
यूपी बनेगा ग्लोबल मैनपावर हब, स्टार्टअप्स को बाजार और इंटर्न का भत्ता दोगुना
उत्तर प्रदेश की योगी कैबिनेट ने युवाओं, स्टार्टअप्स और आयुष चिकित्सा विद्यार्थियों के लिए तीन महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी है। सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र विकास योजना पर तीन वर्षों में 1,725 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। प्रदेश के 75 जिलों को नौ जोन में जोड़कर कौशल प्रशिक्षण केंद्र विकसित किए जाएंगे। यूपी स्टार्टअप ई-मार्केटप्लेस से उद्यमियों को सरकारी खरीद के अवसर मिलेंगे। आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी इंटर्न का मासिक भत्ता 7,500 से बढ़ाकर 15,000 रुपये किया जाएगा।
लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में युवाओं के कौशल विकास, रोजगार सृजन, स्टार्टअप्स को बाजार उपलब्ध कराने और आयुष चिकित्सा पद्धतियों के इंटर्न विद्यार्थियों को आर्थिक राहत देने से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की गई। कैबिनेट ने सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र विकास योजना, उत्तर प्रदेश स्टार्टअप क्रय योजना-2026 तथा आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी के इंटर्न विद्यार्थियों के मासिक भत्ते में वृद्धि के प्रस्ताव को स्वीकृति दी।
इन फैसलों के माध्यम से प्रदेश में उद्योगों की मांग के अनुरूप कुशल कार्यबल तैयार करने, स्थानीय स्टार्टअप्स को सरकारी खरीद से जोड़ने, रोजगार के नए अवसर सृजित करने और चिकित्सा शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों को बेहतर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
यूपी को ग्लोबल मैनपावर हब बनाने की तैयारी, 1,725 करोड़ रुपये होंगे खर्च
उत्तर प्रदेश को कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता के मामले में देश और दुनिया के प्रमुख केंद्रों में शामिल करने के उद्देश्य से सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र (एसवीपीएसटीपीजेड) विकास योजना को मंजूरी दी गई है। इस योजना का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को ‘अल्टीमेट सोर्सिंग हब ऑफ स्किल्ड मैनपावर’ और ‘ग्लोबल मैनपावर हब’ के रूप में विकसित करना है।
योजना के अंतर्गत प्रदेश के सभी 75 जनपदों को शामिल करते हुए नौ जोन में कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार का एकीकृत तंत्र विकसित किया जाएगा। इसके माध्यम से युवाओं को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित कर देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों में उपलब्ध रोजगार के अवसरों से जोड़ने की व्यवस्था की जाएगी। परियोजना पर आगामी तीन वर्षों में कुल 1,725 करोड़ रुपये व्यय होने का अनुमान है।
एमएसएमई क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप तैयार होंगे युवा
प्रदेश के औद्योगिक विकास में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में लगभग 96 लाख एमएसएमई उद्यम हैं, जो देश के कुल लगभग 6.77 करोड़ उद्यमों का 14.2 प्रतिशत हैं। प्रदेश के औद्योगिक उत्पादन में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत और निर्यात में लगभग 45 प्रतिशत बताई गई है। इस क्षेत्र में तीन करोड़ से अधिक लोग कार्यरत हैं।
उद्योगों की बढ़ती जरूरतों के अनुरूप कुशल कामगारों की उपलब्धता सुनिश्चित करना इस योजना का प्रमुख उद्देश्य है। प्रशिक्षण व्यवस्था को औद्योगिक गतिविधियों, बाजार की मांग और स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाओं से जोड़ा जाएगा। इससे कंपनियों और उद्यमों को जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षित कर्मचारी मिल सकेंगे, जबकि युवाओं को रोजगार हासिल करने के लिए बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।
