सुबह की सैर, गंगा की लहरें और चाय की चुस्की, वाराणसी-लखनऊ में Tea Board India का अनोखा अभियान
Tea Board India ने India Tea Wellness Campaign के तहत 5 सितंबर 2026 को वाराणसी और लखनऊ में विशेष Morning Tea Experience आयोजित किया। वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर सुबह 5 बजे और लखनऊ के जनकेश्वर मिश्र पार्क में सुबह 6 से 10 बजे तक हुए कार्यक्रम में लोगों को भारतीय चाय की विविधता, परंपरा और वेलनेस पहलुओं से परिचित कराया गया। Assam, Darjeeling और Dooars समेत प्रमुख चाय क्षेत्रों की चाय का स्वाद लोगों ने लिया। अभियान ने चाय को स्वास्थ्य, ताजगी और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ा।
वाराणसी/लखनऊ। भारतीय चाय की समृद्ध परंपरा, विविधता और वेलनेस से इसके जुड़ाव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से टी बोर्ड इंडिया की ओर से शनिवार, 5 सितंबर 2026 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी और लखनऊ में विशेष मॉर्निंग वॉक एवं टी एक्सपीरियंस कार्यक्रम आयोजित किए गए। ये आयोजन इंडिया टी वेलनेस कैंपेन के तहत किए गए, जिनका उद्देश्य लोगों को चाय के विभिन्न आयामों से परिचित कराने के साथ-साथ दिन की शुरुआत ताजगी और सकारात्मकता के साथ करने का संदेश देना था।
वाराणसी में दशाश्वमेध घाट पर सुबह पांच बजे शुरू हुआ कार्यक्रम
धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी वाराणसी में यह विशेष आयोजन ऐतिहासिक दशाश्वमेध घाट पर सुबह करीब 5 बजे शुरू हुआ। गंगा तट पर सुबह की आध्यात्मिक और प्राकृतिक आभा के बीच आयोजित इस कार्यक्रम ने चाय को भारतीय जीवनशैली, परंपरा और वेलनेस से जोड़ने का एक अलग अनुभव प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की प्रेरक थीम थी- “A Sip of Wellness to Start Your Day”, यानी दिन की शुरुआत स्वास्थ्य और ताजगी से भरी एक चुस्की के साथ।
सुबह-सुबह गंगा स्नान, पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए दशाश्वमेध घाट पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के साथ मॉर्निंग वॉक और सुबह की सैर के लिए निकले लोगों को भारतीय चाय का स्वाद लेने का अवसर मिला। कार्यक्रम में लोगों को ताजा तैयार की गई भारतीय चाय परोसी गई। इसके साथ ही उन्हें देश के विभिन्न चाय उत्पादक क्षेत्रों की चाय की विशेषताओं और विविधता के बारे में जानकारी दी गई।
असम से दार्जिलिंग तक भारतीय चाय की विविधता से कराया परिचित
वाराणसी के आयोजन में टी बोर्ड इंडिया ने भारत के प्रमुख चाय उत्पादक क्षेत्रों की समृद्ध विरासत और विविधता को सामने रखा। इसमें असम, दार्जिलिंग, डूआर्स सहित देश के अन्य चाय उत्पादक क्षेत्रों की चाय को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया।
आगंतुकों को अलग-अलग क्षेत्रों में पैदा होने वाली चाय के स्वाद, सुगंध, विशेषताओं और उसकी यात्रा के बारे में जानने का अवसर मिला। चाय प्रेमियों के बीच इस पहल को लेकर खास उत्सुकता दिखाई दी। अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया और भारतीय चाय की किस्मों तथा उनके स्रोतों के बारे में जानकारी हासिल की।
कार्यक्रम के दौरान चाय को केवल रोजमर्रा के पेय के रूप में देखने के बजाय उसे वेलनेस, ताजगी, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर देखने का संदेश दिया गया। चाय प्रेमियों और आगंतुकों के लिए यह आयोजन जानकारी साझा करने और अपने चाय अनुभवों को एक-दूसरे के साथ साझा करने का भी मंच बना।
