नयी दिल्ली : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि नया आयकर अधिनियम लागू करते समय इसके प्रावधानों पर एक सूचना-पुस्तिका जारी की जायेगी ताकि करदाताओं, पेशेवरों को इसके साथ काम करने में आसानी हो। श्रीमती सीतारमण राज्यसभा में आयकर विधेयक, 2025 तथा कराधान विधि (संशोधन) विधेयक, 2025 पर एक साथ हुई चर्चा का जवाब दे रही थीं। उन्होंने कहा कि नया आयकर विधेयक ऐतिहासिक है।विपक्षी सदस्यों के बहिर्गमन के बीच हुई इस चर्चा पर वित्त मंत्री के उत्तर के बाद सदन ने दोनों विधेयकों को ध्वनिमत से यथा रूप स्वीकृत कर लोकसभा को लौटा दिया। लोकसभा इन्हें पहले ही पारित कर चुकी है। नया आयकर अधिनियम साल 1961 के कानून का स्थान लेगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि नया कानून अप्रैल 2026 से लागू किया जायेगा। इसके लिए कर विभाग को अपनी कंप्यूटर गणना- प्रणालियों को 31 मार्च 2026 तक री-सेट (पुनर्निधारित ) करना होगा।उन्होंने कहा, ‘हम अगल से एक सूचना-मेमो भी लायेंगे ताकि लोगों को नया कानून समझने में आसानी हो। नये कानून का उद्येश्य इसे सरल और करदाताओं के अनुकूल बनाना है और इसमें ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिससे करदातओं पर कर का बोझ बढ़े।”उन्होंने तलाशी में निजता और डाटा की सुरक्षा के मुद्दे पर कुछ सदस्यों की चिंता को दूर करते हुए कहा कि आयकर विधेयक, 2025 में अधिकारियों को कोई नये अधिकार नहीं दिये गये हैं। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) तलाशी में कंप्यूटर प्रणालियों को जब्त करने आदि के बारे में कार्रवाई की एक मानक प्रक्रिया (एसओपी) लागू करेगा।
श्रीमती सीतारमण ने कहा कि नये अधिनियम में ‘कराधान विधि (संशोधन) विधेयक, 2025 के अंतर्गत प्रस्तावित बिंदु भी शामिल होंगे जिन पर आज चर्चा हुई है। यह विधेयक आयकर अधिनियम 1961 और वित्त विधेयक 2025 में कुछ संशोधनों के लिए लाया गया है। इन संशोधनों में सरकार की एकीकृत पेंशन योजना के लिए छूट और सऊदी अरब के सार्वजनिक निवेश कोष को भारत में दी जा रही छूट तथा छापे के मामलों में एक कालखंड से संबंधित कर-आकलन के बारे में प्रावधान किये गये हैं। उन्होंने कहा कि ये प्रावधान नये कर अधिनियम में भी शामिल होंगे।वित्त मंत्री ने प्रस्तावित नये आयकर अधिनियम में ‘कंप्यूटर प्रणाली’ की परिभाषा बहुत व्यापक होने के मुद्दे पर कहा कि यह समय की जरूरत है। इसी प्रसंग में उन्होंने हाल के एक मामले का उदाहरण दिया जिसमें तलाशी के दौरान कंपनी के लोगों ने कंप्यूटर का पासवर्ड देने से यह कह कर इनकार कर दिया था कि पासवर्ड उस देश में है जहां की कंपनी है।
श्रीमती सीतारमण ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि जुलाई 2024 में पेश बजट में आयकर कानून की व्यापक समीक्षा किए जाने का उल्लेख किया गया था। पुराने कानून में समय के साथ टीडीएस, एडवांस रूलिंग तथा विवाद समाधान के कई नये फीचर जुड़ गये थे। समय के साथ विभिन्न संशोधनों के चलते इसकी सघनता और जटिलता बढ़ गयी थी। वाक्यों में घुमाव अधिक होने से विवादों की गुंजाइश बढ़ती गयी। कई प्रावधानों में पटाक्षेप के उपबंध थे, इससे इसके कई हिस्से निष्प्रभावी बन गये थे। इसीलिए नये कानून की जरूरत थी।उन्होंने कहा कि यह विधेयक छह महीने के रिकॉर्ड समय में तैयार किया गया। इसे तैयार करने में 75,000 मानव-घंटे का समय लगा। इसे इसी वर्ष फरवरी में प्रस्तुत किया गया था। उन्होंने विधेयक तैयार करने में सीबीडीटी और राजस्व विभाग के योगदान की सराहना की।उन्होंने इस चर्चा में शामिल नहीं होने के लिए विपक्षी दलों की आलोचना की जबकि वे पहले चर्चा में भाग लेने पर सहमति जता चुके थे। विधेयक के महत्व को देखते हुए दोनों सदनों में चर्चा के लिए 16-16 घंटे का समय रखा गया था।
