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मोदी ने गहरे समुद्र में की साहसिक स्कूबा डाइविंग

मोदी ने 1195 करोड़ रुपये से निर्मित गुजरात के पहले एम्स का किया लोकार्पण

देवभूमि द्वारका : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को देवभूमि द्वारका में साहसिक स्कूबा डाइविंग कर गहरे समुद्र में डूबी पौराणिक नगरी द्वारका के दर्शन कर पुरातन भव्यता एवं दिव्यता का अनुभव किया।श्री मोदी ने साहसिक मानी जाने वाली स्कूबा डाइविंग कर गहरे समुद्र में भगवान श्री कृष्ण की प्राचीन नगरी द्वारका के दर्शन किए। इससे पहले उन्होंने लक्षद्वीप में भी साहसिक स्कूबा डाइविंग की थी। उन्होंने इस अवसर पर कहा, “पुरातत्वीय जानकारों ने द्वारका नगरी पर अनेक शोध- अनुसंधान किए हैं जिसके कारण मेरी प्राचीन द्वारका दर्शन करने तथा उसे देखने की वर्षों से इच्छा थी। मेरा यह सपना आज पूरा हुआ है।

”प्रधानमंत्री ने कहा, “आज जब मुझे भगवान श्री कृष्ण की पावन भूमि पर आने का अवसर मिला, तब मैंने समुद्र में रही प्राचीन द्वारका नगरी के दर्शन कर पुरातन भव्यता एवं दिव्यता का अनुभव किया। मैं भगवान श्री कृष्ण का स्मरण कर प्राचीन द्वारका नगरी को मोरपंख अर्पित कर गौरव का अनुभव कर रहा हूँ।”उन्होंने कहा, “इस दर्शन के दौरान मेरी आँखों के समक्ष 21वीं शताब्दी में भारत के वैभव की तस्वीर भी घूम रही थी। प्राचीन द्वारका नगरी के दर्शन कर विकसित भारत का मेरा संकल्प और मजबूत हुआ है। सौराष्ट्र में अरब सागर के तट पर आस्था एवं पर्यटन में एक और मोती जुड़ा है। पर्यटक स्कूबा डाइविंग से मूल द्वारका के दर्शन कर सकें इसके लिए गुजरात सरकार कटिबद्ध है।

”सौराष्ट्र के सागर के तट पर जब सोमनाथ, माधवपुर, पोरबंदर, द्वारका, शिवराजपुर बीच, नागेश्वर तथा सुदर्शन सेतु से पर्यटन विभाग को बढ़ावा मिल रहा है तब प्रधानमंत्री ने द्वारका के गहरे समुद्र में साहसिक स्कूबा डाइविंग की और कहा कि शास्त्रों में भी प्राचीन द्वारका का उल्लेख है। भगवान विश्वकर्मा ने द्वारका नगरी का निर्माण किया था, जो भारत में श्रेष्ठ नगर का उत्तम उदाहरण है।भगवान श्री कृष्ण की कर्मभूमि द्वारकाधाम को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए श्री मोदी ने जोड़ा कि भगवान श्री कृष्ण द्वारकाधीश स्वरूप में यहाँ विराजमान हैं। यहाँ जो होता है, वह द्वारकाधीश की इच्छा से होता है। आदि शंकराचार्य ने यहाँ शारदा पीठ की स्थापना की थी। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, रुक्मणि मंदिर यहाँ के आस्था केन्द्र हैं।

मोदी ने 1195 करोड़ रुपये से निर्मित गुजरात के पहले एम्स का किया लोकार्पण

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के राजकोट जिले में 1195 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित गुजरात के पहले ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एम्स) का रविवार को लोकार्पण किया।श्री मोदी ने इसके बाद एम्स में आईपीडी का निरीक्षण किया तथा यहां उपलब्ध विभिन्न चिकित्सा उपचार सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं को देखा और उनके विषय में जानकारी प्राप्त की और एम्स अस्पताल के भविष्य के विकास की ब्लूप्रिंट समान मॉडल एवं गुजरात की विविधतापूर्ण संस्कृति और भारत की प्राचीन चिकित्सा परंपरा से लेकर जेनेटिक टेक्नोलॉजी तक की यात्रा की झांकी कराने वाली टेपेस्ट्री का निरीक्षण किया। इसके साथ ही, उन्होंने अस्पताल के विभिन्न विभागों, ऑपरेशन थियेटर एवं आईपीडी का दौरा कर विभिन्न व्यवस्थाओं का सूक्ष्म निरीक्षण किया।

