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भारत की संप्रभुता तथा सैनिकों के दृढ संकल्प का प्रतीक है सियाचिन: राजनाथ

नयी दिल्ली : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन में तैनात सैनिकों की बहादुरी की सराहना करते हुए कहा है कि यह कोई साधारण भूमि नहीं, बल्कि भारत की संप्रभुता तथा दृढ़ संकल्प का प्रतीक है और इसकी रक्षा करने वाले सैनिकों का गौरवशाली इतिहास युवा पीढी के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।सोमवार को दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन का दौरा करने के बाद श्री सिंह ने कहा कि जैसे दिल्ली भारत की राष्ट्रीय राजधानी है, मुंबई वित्तीय राजधानी है और बेंगलुरु प्रौद्योगिकी राजधानी है, वैसे ही सियाचिन साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प की राजधानी है।

रक्षा मंत्री ने प्रतिकूल मौसम में दुर्गम इलाकों में तैनात सैनिकों के साथ बातचीत भी की तथा क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति की समीक्षा की। उनके साथ सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे, जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, उत्तरी कमान लेफ्टिनेंट जनरल एम वी सुचिंद्र कुमार और जनरल ऑफिसर कमांडिंग 14 कोर लेफ्टिनेंट जनरल रशिम बाली भी थे।क्षेत्र के हवाई सर्वेक्षण के बाद रक्षा मंत्री 15 हजार 100 फीट की ऊंचाई पर एक अग्रिम चौकी पर उतरे जहां उन्हें सियाचिन ग्लेशियर में संचालन तैयारियों और मौजूदा सुरक्षा स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने कमांडरों के साथ संचालन चुनौतियों से जुड़े पहलुओं पर चर्चा भी की।श्री सिंह ने सैनिकों को संबोधित करते हुए विषम परिस्थितियों में वीरता और दृढ़ संकल्प के साथ मातृभूमि की रक्षा करने के लिए उनकी सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्र सशस्त्र बलों का हमेशा ऋणी रहेगा क्योंकि उनके बलिदान के कारण हर नागरिक सुरक्षित महसूस करता है।

उन्होंने कहा, “ हम शांतिपूर्ण जीवन जी रहे हैं क्योंकि आश्वस्त हैं कि हमारे बहादुर सैनिक सीमाओं पर दृढ़ता से खड़े हैं। आने वाले समय में जब राष्ट्रीय सुरक्षा का इतिहास लिखा जाएगा, तब बर्फीले ठंडे ग्लेशियर में हमारे सैनिकों की बहादुरी और इच्छाशक्ति के कार्यों को गर्व के साथ याद किया जाएगा। यह हमेशा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।”रक्षा मंत्री ने कहा कि सियाचिन कोई साधारण भूमि नहीं, बल्कि भारत की संप्रभुता और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जैसे दिल्ली भारत की राष्ट्रीय राजधानी है, मुंबई वित्तीय राजधानी है और बेंगलुरु प्रौद्योगिकी राजधानी है, वैसे ही सियाचिन साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प की राजधानी है।राष्ट्र ने हाल ही में ऑपरेशन मेघदूत की सफलता की 40वीं वर्षगांठ मनाई है। रक्षा मंत्री ने 13 अप्रैल 1984 को सियाचिन में भारतीय सेना द्वारा शुरू किए गए इस ऑपरेशन को देश के सैन्य इतिहास का सुनहरा अध्याय बताया। उन्होंने कहा, ‘ऑपरेशन मेघदूत की सफलता हम सबके लिए गर्व की बात है।

’इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने मातृभूमि की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले बहादुरों को सियाचिन युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।गौरतलब है कि श्री सिंह ने 24 मार्च 2024 को लेह का दौरा किया था और सैनिकों के साथ होली मनाई थी। उनका सियाचिन जाने का कार्यक्रम था, लेकिन मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। लेह से रक्षा मंत्री ने सियाचिन में तैनात सैनिकों के साथ फोन पर बात की थी और उन्हें कहा था कि वह जल्द ही दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र का दौरा करेंगे और उनके साथ बातचीत करेंगे। आज की यात्रा से श्री राजनाथ सिंह ने अपने व्यस्त कार्यक्रम के बीच अपना वादा पूरा किया।

राजनाथ ने सियाचिन में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन का दौरा कर सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की।रक्षा मंत्री ने प्रतिकूल मौसम में दुर्गम इलाकों में तैनात सैनिकों के साथ बातचीत भी की। उनके साथ सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे, जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, उत्तरी कमान लेफ्टिनेंट जनरल एम वी सुचिंद्र कुमार और जनरल ऑफिसर कमांडिंग 14 कोर लेफ्टिनेंट जनरल रशिम बाली भी थे।क्षेत्र के हवाई सर्वेक्षण के बाद रक्षा मंत्री 15 हजार 100 फीट की ऊंचाई पर एक अग्रिम चौकी पर उतरे जहां उन्हें सियाचिन ग्लेशियर में संचालन तैयारियों और मौजूदा सुरक्षा स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने कमांडरों के साथ संचालन चुनौतियों से जुड़े पहलुओं पर चर्चा भी की।

श्री सिंह ने सैनिकों को संबोधित करते हुए विषम परिस्थितियों में वीरता और दृढ़ संकल्प के साथ मातृभूमि की रक्षा करने के लिए उनकी सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्र सशस्त्र बलों का हमेशा ऋणी रहेगा क्योंकि उनके बलिदान के कारण हर नागरिक सुरक्षित महसूस करता है। उन्होंने कहा, “ हम शांतिपूर्ण जीवन जी रहे हैं क्योंकि आश्वस्त हैं कि हमारे बहादुर सैनिक सीमाओं पर दृढ़ता से खड़े हैं। आने वाले समय में जब राष्ट्रीय सुरक्षा का इतिहास लिखा जाएगा, तब बर्फीले ठंडे ग्लेशियर में हमारे सैनिकों की बहादुरी और इच्छाशक्ति के कार्यों को गर्व के साथ याद किया जाएगा। यह हमेशा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।”रक्षा मंत्री ने कहा कि सियाचिन कोई साधारण भूमि नहीं, बल्कि भारत की संप्रभुता और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि जैसे दिल्ली भारत की राष्ट्रीय राजधानी है, मुंबई वित्तीय राजधानी है और बेंगलुरु प्रौद्योगिकी राजधानी है, वैसे ही सियाचिन साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प की राजधानी है।राष्ट्र ने हाल ही में ऑपरेशन मेघदूत की सफलता की 40वीं वर्षगांठ मनाई है। रक्षा मंत्री ने 13 अप्रैल 1984 को सियाचिन में भारतीय सेना द्वारा शुरू किए गए इस ऑपरेशन को देश के सैन्य इतिहास का सुनहरा अध्याय बताया। उन्होंने कहा, ‘ऑपरेशन मेघदूत की सफलता हम सबके लिए गर्व की बात है।’इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने मातृभूमि की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले बहादुरों को सियाचिन युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।(वार्ता)

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