नेपाल बाढ़ त्रासदी: 547 शव बरामद, 977 लोग लापता, भोटेकोशी-त्रिशूली में तबाही
नेपाल में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई विनाशकारी बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई है। राहत एवं बचाव अभियान के तीसरे दिन तक 547 शव बरामद किए गए हैं, जबकि 977 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ का असर रसुवा से लेकर चितवन और नवलपरासी तक देखा जा रहा है। नेपाली सेना, पुलिस और सशस्त्र बल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार खोज, बचाव और राहत कार्य चला रहे हैं।
काठमांडू : नेपाल में भोटेकोशी नदी में गत 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ में मरने वालों की संख्या 500 के पार पहुंच गयी है जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं।लापता लोगों की तलाश और बाढ़ से बचे लोगों की सहायता के राहत एवं बचाव अभियान शुक्रवार को तीसरे दिन भी जारी रहा।राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, शुक्रवार अपराह्न तीन बजे तक 547 शव बरामद किये जा चुके हैं। इनमें रसुवा में मारे गये लोगों के साथ-साथ नदी के निचले प्रवाह वाले जिलों में बरामद किये गये शव भी शामिल हैं।
बाढ़ के बाद चलाये गये अभियान में रसुवा में 13, नुवाकोट में 38, धादिंग में 40, चितवन में 221, गोरखा में 44, तनहुं में 29, नवलपरासी पूर्व में 134 और नवलपरासी पश्चिम में 28 लोगों के शव बरामद हुए हैं। इस प्रकार कुल 547 शव बरामद किये गये हैं।मृतकों का यह आंकड़ा अंतिम नहीं है क्योंकि बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। प्राधिकरण का कहना है कि विभिन्न जिलों से प्राप्त आंकड़ों का मिलान किया जा रहा है और खोज अभियान लगातार जारी है।भोटेकोशी नदी और त्रिशूली नदी में प्रलयकारी बाढ़ लोगों और मलबे को काफी दूर तक बहाकर ले गया, जिसके कारण तलाशी और बरामदगी का दायरा रसुवा से आगे बढ़कर नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, तनहूं, चितवन और नवलपरासी तक पहुंच गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार चितवन में स्थिति विशेष रूप से गंभीर है। आज दोपहर तक वहां 221 शव बरामद किये जा चुके थे, जबकि जिले के अस्पतालों के शवगृहों में कुल मिलाकर केवल 30-50 शव रखने की क्षमता है। इसके कारण भरतपुर स्थित औद्योगिक उद्यम विकास संस्थान की एक खाली इमारत को अस्थायी शवगृह में बदला जा रहा है। इसमें करीब 250 शव रखे जा सकेंगे। भरतपुर महानगरपालिका भवन की मरम्मत और आवश्यक व्यवस्था कर रही है, जबकि स्थानीय व्यापारिक संगठनों ने सूखी बर्फ उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है।नवलपरासी पूर्व में भी शवों को रखने की समस्या सामने आ रही है।
अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में जगह नहीं बचने के कारण शवों को पोखरा, बुटवल, भैरहवा और पाल्पा भेजना पड़ा है। कावासोती में एक सामुदायिक वन सभागार को भी अस्थायी शवगृह में तब्दील किया गया है।पोखरा भी निचले इलाकों से बरामद शवों का एक प्रमुख केंद्र बन गया है। अधिकारियों ने तनहूं, गोरखा, नवलपरासी पूर्व और धादिंग से 93 शव पोखरा पहुंचाए हैं। कास्की के अस्पतालों में शव रखने की कुल क्षमता 88 है, जिससे मौजूदा क्षमता पर भी दबाव बढ़ गया है।
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, 977 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 517 विदेशी नागरिक शामिल हैं। नेपाल पुलिस के अनुसार, आपदा के दौरान संपर्क से बाहर हुए 28 पुलिसकर्मियों का अब भी पता नहीं चल पाया है। लापता लोगों में स्थानीय नागरिकों के अलावा पर्यटक, पर्वतारोही और यात्री भी शामिल हैं।अधिकारी यह भी पता करने में जुटे हैं कि लापता लोगों में से कुछ सुरक्षित स्थानों पर पहुंच चुके हैं या नहीं।
नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, रसुवा के बाढ़ प्रभावित इलाकों से 117 विदेशी पर्यटकों को बचाया गया है। इनमें 85 भारतीय, 16 चीनी, नौ दक्षिण कोरियाई, दो अमेरिकी और दो इतालवी नागरिक शामिल हैं। तीन अन्य पर्यटकों की राष्ट्रीयता की पुष्टि की जा सकी है। इन दुर्गम इलाकों से लोगों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि सुरक्षा बल जमीन पर बस्तियों और नदियों के किनारे तलाशी अभियान चला रहे हैं।