प्रथम चरण में पांच स्थानों पर स्थापित होंगे केंद्र
योजना को हब एवं स्पोक मॉडल पर लागू किया जाएगा। इसके तहत नौ जोन में कौशल विकास और रोजगार का एकीकृत नेटवर्क तैयार होगा। प्रत्येक जोन में स्थानीय उद्योगों, बाजार और रोजगार की संभावनाओं के अनुसार प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। साथ ही विभिन्न उद्योगों, बाजार क्षेत्रों और सरकारी विभागों की मानव संसाधन संबंधी आवश्यकताओं का आकलन कर रोजगार के अवसर विकसित किए जाएंगे।
प्रथम चरण में पांच प्रमुख स्थानों पर कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
लखनऊ: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के माध्यम से केंद्र स्थापित होगा।
कानपुर: सार्वजनिक-निजी सहभागिता (पीपीपी) मॉडल पर केंद्र विकसित किया जाएगा।
गोरखपुर: गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) की ओर से केंद्र स्थापित किया जाएगा।
गौतमबुद्ध नगर: नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के संयुक्त सहयोग से केंद्र विकसित होगा।
झांसी: बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) के माध्यम से केंद्र स्थापित किया जाएगा।
नौ जोन में विभाजित होंगे प्रदेश के 75 जनपद
योजना के तहत प्रदेश को निम्नलिखित नौ जोन में विभाजित किया गया है:
जोन-1: गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद एवं हापुड़।
जोन-2: सहारनपुर मंडल तथा बुलंदशहर, बागपत एवं मेरठ।
जोन-3: मुरादाबाद एवं बरेली मंडल।
जोन-4: आगरा एवं अलीगढ़ मंडल।
जोन-5: लखनऊ एवं अयोध्या मंडल।
जोन-6: कानपुर एवं प्रयागराज मंडल।
जोन-7: चित्रकूट, विंध्याचल एवं झांसी मंडल।
जोन-8: वाराणसी एवं आजमगढ़ मंडल।
जोन-9: गोरखपुर, बस्ती एवं देवीपाटन मंडल।
इस क्षेत्रीय व्यवस्था का उद्देश्य स्थानीय औद्योगिक जरूरतों और उपलब्ध रोजगार अवसरों के अनुसार प्रशिक्षण को व्यवस्थित करना है, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों के युवाओं को उनकी योग्यता और संबंधित उद्योगों की मांग के अनुरूप तैयार किया जा सके।
10 से 25 एकड़ में बनेंगे केंद्र, चार लेन सड़क से जुड़ेंगे
प्रत्येक कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र की स्थापना के लिए 10 से 25 एकड़ तक उपयुक्त और भारमुक्त भूमि की व्यवस्था की जाएगी। केंद्रों तक आवागमन आसान बनाने के लिए निकटवर्ती राजमार्ग या एक्सप्रेसवे से दो वर्ष के भीतर चार लेन की सड़क संपर्क सुविधा उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।
केंद्रों का विकास और संचालन सार्वजनिक-निजी सहभागिता आधारित डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन एवं हस्तांतरण (डीबीएफओटी) मॉडल अथवा सरकारी संस्थाओं के माध्यम से किया जा सकेगा। निजी विकासकर्ताओं और प्रशिक्षण प्रदाताओं को आवश्यकता के अनुसार वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) की सुविधा भी उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
तकनीकी, गैर-तकनीकी और विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण
योजना में विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले युवाओं की जरूरतों को ध्यान में रखा गया है। मानविकी और वाणिज्य जैसे गैर-तकनीकी विषयों से पढ़ाई करने वाले युवाओं को आधारभूत कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। वहीं, आईटीआई, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग की पृष्ठभूमि वाले युवाओं के लिए तकनीकी कौशल उन्नयन की व्यवस्था होगी।