लखनऊ में जनसुविधाओं और प्रकृति के बीच चाय का अनुभव
इसी अभियान के तहत राजधानी लखनऊ में भी 5 सितंबर को जनकेश्वर मिश्र पार्क, गोमती नगर में विशेष टी एक्सपीरियंस कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां कार्यक्रम सुबह 6 बजे से 10 बजे तक चला।
पार्क के शांत और हरियाली से भरे वातावरण में आयोजित इस कार्यक्रम में मॉर्निंग वॉक करने वालों, फिटनेस प्रेमियों, परिवारों और चाय के शौकीनों ने हिस्सा लिया। सुबह की सैर के दौरान लोग कुछ देर ठहरे, गर्मागर्म भारतीय चाय का आनंद लिया और चाय की उस यात्रा के बारे में जाना, जो चाय बागान से शुरू होकर लोगों के कप तक पहुंचती है।
कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को भारतीय चाय की समृद्ध विरासत, उत्पादन में शामिल कौशल, विविधता और वेलनेस से जुड़े पहलुओं से परिचित कराना था। प्राकृतिक वातावरण में चाय के अनुभव ने आयोजन को और भी खास बना दिया।
बागान से कप तक भारतीय चाय की यात्रा पर जोर
लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में इस बात को रेखांकित किया गया कि भारतीय चाय का सफर देश के चाय बागानों से शुरू होकर लाखों-करोड़ों लोगों के रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बनता है। चाय भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक जिंदगी से गहराई से जुड़ी हुई है और अलग-अलग क्षेत्रों तथा समुदायों के लोगों को एक साथ जोड़ने में इसकी अहम भूमिका रही है।
कार्यक्रम के दौरान लोगों को भारतीय चाय की विभिन्न परंपराओं, चाय उत्पादन में किसानों और श्रमिकों के कौशल तथा देश के अलग-अलग चाय क्षेत्रों की विशिष्ट पहचान के बारे में जागरूक किया गया।
वाराणसी की आध्यात्मिकता और लखनऊ की हरियाली में दिखी चाय की अलग तस्वीर
टी बोर्ड इंडिया के इस अभियान के तहत वाराणसी और लखनऊ में हुए दोनों आयोजनों ने भारतीय चाय को दो अलग-अलग लेकिन समान रूप से प्रभावशाली परिवेश में प्रस्तुत किया। वाराणसी में गंगा घाट की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि, जबकि लखनऊ में पार्क की हरियाली और सुबह के प्राकृतिक वातावरण ने चाय के अनुभव को नया आयाम दिया।
दोनों आयोजनों के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि चाय केवल एक लोकप्रिय पेय नहीं, बल्कि भारत की कृषि, संस्कृति, परंपरा, सामाजिक जुड़ाव और दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सुबह की ताजी हवा, सैर और एक गर्म कप चाय के माध्यम से लोगों को दिन की सकारात्मक और ऊर्जावान शुरुआत का अनुभव कराया गया।
देशभर में भारतीय चाय के प्रति जागरूकता बढ़ाने की पहल
इंडिया टी वेलनेस कैंपेन के माध्यम से टी बोर्ड इंडिया भारतीय चाय की विविधता और उसकी समृद्ध विरासत को देश के उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। वाराणसी और लखनऊ के आयोजनों ने इस अभियान को उत्तर प्रदेश में व्यापक जनसंपर्क का रूप दिया।
इस पहल के जरिए देश के विभिन्न चाय उत्पादक क्षेत्रों को उपभोक्ताओं से जोड़ने, भारतीय चाय की अलग-अलग किस्मों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और चाय को वेलनेस, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करने पर जोर दिया गया।
सुबह की चाय की एक साधारण-सी चुस्की को लेकर शुरू की गई यह पहल लोगों को चाय के स्वाद से आगे उसकी पूरी यात्रा-चाय बागान से लेकर कप तक और परंपरा से लेकर आधुनिक वेलनेस तक-से जोड़ने में सफल रही।
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