वित्त मंत्री ने आयकरदाताओं पर बोझ कम करने और सहूलियत बढ़ाने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि 2019 के बाद से प्रधानमंत्री ने बराबर हिदायत दी है कि हम करदाताओं पर भार नहीं बढ़ायेंगे। इस बार के बजट में वेतनभोगियों की 12 लाख रुपये तक की आय को कर मुक्त कर दिया गया है तथा ऊपर के स्लैबों में भी दरें कम कर दी गयी हैं।उन्होंने कहा, ‘एक ऐतिहासिक छूट देने के बाद हम इस साल पूरा नया कानून ही ला रहे हैं जिसका उद्येश्य सरलीकरण है। इसमें कोई नयी दर नहीं लायी गयी है।”उन्होंने विधयेक पर विचार करने के लिए बैजयंत पांडा की अध्यक्षता में बनी प्रवर समिति के कार्य की भी सराहना की। समिति ने 36 बैठकें की और उसे 334 ज्ञापन प्राप्त हुये। समिति ने विधेयक पर 566 सिफारिशें कीं। इन पर विभाग के 370 जवाब समिति ने स्वीकार कर लिये।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नये आयकर अधिनियम में उपबंध 819 से घटाकर 536 पर लाये जा रहे हैं, अध्यायों की संख्या 47 से घटाकर 23 की जा रही है। नया आयकर कानून वर्तमान कानून 5.12 लाख शब्दों की जगह 2.59 लाख शब्दों का होने जा रहा है। इसकी भाषा सरल है।इससे पहले दोनों विधेयकों पर एक साथ चर्चा कर यथा रूप लोकसभा को लौटाने के वित्त मंत्री के प्रस्ताव पर चर्चा शुरू करते हुए सदस्यों ने आयकर विधेयक को समय की जरूरत बताया और इसको सुगठित, कम शब्दों, कम अनुच्छेदों और कम अध्यायों के साथ सरल भाषा में तैयार करने के लिए वित्त मंत्री की सराहना की।चर्चा शुरू करते हुए भाजपा के नरेश बंसल ने कहा कि नये आयकर अधिनियम से कंपनियों को आसानी होगी, और निवेश का रास्ता प्रशस्त होगा तथा करदाताओं को भी सहूलियत होगी।
वाईएसआर कांग्रेस के एस. निरंजन रेड्डी ने देश में कराधार बढ़ाने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि सबसे बड़ी चुनौती है कि देश में आबादी का दो प्रतिशत से कुछ अधिक ही आयकर के दायरे में हैं जबकि ब्राजील और मलेशिया जैसे विकासशील देशों में 20 प्रतिशत से अधिक लोग आयकर की परिधि में आते हैं। उन्होंने शिकायत की कि आयकर विधेयक में अधिकारियों को नागरिकों के डाटा की जांच करने के अधिकार बहुत अधिक कर दिये गये हैं जबकि निजता और डाटा सुरक्षा की सुरक्षा के प्रावधान अपेक्षाकृत कमजोर लगते हैं।उन्होंने ईमानदार करदाताओं के लिए प्रोत्साहन कार्ड योजना शुरू करने और उस पर हवाई अड्डे, रेलवे परिसरों में अलग कतार की सुविधा देने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इससे दूसरे लोग भी कर देने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
श्री रेड्डी ने यह भी कहा कि सरलीकरण की प्रक्रिया चलती रहनी चाहिए, इसके लिए एक समिति स्थापित किये जाने का सुझाव दिया। जनता दल (यू) के संजय कुमार झा ने कंप्यूटर प्रणाली की परिभाषा को व्यापक किये जाने का मुद्दा उठाया।भाजपा के संजय सेठ ने कहा कि यह कानून सामान्य करदाताओं के लिए आसानी से मसझ में आने वाला है। टीएमसी (मूपनार) के जी.के. वासन ने विधेयक का समर्थन करते हुए इस महत्वपूर्ण चर्चा के समय सदन में अनुपस्थित रहने के लिए विपक्ष की आलोचना की। उन्होंने कहा कि नये कर अधिनियम में देश में कंपनियों के लिए कारोबार करना आसान होगा, निवेश प्रोत्साहित होगा। भाजपा के डॉ. भागवत कराड ने विधेयकों का समर्थन करते हुए कहा कि वर्तमान कानून 64 साल पुराना हो गया है।तेलुगूदेशम के मस्तान राव यादव ने इस विधेयक को सुधार के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता बताया और कहा कि यह कर व्यवस्था को “सीमलेस, फेसलेस और पेनलेस” (सरल, स्वत: और सुखद) बनाने के उद्देश्य से प्रेरित है। भाजपा के महेंद्र भट्ट ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व में पिछले 11 वर्ष में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर में बड़े सुधार किए गए हैं। (वार्ता)
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