
प्रधानमंत्री के विकसित भारत का संकल्प होगा पूरा : अरविंद पांडेय
युवाओं को सही दिशा में लगाकर विकसित राष्ट्र का निर्माण करना ही अभियान का लक्ष्य
दुद्धी,सोनभद्र : भारत कोई भूमि का टुकड़ा नहीं है, यह जीता जागता राष्ट्र है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी द्वारा देश की सर्वोच्च सदन में कही गयी इस बात को भारत ने कई बार चरितार्थ भी किया है। उक्त बातें भाजपा के वरिष्ठ नेता अरविंद पांडेय ने एक मुलाकात में कही।उन्होंने आगे बताया कि भारत भूमि अपने अनुकूल नहीं बल्कि परिस्थिति के अनुकूल व्यवहार करती है। यहाँ के नागरिक राष्ट्रीय कर्तव्यों के लिए प्राणों के बलिदान देने में संकोच नहीं करते। देश की जब-जब ज़रूरत पड़ी है देश एक स्वर में भारत माता की जय के साथ खड़ा हो जाता है। आज प्रधानमंत्री ने एक बार फिर से भारत को “विकसित राष्ट्र” बनाने का संकल्प लिया है। वर्ष 2047 तक भारत विकसित राष्ट्र बनेगा इसमें कोई दो मत नहीं है। इसके लिए गाँव-गाँव “विकसित भारत यात्रा” भी निकाली जा रही है और संकल्प के रूप में “पंच प्रण” भी लिए जा रहे हैं। प्रण भारत के प्राण में हैं, यहाँ प्रण लेकर ही संकल्प पूरा करने की परंपरा रही है।
विकसित भारत का निर्माण, ग़ुलामी की हर सोच से मुक्ति, विरासत पर गर्व, एकता – एकजुटता, नागरिक कर्त्तव्य यह पंच प्रण लिए जा रहे हैं। विकसित भारत के लिए आवश्यक है कि हम यूएनडीपी, यूएनआई व एचडीआई के मापदंड को पूरा करें। इसके लिए आवश्यक है कि हम अपनी ग़ुलामी की सोच से मुक्त होकर एकता और एकजुटता के साथ नागरिक कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए विरासत पर गर्व करें। स्वास्थ्य-शिक्षा के क्षेत्र में जागरूक हों और अपनी बौद्धिक संपदा पर काम कर सकें। बुद्धिलब्धी के क्रम में ताइवान और जापान 106 से ऊपर है वहीं हम आज 76.24 के स्तर पर हैं। दुनिया में 80 विकसित देश हैं और 104 उसके क्रम में हैं। भारत विकसित राष्ट्र बनेगा इसके लिए आवश्यक है कि नागरिकों को सारे दायित्वों के ऊपर राष्ट्रीय दायित्व को रखना होगा।
समाज का बौद्धिक वर्ग समाज के निचले वर्ग तक जाकर आम अध्ययन के आधार पर एक कार्यक्रम बनाए जिससे प्रति व्यक्ति रहन-सहन, प्रति व्यक्ति आय को बढ़ावा मिल सके। सरकारी प्रयासों के इतर इसके लिए जनसामान्य का सामूहिक प्रयास ज़्यादा कारगर साबित हो सकता है। आयातित वस्तुओं के निर्भरता में कमी और स्वदेशी वस्तुओं पर निर्भरता को बढ़ावा देने से यह लक्ष्य हम जल्दी हासिल कर सकते हैं। आज भारत जनजागरूकता के कारण इस क्रम में तेज़ी से आगे बढ़ भी रहा है।
नागरिक कर्तव्यों के निर्वहन के क्रम में विकसित भारत के संकल्प के साथ “इंटेलेक्चुअल यूथ कैम्पेन” की शुरुआत हुई है। एजुकेशन और स्किल के समन्वय पर ज़ोर देना, श्रम शक्ति को बढ़ावा देना, स्वास्थ्य शिक्षा पर ज़ोर देना, योग्य कामगार तैयार करने के आयामों पर काम करना और प्रबुद्ध बैठकों के माध्यम से नित नवीन अनुसंधान कर भारत भाग्य विधाता हमारे युवाओं को सही दिशा में लगाकर विकसित भारत का निर्माण करना इस अभियान का लक्ष्य है।उन्होंने कहा कि मुझे बेहद ख़ुशी है कि मैं इसका हिस्सा हूँ और एक बार पुनः जीवित जागृत राष्ट्र भारत की आत्मा की पुकार में अपना स्वर मिलाकर भारत माता की जय करते हुए विकसित भारत के लक्ष्य तक अनवरत इस यात्रा को जारी रखने का प्रण करता है।



