस्या बताई तो उन्होंने सारी बात सुनकर समझाया तथा दवा भी उपलब्ध कराया। अब वह पूरी तरह से ठीक है।

इसी प्रकार एक किशोरी ने भी बताया कि उसे महीने में दो बार पीरिएड आता था। साथिंया केन्द्र के बारें में जानकारी मिली। तो वह परतावल गयी। केन्द्र पर गोपनीय तरीके से उसकी समस्या सुनी गयी। जानकारी व दवा मिली। तीन माह दवा खाने के बाद समस्या दूर हो गयी। परतावल साथियां केन्द्र के काऊंसलर अनिरूद्ध गुप्ता का कहना है कि किशोर किशोरियों के जीवन शैली को बेहतर बनाने के लिए जिले में कुल 13 साथियां केन्द्र ( अर्श क्लिनिक) स्थापित किया गया है। इस केन्द्र के माध्यम से यौन और प्रजनन स्वास्थ्य, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य, स्वस्थ जीवन शैली, हिंसा मुक्त जीवन, बेहतर पोषण स्तर और नशावृति की रोकथाम जैसे बिन्दुओं पर काम होता है।

इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से किशोर किशोरियों की समस्याओं को गोपनीय तरीके से सुना जाता है और उसका समाधान होता है। किशोरी सुरक्षा योजना एवं विफ्स ( विकली आयरन एंड फोलिक एसिड) योजना के तहत भी काम होता है। किशोरियों के बीच सैनेटरी पैड व आयरन की गोली वितरित होती है। उन्होंने यह भी बताया कि परतावल ब्लाॅक में कुल 240 प्रशिक्षित पीयर एजुकेटर हैं। जो किशोर किशोरियों की मदद करते हैं। स्वास्थ्य से जुड़ी सभी सरकारी अस्पतालों पर निःशुल्क उपलब्ध है।

636 किशोर व 741 किशोरियों को उपलब्ध कराई गयी क्लिनिकल सेवा

परतावल साथियां केन्द्र के काऊंसलर ने बताया कि अप्रैल 2021 से जनवरी 2022 तक परतावल साथियां केन्द्र से 1011 किशोरों तथा 947 किशोरियों का पंजीकरण इस केन्द्र पर किया गया। इसमें से 636 किशोर व 741 किशोरियों को क्लिनिकल सेवा उपलब्ध कराई गयी जबकि 763 किशोरों व 803 किशोरियों को काऊंसिलिंग सेवा दी गयी।

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