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यूपी में शहरी विकास और सड़क नेटवर्क को मजबूती, भवन मंजूरी सरल करने के साथ तीन बड़े प्रस्तावों पर मुहर

उत्तर प्रदेश में योगी कैबिनेट ने विकास से जुड़े तीन अहम फैसलों को मंजूरी दी है। औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में भवन मानचित्र मंजूरी आसान बनाने के लिए मॉडल भवन विनियम-2026 लागू करने का निर्णय लिया गया। मीरजापुर-विन्ध्याचल और मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरणों की परियोजनाओं के लिए 115 करोड़ रुपये की पहली किस्त स्वीकृत हुई। वहीं, मैनपुरी में शिकोहाबाद-भोगांव मार्ग के 37.86 किलोमीटर हिस्से को चार लेन बनाने और घिरोर बाईपास के निर्माण के लिए 328.67 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।

लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में औद्योगिक विकास, सुनियोजित शहरी विस्तार और सड़क अवसंरचना को मजबूत करने से जुड़े तीन महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सरकार ने औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के क्षेत्रों में भवन एवं भूखंड मानचित्रों की स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए ‘उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास प्राधिकरणों हेतु मॉडल भवन विनियम, 2026’ के क्रियान्वयन को मंजूरी प्रदान की। इसके साथ ही मीरजापुर-विन्ध्याचल और मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरणों की परियोजनाओं के लिए 115 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी करने तथा मैनपुरी जिले में शिकोहाबाद-भोगांव राज्य मार्ग संख्या-84 के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण के लिए 328.67 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति को भी हरी झंडी दी गई।

सरकार के इन फैसलों को प्रदेश में निवेश बढ़ाने, नए शहरी क्षेत्रों के विकास, आवासीय सुविधाओं के विस्तार और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

औद्योगिक क्षेत्रों में भवन मानचित्र मंजूरी की प्रक्रिया होगी सरल

उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में भवन एवं भूखंड मानचित्रों के अनुमोदन की प्रक्रिया अब अधिक सरल, पारदर्शी और नागरिक अनुकूल बनाने की दिशा में कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास प्राधिकरणों हेतु मॉडल भवन विनियम, 2026’ के क्रियान्वयन को मंजूरी दी गई।

नए विनियमों का उद्देश्य भवन निर्माण और भूखंड विकास से संबंधित स्वीकृतियों की प्रक्रिया को सुगम बनाना तथा उपलब्ध भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है। इससे औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के क्षेत्रों में विकास कार्यों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

यह निर्णय प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य के अनुरूप नगरीय विस्तार, आधारभूत संरचना के विकास और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। मानचित्र अनुमोदन की प्रक्रिया आसान होने से निवेशकों और रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े लोगों को सहूलियत मिलने की संभावना है।

विनियमों के प्रभावी क्रियान्वयन से विनिर्माण, पर्यटन, सूचना प्रौद्योगिकी एवं आईटीईएस, लॉजिस्टिक्स, स्वास्थ्य, शिक्षा और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा मिल सकता है। इसके साथ ही गुणवत्तापूर्ण आवासीय इकाइयों की उपलब्धता बढ़ाने और सुनियोजित शहरी विकास को गति देने में भी सहायता मिलने की उम्मीद है।

निवेश एवं निर्माण गतिविधियों के विस्तार से रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। सरकार का यह कदम व्यवसाय सुगमता में सुधार के साथ प्रदेश के औद्योगिक और आर्थिक विकास को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

मीरजापुर-विन्ध्याचल और मुजफ्फरनगर में नए शहरों के विकास को 115 करोड़ रुपये

कैबिनेट ने मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नये शहर प्रोत्साहन योजना के तहत मीरजापुर-विन्ध्याचल और मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरणों की परियोजनाओं के लिए 115 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। दोनों विकास प्राधिकरणों की परियोजनाओं के लिए सीड कैपिटल के रूप में अधिकतम 164.87 करोड़ रुपये की धनराशि अनुमन्य की गई है। इसमें से पहली किस्त के तौर पर 115 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति देते हुए धनराशि अवमुक्त करने का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रदेश में नए शहरों के समग्र और सुव्यवस्थित विकास के लिए कुल 3,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस धनराशि के माध्यम से शहरी क्षेत्रों के विस्तार और नई आवासीय परियोजनाओं के विकास को गति देने का लक्ष्य है।

भूमि अर्जन के लिए राज्य सरकार देगी सीड कैपिटल

मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नये शहर प्रोत्साहन योजना को प्रदेश सरकार ने 6 अप्रैल 2023 को लागू किया था। योजना का उद्देश्य नगरीय क्षेत्रों का सुनियोजित विकास सुनिश्चित करना और बढ़ती शहरी आबादी को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

इसके तहत नए शहरों के विकास के लिए भूमि अर्जन पर होने वाले व्यय का अधिकतम 50 प्रतिशत तक राज्य सरकार की ओर से सीड कैपिटल के रूप में उपलब्ध कराने का प्रावधान है। यह सहायता अधिकतम 20 वर्ष की अवधि के लिए दी जा सकती है।

