
योगी सरकार का किसानों को बड़ा तोहफा: 65 लाख टन धान खरीदने का लक्ष्य, जानिए MSP और भुगतान की पूरी जानकारी
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान और मोटे अनाज की सरकारी खरीद नीति को मंजूरी दी है। प्रदेश में इस बार 65 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा गया है। सामान्य धान का समर्थन मूल्य 2441 रुपये और ग्रेड-ए धान का 2461 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। मक्का, बाजरा और ज्वार की 2.85 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य प्रस्तावित है। सरकार ने किसानों को यथासंभव 48 घंटे में भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
लखनऊ : उत्तर प्रदेश में किसानों की उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदने के लिए योगी सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में धान के साथ-साथ मोटे अनाज यानी श्रीअन्न की सरकारी खरीद नीति को मंजूरी दी गई। सरकार ने इस बार 65 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जबकि मक्का, बाजरा और ज्वार की कुल 2.85 लाख मीट्रिक टन खरीद का कार्यकारी लक्ष्य प्रस्तावित किया गया है। धान खरीद के लिए प्रदेश में 4500 क्रय केंद्र संचालित किए जाएंगे, वहीं मोटे अनाज की खरीद के लिए 455 केंद्र खोलने का प्रस्ताव है। सरकार ने किसानों को उनकी उपज का बढ़ा हुआ समर्थन मूल्य देने, भुगतान प्रक्रिया को तेज करने और खरीद व ढुलाई में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
कैबिनेट बैठक के बाद खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज कुमार पांडेय ने खरीद नीतियों की जानकारी देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश ने पिछले वर्ष 62 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद कर देश में पहला स्थान हासिल किया था। इस बार सरकार ने अपने पिछले रिकॉर्ड से तीन लाख मीट्रिक टन अधिक धान खरीदने का लक्ष्य रखा है। किसानों की सुविधा के लिए क्रय केंद्रों की व्यवस्था, भुगतान की निगरानी और उपज की ढुलाई को पारदर्शी बनाने के प्रावधान किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने किसानों को यथासंभव 48 घंटे के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
धान का समर्थन मूल्य बढ़ा, पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में अलग-अलग अवधि में होगी खरीद
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2441 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान का समर्थन मूल्य 2461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। पिछले वर्ष की तुलना में समर्थन मूल्य में लगभग तीन प्रतिशत की वृद्धि की गई है। सरकारी क्रय केंद्रों पर किसानों से निर्धारित दरों पर धान की खरीद की जाएगी।
धान खरीद की अवधि पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए अलग-अलग निर्धारित की गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 15 अक्टूबर 2026 से 15 फरवरी 2027 तक खरीद होगी, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में एक नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक किसानों से धान खरीदा जाएगा। संबंधित जिलों में धान की पैदावार, आवक और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए क्रय केंद्रों का स्थान निर्धारित किया जाएगा।
खरीद प्रक्रिया को संचालित करने के लिए खाद्य विभाग, प्रादेशिक कोऑपरेटिव फेडरेशन (पीसीएफ), प्रादेशिक कोऑपरेटिव यूनियन (पीसीयू), उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ (यूपीएसएस), मंडी परिषद एवं उससे संबद्ध किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ-एफपीसी), भारतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ (एनसीसीएफ), नैफेड और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) सहित आठ क्रय एजेंसियों की व्यवस्था की गई है। जिलाधिकारी अपने-अपने जिलों में धान की पैदावार, आवक और स्थानीय जरूरतों के आधार पर क्रय संस्थाओं के बीच केंद्रों का स्थल आवंटित करेंगे।
फार्मर आईडी वाले किसानों को दोबारा पंजीकरण से मिलेगी छूट
