
अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में आ सकते हैं प्लास्टिक के नोट, रेपो रेट 5.25% पर बरकरार
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में 10 और 20 रुपये के पॉलीमर (प्लास्टिक) नोटों के पायलट परीक्षण की तैयारी की घोषणा की है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि परीक्षण सफल होने पर इनका व्यापक उपयोग किया जाएगा। वहीं, मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखा है। आरबीआई ने वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.7% और खुदरा महंगाई का अनुमान घटाकर 5% कर दिया है।
मुंबई : सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो अगले वित्त वर्ष के आरंभ तक प्लास्टिक के नोट लोगों के हाथों में होंगे।भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को बताया कि शुरुआत में इन नोटों को पायलट परीक्षण के लिए लाया जायेगा। यदि पायलट में सबकुछ ठीक रहा तो इसका आगे विस्तार किया जायेगा।
केंद्रीय बैंक के मौद्रिक नीति संबंधी बयान जारी करने के बाद आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में एक प्रश्न के उत्तर में श्री मल्होत्रा ने कहा, “यदि सबकुछ योजना के मुताबिक हुआ तो हमने अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में इसे लाने का लक्ष्य रखा है।” उन्होंने बताया कि अभी पॉलीमर के कागज के लिए निविदा आमंत्रित की है। उसके आने के बाद उस पर परीक्षण किये जायेंगे, सुरक्षा संबंधी स्वीकृतियां मिलेंगी, कई चरण हैं, कई सिक्योरिटी फीचर हैं। उन्होंने कहा कि सही समय पर लोगों को इसकी जानकारी दी जायेगी।
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि पायलट के दौरान यह देखना होगा कि भारतीय परिस्थितियों में इनका प्रदर्शन कैसा रहता है, यहां की जलवायु और जो दूसरी अवसंरचनाएं इसके लिए तैयार की गयी हैं, उनके साथ इनका प्रदर्शन कैसा रहता है। उसके बाद आरबीआई विचार करेगा कि इसे पूरी तरह अपनाया जा सकता है या नहीं, और उसके लिए किसी बदलाव की आवश्यकता है या नहीं।
उन्होंने बताया कि पॉलीमर के नोट लाने के दो उद्देश्य हैं। पहला, इससे नोट का जीवनकाल बढ़ जाता है। यह विशेष रूप से कम मूल्य के नोटों पर अधिक लागू होता है जिनका हस्तांतरण एक हाथ से दूसरे हाथ में अधिक होता है जिससे वे जल्दी खराब हो जाते हैं। कई देशों में 30 साल से इन नोटों का इस्तेमाल हो रहा है। वहां यह पाया गया है कि ये नोट कागज के नोटों की तुलना में तीन-चार गुना ज्यादा समय तक चलते हैं। इसके अलावा, इससे आरबीआई की क्षमता बढ़ जाती है। अर्थव्यवस्था के बढ़ते आकार के साथ क्षमता बढ़ाना जरूरी है।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने 10 रुपये और 20 रुपये के प्लास्टिक के नोट लाने की रिजर्व बैंक को अनुमति प्रदान कर दी है। अभी उसे प्लास्टिक के दो अरब नोट छापने की अनुमति मिली है जो पायलट परीक्षण के लिए होंगे।
रिजर्व बैंक ने नीतिगत ब्याज दर 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखी, आर्थिक वृद्धि के अनुमान को बढ़ाया
भारतीय रिजर्व बैंक ने फौरी उधार के लिए अपनी नीतिगत ब्याज दर को वर्तमान घरेलू और वैश्विक हालात को देखते हुए 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखा है और घरेलू अर्थव्यवस्था के हालात को पहले से बेहतर बताया है।केंद्रीय बैंक के देश की आर्थिक वृद्धि और खुदरा महंगाई दर के बारे में अपने जून के अनुमानों में सुधार करते हुए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि के अनुमान को 6.7 प्रतिशत और मुद्रास्फीति के अनुमान को घटा कर पांच प्रतिशत कर दिया है।
रिजर्व बैंक ने जून में वृद्धि दर के अनुमान को पहले के 6.9 प्रतिशत से घटा कर 6.6 प्रतिशत और मुद्रास्फीति के अनुमान को बढ़ा कर 5.1 प्रतिशत कर दिया था।आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की द्वैमासिक बैठक के बाद यहां बुधवार को जारी नीतिगत वक्तव्य में कहा कि ‘वैश्विक आर्थिक दशाएं और भावनाएं अब भी पश्चिम एशिया और अन्य क्षेत्रों में तेजी से बनते बिगड़ते हालात की शिकार बनी हुई है। इनका भारत की घरेलू आर्थिक वृद्धि और मुद्रास्फीति की संभावनाओं पर असर पड़ा है पर देश की वृहद आर्थिक बुनियाद पहले से मजबूत हुई और इससे अर्थव्यवस्था को वैश्विक झटकों के बीच अपने रास्ते पर मजबूती से बढ़ने में मदद मिल रही है।
श्री मल्होत्रा ने कहा कि देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रवाह पहली तिमाही में मजबूत रहा है, जून और जुलाई में खास कर प्रतिभूति बाजार में विदेशी पोर्टफोलियाे निवेश से विदेशी पोर्टफोलियो निेवेश में भी वृद्धि दर्ज की गयी है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में ऋण के प्रवाह की स्थिति मजबूत है।आरबीआई गवर्नर ने शहरी सहकारी बैंक खोलने के लाइसेंस के लिए नियमों का मसौदा जारी करने की भी घोषणा की , साथ में ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए दिशा-निर्देशों का मसौदा जारी करने के निर्णय की जानकारी दी।उन्होंने कहा कि देश में विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति मजबूत है और यह इस समय 10 महीने के आयात और 91 प्रतिशत विदेशी कर्ज के निपटान के लिए पर्याप्त स्तर पर है।
श्री मल्होत्रा ने कहा कि रिजर्ब बैंक विदेशी विनिमय दर को किसी खास स्तर पर रखने का लक्ष्य नहीं रखता लेकिन बाजार में सट्टोरिया गतिविधियों के कारण होने वाले किसी भी अनावश्यक उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए उसके पास पर्याप्त मौद्रिक और नियामकीय हथियार उपलब्ध है।आरबीआई गवर्नर ने कहा कि रिजर्व बैंक आर्थिक वृद्धि की संभावनाओं को मजबूत करने और मूल्य स्थिरता के माध्यम से उपभोक्ताओं की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा।(वार्ता)
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