देश के अन्य राज्यों तथा विदेशों में उपलब्ध रोजगार अवसरों के अनुरूप आवश्यकता आधारित भारतीय और विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। इसका उद्देश्य युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाना और उन्हें व्यापक रोजगार बाजार के लिए तैयार करना है।
प्रशिक्षणार्थियों के लिए छात्रावास की सुविधा उपलब्ध कराने के साथ ही केंद्र परिसर में सेवायोजन कार्यालय और प्लेसमेंट सेल स्थापित किए जाएंगे। देश-विदेश में नियोजन के क्षेत्र में कार्यरत मान्यता प्राप्त प्रतिष्ठित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार से जोड़ने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
डिजिटल डैशबोर्ड और एआई से होगी निगरानी
योजना के पारदर्शी और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य, जिला और परियोजना स्तर पर समन्वय एवं निगरानी की व्यवस्था की गई है। इसके तहत केंद्रों की स्थापना, संचालन, वित्तीय प्रबंधन, प्रशिक्षण की गुणवत्ता और रोजगार संबंधी गतिविधियों की निगरानी की जाएगी। संबंधित विभागों, उद्योगों और औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के बीच समन्वय स्थापित कर योजना के उद्देश्यों को पूरा करने पर ध्यान दिया जाएगा।
कौशल प्रशिक्षण और सेवायोजन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल डैशबोर्ड, डेटा विश्लेषण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित तकनीकी सुविधाओं का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकी भागीदार का चयन करने का प्रावधान भी किया गया है।
स्टार्टअप्स को सरकारी खरीद में मिलेगा बाजार, बनेगा यूपी स्टार्टअप ई-मार्केटप्लेस
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश स्टार्टअप क्रय योजना-2026 को भी मंजूरी प्रदान की है। इसका उद्देश्य प्रदेश के पात्र स्टार्टअप्स को सरकारी बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराना तथा सरकारी विभागों और अन्य अभिकरणों में उनके नवोन्मेषी उत्पादों, सेवाओं और तकनीकी समाधानों के उपयोग को बढ़ावा देना है।
योजना के अंतर्गत पात्र स्टार्टअप्स के उत्पादों, सेवाओं और समाधानों की सूचीबद्धता के लिए समर्पित ‘यूपी स्टार्टअप ई-मार्केटप्लेस’ स्थापित किया जाएगा। यह मंच सरकारी विभागों को स्टार्टअप्स द्वारा विकसित नवाचारों की जानकारी प्राप्त करने और सरकारी खरीद के लिए उपयुक्त उत्पादों एवं सेवाओं का चयन करने का अवसर उपलब्ध कराएगा।
सरकारी विभाग अपने स्वीकृत बजट से करेंगे खरीद
योजना के तहत सरकारी विभाग और अन्य संबंधित अभिकरण सूचीबद्ध स्टार्टअप्स के नवोन्मेषी उत्पादों तथा सेवाओं की खरीद अपनी स्वीकृत बजटीय व्यवस्था से करेंगे। ई-मार्केटप्लेस की स्थापना, संचालन और अनुरक्षण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन को सौंपी जाएगी। इससे मंच के निरंतर संचालन और योजना के नियमित क्रियान्वयन का रास्ता तैयार होगा।
उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति के तहत पंजीकृत पात्र नवप्रवर्तनशील उद्यमों को सरकारी विभागों से कार्यादेश प्राप्त करने के अवसर मिलेंगे। सरकारी खरीद में भागीदारी की सुविधा मिलने से स्टार्टअप्स को अपने उत्पादों और सेवाओं के लिए नए ग्राहक प्राप्त करने, कारोबार बढ़ाने तथा बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने में सहायता मिलेगी।
सरकारी सेवाओं में नवाचार को मिलेगा बढ़ावा
योजना का लाभ केवल स्टार्टअप्स तक सीमित नहीं रहेगा। सरकारी विभागों में आधुनिक तकनीकी समाधानों और नवोन्मेषी सेवाओं के इस्तेमाल से प्रशासनिक कार्यों की दक्षता बढ़ाने तथा सरकारी सेवाओं को अधिक सुगम और प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे आम नागरिकों को बेहतर सेवा वितरण का लाभ मिल सकता है।