धान खरीद प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए फार्मर आईडी रखने वाले किसानों को अलग से ऑनलाइन पंजीकरण कराने से छूट दी गई है। भारत सरकार की एग्रीस्टैक योजना के अंतर्गत प्रदेश में तैयार किसान पहचान के आधार पर उनकी उपज की खरीद की जाएगी। इससे किसानों को विभागीय पोर्टल पर दोबारा पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी।
खरीदे गए धान का भुगतान सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। बैंक खातों का सत्यापन होने के बाद यथासंभव 48 घंटे के भीतर धनराशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजने की व्यवस्था की गई है। भुगतान में देरी होने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
सरकार ने धान की ढुलाई और भंडारण से जुड़ी व्यवस्था को भी पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश के सभी जिलों में क्रय केंद्रों से चावल मिलों तक धान पहुंचाने के लिए जीपीएस युक्त वाहनों का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है। इसके अतिरिक्त, पायलट परियोजना के तहत चिह्नित जिलों में चावल के बोरों पर क्यूआर कोड के माध्यम से खाद्यान्न की आवाजाही और बिलिंग की निगरानी की जाएगी।
खरीद के दौरान बोरों की कमी न हो, इसके लिए भी व्यवस्था की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 80 हजार बोरे पहले ही उपलब्ध कराए जा चुके हैं, जबकि कुल 12.25 लाख बोरे उपलब्ध कराने की तैयारी है। इससे खरीद के दौरान पैकिंग सामग्री की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
मक्का, बाजरा और ज्वार की खरीद का लक्ष्य 2.85 लाख मीट्रिक टन
धान के साथ सरकार ने मोटे अनाज की सरकारी खरीद नीति को भी मंजूरी दी है। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में मक्का, बाजरा और ज्वार की खरीद एक अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक निर्धारित की गई है। इसके लिए कुल 2.85 लाख मीट्रिक टन खरीद का कार्यकारी लक्ष्य प्रस्तावित है।
इसमें बाजरे की 2.20 लाख मीट्रिक टन, ज्वार की 50 हजार मीट्रिक टन और मक्का की 15 हजार मीट्रिक टन खरीद शामिल है। निर्धारित लक्ष्य में सबसे अधिक हिस्सेदारी बाजरे की है। इन फसलों की खरीद के लिए प्रदेश में कुल 455 क्रय केंद्र प्रस्तावित हैं, जिनमें बाजरे के 300, ज्वार के 80 और मक्का के 75 केंद्र शामिल हैं। संबंधित फसलों की अच्छी पैदावार और आवक वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज कुमार पांडेय के अनुसार, किसानों से भारत सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मोटे अनाज की खरीद की जाएगी। इससे किसानों को अपनी उपज का निर्धारित मूल्य प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
बाजरे के समर्थन मूल्य में 125 और हाइब्रिड ज्वार में 324 रुपये की वृद्धि
नई खरीद नीति के तहत बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2775 रुपये से बढ़ाकर 2900 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। इस प्रकार बाजरे के समर्थन मूल्य में 125 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है। मक्का का समर्थन मूल्य 2410 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।
वहीं, हाइब्रिड ज्वार का समर्थन मूल्य 3699 रुपये से बढ़ाकर 4023 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। इसमें 324 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है। ज्वार की मालदांडी किस्म का न्यूनतम समर्थन मूल्य 4073 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।
सरकार का निर्देश है कि खरीद के बाद किसानों को भुगतान में अनावश्यक देरी न हो। सत्यापित बैंक खातों में यथासंभव 48 घंटे के भीतर धनराशि भेजी जाएगी। भुगतान किसानों के आधार से जुड़े और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) से मैप किए गए बैंक खातों में सीधे किया जाएगा। इसके लिए पीएफएमएस पोर्टल के माध्यम से बैंक खातों का सत्यापन किया जाएगा।
25 जिलों में होगी मक्का की सरकारी खरीद