नेपाल पुलिस के 4,400 से अधिक जवानों के अलावा नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल भी राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हैं।नेपाल पुलिस के अनुसार नुवाकोट, रसुवा और धादिंग में सुरक्षा बलों ने 1,473 लोगों को बचाया या प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराई है। बाढ़ में सड़कें और पुल नष्ट होने के कारण कई इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है और कुछ स्थानों पर बचाव अभियान के लिए हेलीकॉप्टरों ही प्रमुख साधन है क्योंकि अन्य माध्यमों से वहां तक पहुंचना काफी मुश्किल हो रहा है।
अधिकारियों ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। बाढ़ के दो दिन बाद भी आपदा की पूरी भयावहता अभी सामने नहीं आयी है। मृतकों की संख्या 547 तक पहुंच चुकी है, सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं और जीवित बचे लोगों की तलाश के लिए अभियान जारी है।
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद 320 भारतीय नागरिक लापता, 21 को स्वदेश लाया गया: विदेश मंत्रालय
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद वहां करीब 320 भारतीय नागरिक लापता हैं जबकि 21 भारतीय नागरिकों को अब तक सुरक्षित स्वदेश लाया गया है।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को यहां मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि गुरुवार को त्रिशूली ऊर्जा परियोजना में फंसे 63 लोगों को बचाया गया था । काठमांडू में भारतीय राजदूत ने उनसे मुलाकात की है। इसके अलावा 96 भारतीय नागरिक चीन के क्षेत्र से जमीन के मार्ग से नेपाल की ओर सुरक्षित पहुंच चुके हैं। इन सभी को स्वदेश लाने के लिए सरकार व्यवस्था कर रही है।
उन्होंने कहा कि चीन के क्षेत्र में अभी भी करीब 400 भारतीय नागरिक हैं लेकिन वे सभी सुरक्षित हैं और उनके परिजनों तथा भारतीय दूतावास से उनकी बात हुई है क्योंकि वहां मोबाइल नेटवर्क काम कर रहा है। उस क्षेत्र में भी भूस्खलन हुआ है और रास्तों के खराब होने के कारण इनके आने में समय लग सकता है। सरकार इन्हें स्वदेश लाने की व्यवस्था कर रही है।प्रवक्ता ने कहा कि इसके अलावा भारतीय मूल के 100 और लोग लापता हैं जो अलग-अलग देशों के रहने वाले हैं। संभवत ये लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गये हों।एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अभी तक केवल लापता लोगों का आंकड़ा मिला है और किसी भारतीय नागरिक की मौत की पुष्टि नहीं की जा सकी है।
श्री जायसवाल ने कहा कि तमिलनाडु के जिन 21 लोगों को कल सुरक्षित बचाया गया था आज वे स्वदेश लौट आये। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हवाई अड्डे पर इन लोगों से मुलाकात की है।उन्होंने कहा कि जहां तक मानवीय सहायता की बात है तो अब तक दो विमानों में क्रमश दस टन और 37.5 टन राहत सामग्री भेजी जा चुकी है और तीसरा विमान आज जाने वाला है जिसमें 12 से 13 टन राहत सामग्री भेजी जायेगी।प्रवक्ता ने कहा कि नेपाल के अनुरोध के अनुसार एक सुरंग बचाव दल भेजने की तैयारी कर रहे हैं, जिसके लिए आवश्यक उपकरण आदि का आकलन करने के लिए पहले एक रेकी दल भेजा जा रहा है। एक चिकित्सा दल भी भेजा जा रहा है।
भारत ने संबंधित तकनीकी दलों के साथ बेली ब्रिज की भी पेशकश की है, ताकि नेपाल के प्रभावित हिस्सों में संपर्क व्यवस्था को शीघ्र बहाल किया जा सके। एक बेली ब्रिज पहले से ही नेपाल में है और उसे राहत प्रयासों के लिए तैनात किया जा सकता है।श्री जायसवाल ने कहा कि भारत ने नेपाल के अधिकारियों को एनडीआरएफ दलों को उनके संबंधित उपकरणों के साथ भेजने की भी विशेष पेशकश की है, जो खोज एवं बचाव अभियानों में सहायता कर सकते हैं और त्रासदी से प्रभावित लोगों तक राहत सहायता पहुंचा सकते हैं। इस संबंध में नेपाल सरकार के जवाब की प्रतीक्षा है। उन्होंने कहा कि भारत नेपाल के अनुरोध पर अन्य कोई भी सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।(वार्ता)
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