स्टार्टअप्स के व्यावसायिक विस्तार से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी बढ़ने की संभावना है। इस तरह योजना का उद्देश्य प्रदेश में नवाचार को प्रोत्साहित करने, उद्यमिता को बढ़ावा देने और रोजगार सृजन को गति देने के लिए सरकारी खरीद को एक प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित करना है।
आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी इंटर्न का भत्ता दोगुना, अब मिलेंगे 15 हजार रुपये
योगी कैबिनेट ने आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी चिकित्सा पद्धतियों के इंटर्न विद्यार्थियों को राहत देते हुए उनके मासिक इंटर्नशिप भत्ते में दोगुनी वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। अब राजकीय आयुर्वेदिक, यूनानी और होम्योपैथी मेडिकल कॉलेजों, संस्थानों तथा विश्वविद्यालयों से संबंधित बीएएमएस, बीयूएमएस और बीएचएमएस परीक्षा उत्तीर्ण विद्यार्थियों को रोटेटिंग इंटर्नशिप के दौरान 7,500 रुपये के स्थान पर 15,000 रुपये प्रतिमाह भत्ता मिलेगा।
इस फैसले से प्रदेश में आयुर्वेद के 588, यूनानी के 150 और होम्योपैथी के 976 इंटर्न विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। इस प्रकार कुल 1,714 इंटर्न छात्र-छात्राएं बढ़े हुए भत्ते के दायरे में आएंगे।
मरीजों के उपचार और अस्पताल की सेवाओं में देते हैं योगदान
प्रदेश के राजकीय आयुर्वेदिक, यूनानी और होम्योपैथी मेडिकल कॉलेजों, संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों से बीएएमएस, बीयूएमएस और बीएचएमएस की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों के लिए रोटेटिंग इंटर्नशिप अनिवार्य होती है। इस अवधि में वे संबंधित चिकित्सा संस्थानों में मरीजों के उपचार में चिकित्सकीय सहयोग करते हैं।
इंटर्न विद्यार्थी अस्पतालों के वार्ड, बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) और रात्रि ड्यूटी सहित विभिन्न कार्यों में योगदान देते हैं। इस दौरान उन्हें व्यावहारिक चिकित्सकीय अनुभव प्राप्त होता है और अस्पतालों की नियमित सेवाओं में भी उनकी भागीदारी रहती है।
अब तक प्रदेश के होम्योपैथी मेडिकल कॉलेजों एवं चिकित्सालयों में बीएचएमएस तथा आयुर्वेदिक और यूनानी मेडिकल कॉलेजों एवं चिकित्सालयों में क्रमशः बीएएमएस और बीयूएमएस की इंटर्नशिप करने वाले विद्यार्थियों को 7,500 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जाता था। कैबिनेट की मंजूरी के बाद यह राशि बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रतिमाह कर दी जाएगी।
भत्ते में वृद्धि से इंटर्न विद्यार्थियों को इंटर्नशिप अवधि के दौरान आर्थिक सहायता मिलेगी। यह निर्णय आयुष चिकित्सा शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इंटर्नशिप के दौरान उन्हें चिकित्सकीय प्रशिक्षण के साथ अस्पतालों में निर्धारित जिम्मेदारियां भी निभानी होती हैं।
रोजगार, नवाचार और चिकित्सा शिक्षा पर कैबिनेट का जोर
उत्तर प्रदेश कैबिनेट के इन तीन फैसलों में युवाओं के कौशल विकास, उद्यमिता और चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र विकास योजना के माध्यम से प्रदेशव्यापी प्रशिक्षण नेटवर्क और रोजगार से जुड़ाव की व्यवस्था विकसित करने का लक्ष्य है। स्टार्टअप क्रय योजना सरकारी खरीद के जरिए नवाचार आधारित उद्यमों को बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में कदम है। वहीं, आयुष चिकित्सा पद्धतियों के इंटर्न विद्यार्थियों के भत्ते में वृद्धि से उन्हें आर्थिक राहत मिलेगी।
इन योजनाओं का प्रभाव उनके प्रभावी क्रियान्वयन, उद्योगों की भागीदारी, प्रशिक्षण की गुणवत्ता और रोजगार से वास्तविक जुड़ाव पर निर्भर करेगा। सरकार के सामने इन पहलों के जरिए कौशल, उद्यमिता और स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों को व्यापक स्तर पर परिणामों में बदलने की चुनौती भी होगी।