मक्का की खरीद के लिए प्रदेश के 25 जिलों का चयन किया गया है। इनमें बुलंदशहर, बदायूं, हरदोई, उन्नाव, मैनपुरी, आगरा, फिरोजाबाद, अलीगढ़, एटा, कासगंज, हाथरस, कानपुर नगर, कानपुर देहात, इटावा, औरैया, फर्रुखाबाद, कन्नौज, बहराइच, गोंडा, देवरिया, बलिया, जौनपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र और ललितपुर शामिल हैं।
इन जिलों में मक्का की सरकारी खरीद के लिए कुल 75 क्रय केंद्र प्रस्तावित हैं। केंद्रों के माध्यम से किसानों से निर्धारित समर्थन मूल्य पर उपज खरीदी जाएगी। संबंधित क्षेत्रों में खरीद की व्यवस्था फसल की उपलब्धता और स्थानीय जरूरतों के अनुसार संचालित की जाएगी।
33 जिलों में खरीदा जाएगा बाजरा
बाजरे की खरीद के लिए 33 जिलों को निर्धारित किया गया है। इनमें बुलंदशहर, रामपुर, संभल, अमरोहा, बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, अलीगढ़, एटा, कासगंज, हाथरस, कानपुर नगर, कानपुर देहात, इटावा, फर्रुखाबाद, औरैया, कन्नौज, बलिया, जौनपुर, गाजीपुर, मिर्जापुर, प्रयागराज, कौशांबी, फतेहपुर, जालौन, चित्रकूट और हमीरपुर शामिल हैं।
बाजरे की खरीद के लिए सबसे अधिक 300 क्रय केंद्र प्रस्तावित किए गए हैं। सरकार ने इसका खरीद लक्ष्य 2.20 लाख मीट्रिक टन रखा है। समर्थन मूल्य में 125 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि के बाद अब किसानों को बाजरे के लिए 2900 रुपये प्रति क्विंटल की दर निर्धारित की गई है।
13 जिलों में होगी ज्वार की खरीद
ज्वार की सरकारी खरीद के लिए 13 जिलों का चयन किया गया है। इनमें उन्नाव, हरदोई, फिरोजाबाद, कानपुर नगर, कानपुर देहात, फतेहपुर, मिर्जापुर, झांसी, जालौन, बांदा, हमीरपुर, महोबा और चित्रकूट शामिल हैं।
ज्वार की खरीद के लिए 80 क्रय केंद्र प्रस्तावित हैं। सरकार ने इसकी कुल खरीद का लक्ष्य 50 हजार मीट्रिक टन निर्धारित किया है। ज्वार की मालदांडी किस्म का समर्थन मूल्य 4073 रुपये प्रति क्विंटल और हाइब्रिड किस्म का समर्थन मूल्य 4023 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया है।
ऑनलाइन पंजीकरण और बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य
मोटे अनाज की सरकारी खरीद के लिए किसानों को खाद्य एवं रसद विभाग की वेबसाइट www.fcs.up.gov.in पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। क्रय केंद्रों पर कंप्यूटरीकृत सत्यापित खतौनी, फोटोयुक्त पहचान पत्र और आधार कार्ड के आधार पर मक्का, बाजरा तथा ज्वार की खरीद की जाएगी।
खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और बिचौलियों की भूमिका रोकने के लिए इलेक्ट्रॉनिक प्वॉइंट ऑफ परचेज (ई-पॉप) मशीन के माध्यम से किसानों का बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण किया जाएगा। पूरी खरीद प्रक्रिया राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर पर ऑनलाइन संचालित होगी।
मोटे अनाज की खरीद का भुगतान भी पीएफएमएस पोर्टल के माध्यम से बैंक खातों के सत्यापन के बाद किया जाएगा। किसानों के आधार से जुड़े और एनपीसीआई से मैप किए गए खातों में सीधे धनराशि भेजने की व्यवस्था की गई है। सरकार ने इस प्रक्रिया में भी यथासंभव 48 घंटे के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
शिकायत और सहायता के लिए टोल फ्री नंबर जारी
सरकारी खरीद के दौरान किसानों को किसी तरह की परेशानी होने पर सहायता उपलब्ध कराने के लिए टोल फ्री नंबर 18001800150 जारी किया गया है। किसान अपनी समस्याओं के समाधान के लिए इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, वे संबंधित जिले के जिला खाद्य विपणन अधिकारी, क्षेत्रीय विपणन अधिकारी और विपणन निरीक्षक से भी संपर्क कर सकते हैं।
धान और मोटे अनाज की खरीद के लिए अलग-अलग लक्ष्य, निर्धारित समर्थन मूल्य, क्रय केंद्रों की व्यवस्था, ऑनलाइन निगरानी और सीधे बैंक खातों में भुगतान जैसे प्रावधानों के जरिए सरकार ने खरीद प्रक्रिया को व्यवस्थित करने पर जोर दिया है। अब इन व्यवस्थाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और निर्धारित समय में खरीद व भुगतान सुनिश्चित करना संबंधित विभागों और क्रय एजेंसियों की जिम्मेदारी होगी।
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