मीरजापुर-विन्ध्याचल और मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरणों की परियोजनाओं को स्वीकृत वित्तीय सहायता से भूमि अर्जन और नए शहरी क्षेत्रों के विकास से संबंधित गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे आवासीय सुविधाओं के विस्तार और व्यवस्थित शहरी ढांचे के निर्माण को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

सरकार का जोर ऐसे नए शहरी क्षेत्रों के विकास पर है, जहां बढ़ती आबादी की जरूरतों के अनुरूप आवास और अन्य आवश्यक सुविधाओं का नियोजित विस्तार किया जा सके। इस दिशा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए किया गया बजटीय प्रावधान राज्य में शहरी विकास की योजनाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

मैनपुरी में 37.86 किलोमीटर मार्ग होगा चार लेन, 328.67 करोड़ रुपये मंजूर

कैबिनेट बैठक में मैनपुरी जिले के शिकोहाबाद-भोगांव राज्य मार्ग संख्या-84 के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य की पुनरीक्षित प्रशासकीय और वित्तीय स्वीकृति के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। इस परियोजना के तहत घिरोर से भोगांव तक 31.30 किलोमीटर लंबे मार्ग को चार लेन में विकसित किया जाएगा। इसके अलावा 6.56 किलोमीटर लंबे घिरोर बाईपास का निर्माण भी कराया जाएगा।

पूरी परियोजना की लंबाई 37.86 किलोमीटर होगी और इसके लिए पुनरीक्षित लागत 328.67 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। सड़क के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण से क्षेत्र में यातायात की क्षमता बढ़ने तथा आवागमन अधिक सुगम होने की उम्मीद है।

भारी यातायात के दबाव से मिलेगी राहत

शिकोहाबाद-भोगांव मार्ग का क्षेत्रीय और अंतरजिला यातायात की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है। यह मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग-2, यानी दिल्ली-कोलकाता मार्ग पर शिकोहाबाद की आबादी से शुरू होता है। आगे यह मैनपुरी में राज्य मार्ग संख्या-83 को पार करते हुए भोगांव में राष्ट्रीय राजमार्ग-91, यानी दिल्ली-कानपुर मार्ग से जुड़ता है।

आगरा से लखनऊ, कानपुर और कन्नौज की ओर जाने वाला भारी यातायात भी इसी मार्ग से गुजरता है। वाहनों का दबाव अधिक होने के कारण इस मार्ग पर अक्सर जाम की स्थिति बनती थी। सड़क को चार लेन में विकसित करने और घिरोर बाईपास का निर्माण होने से यातायात के दबाव को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

बाईपास बनने से घिरोर के आबादी वाले हिस्से में यातायात का दबाव कम करने और वाहनों की आवाजाही को अधिक व्यवस्थित बनाने में भी सहायता मिल सकती है। इससे यात्रियों और मालवाहक वाहनों को आवागमन में सहूलियत मिलने की संभावना है।

किसानों को कृषि उपज मंडी तक पहुंचाने में होगी आसानी

परियोजना का लाभ केवल आम यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा। मार्ग के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण से आसपास के किसानों को अपनी कृषि उपज मंडी स्थल तक पहुंचाने में सुविधा होगी। बेहतर सड़क संपर्क से कृषि उत्पादों की ढुलाई आसान बनाने और क्षेत्रीय आवागमन को सुगम करने में मदद मिलेगी।

इसके साथ ही मैनपुरी जिला मुख्यालय आने-जाने वाले लोगों को भी राहत मिलने की उम्मीद है। सड़क की क्षमता बढ़ने से यातायात के दबाव को नियंत्रित करने, यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाने और क्षेत्रीय संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने में सहायता मिलेगी।

निवेश, शहरी विस्तार और कनेक्टिविटी पर सरकार का जोर

योगी कैबिनेट के इन तीन फैसलों में प्रदेश के आर्थिक और आधारभूत विकास से जुड़ी अलग-अलग प्राथमिकताएं दिखाई देती हैं। औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के लिए मॉडल भवन विनियम-2026 की मंजूरी से भवन एवं भूखंड मानचित्र अनुमोदन की प्रक्रिया सरल बनाने का रास्ता खुलेगा। वहीं, मीरजापुर-विन्ध्याचल और मुजफ्फरनगर की शहरी विस्तार परियोजनाओं के लिए 115 करोड़ रुपये की पहली किस्त की स्वीकृति नए शहरों के विकास को वित्तीय समर्थन देगी।

दूसरी ओर, मैनपुरी में शिकोहाबाद-भोगांव मार्ग के चार लेन में चौड़ीकरण और घिरोर बाईपास के निर्माण से सड़क संपर्क बेहतर बनाने, जाम की समस्या कम करने तथा किसानों और स्थानीय निवासियों को आवागमन में सुविधा देने का लक्ष्य है।

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