एम्स के कार्यपालक निदेशक डॉ. सी. डी. एस. कटोच ने उन्हें एम्स के विभिन्न विभागों के बारे में जानकारी दी।राजकोट शहर के सीमावर्ती खंढेरी गांव में 201 एकड़ जैसे विशाल क्षेत्र में 1195 करोड़ रुपए की लागत से इस एम्स का निर्माण किया गया है जिसमें मरीजों को बिलकुल मामूली खर्च पर मल्टी-स्पेशलिटी उपचार मिलेगा। कुल 720 बिस्तरों वाले इस अस्पताल में मेजर सुपर स्पेशलिटी फैसिलिटीस, आईसीयू आदि सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। यहां 20 मेजर तथा तीन माइनर सहित कुल 23 अद्यतन ऑपरेशन थियेटर की सुविधा है। इस एम्स में दिसंबर-2021 से 14 मल्टी स्पेशलिटी विभागों से युक्त आउटडोर पेशेंट डिपार्टमेंट (ओपीडी) कार्यरत हो चुका है जो प्रतिदिन सुबह नौ से शाम चार बजे तक चलता है। इसमें हर दिन औसत 400 से 500 मरीजों का उपचार किया जाता है।

मरीजों को जरूरी दवाइयां भी यहीं से दी जाती हैं।ओपीडी के मरीजों के लिए आभा कार्ड भी बनाए जा रहे हैं। फरवरी-2024 के आरंभ तक 144614 मरीज ओपीडी सेवा का लाभ ले चुके हैं। इस एम्स में 24 फरवरी 2022 से टेलीमेडिसीन सेवा (ई-संजीवनी) पूरी तरह कार्यरत हो चुकी है जहाँ हर दिन औसत 132 व्यक्तियों को टेलीफोन से दवाई-उपचार संबंधी मार्गदर्शन दिया जाता है। अब तक 70337 लोगों ने टेलीमेडिसीन सेवा का लाभ लिया है।आज लोकार्पण के साथ राजकोट एम्स में 250 बेड की क्षमता के साथ इनडोर पेशेंट डिपार्टमेट (आईपीडी) भी शुरू हो गया है, जहां अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत वाले मरीजों का उपचार किया जाएगा। इसके साथ ही बेड का आयुष ब्लॉक भी मरीजों के उपचार के लिए शुरू किया गया है। आईपीडी में इमर्जेंसी तथा ट्रॉमा की स्थिति में अविलंब उत्तम उपचार उपलब्ध कराने के लिए 35 बेड की सुविधा उपलब्ध है जहाँ मॉड्लूयर ऑपरेशन थियेटर के साथ ऑर्थोपैडिक, जनरल सर्जरी, ऑबस्ट्रक्ट व गायनेकोलॉजी, ईएनडी, ऑप्थेल्मोलॉजी और डेंटल सर्जरी की सेवाएँ उपलब्ध हैं।

इस अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया, नवसारी के सांसद सी. आर. पाटिल, राज्य के मुख्य सचिव राज कुमार, भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव अपूर्व चंद्रा, नेशनल हेल्थ मिशन की निदेशक श्रीमती रम्या मोहन, राजकोट एम्स के उप निदेशक पुनीत अरोड़ा भी प्रधानमंत्री के साथ जुड़े।इससे पहले प्रधानमंत्री आज दोपहर द्वारका से हवाई मार्ग से राजकोट एम्स पहुंचे। राजकोट एम्स हेलीपैड पहुंचने पर राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, नवसारी के सांसद सी. आर. पाटिल, राज्य पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विकास सहाय, जिला कलेक्टर प्रभव जोशी, राजकोट शहर पुलिस आयुक्त राजू भार्गव ने उनका ऊष्मापूर्ण स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने एम्स परिसर में बने ओपीडी सहित विभिन्न विभागों और समग्र परिसर का निरीक्षण करने के बाद वे आईपीडी भवन में पहुंचे। यहाँ उन्होंने एम्स की तकती का अनावरण किया और रिबिन काट कर गुजरात का पहला एम्स लोगों को समर्पित किया।

मोदी ने देवभूमि द्वारका, जामनगर, पोरबंदर को 4100 करोड़ रु की विकास परियोजनाओं की दी सौगात

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को गुजरात में देवभूमि द्वारका, जामनगर और पोरबंदर जिले को 4100 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं की सौगात दी।श्री मोदी ने इस अवसर पर कहा,“ आज की पीढ़ी नए भारत का निर्माण होते देख रही है। गुजरात सहित देश भर में चल रहे मेगा प्रोजेक्ट्स के कारण नए भारत की नई तस्वीर बनी है। भारत ने आधुनिक कनेक्टिविटी के माध्यम से समृद्धि और सशक्त राष्ट्र निर्माण की राह बनाई है।” श्री मोदी ने पौराणिक नगरी द्वारका में आज देवभूमि द्वारका, जामनगर और पोरबंदर जिले के लिए 4100 करोड़ रुपए की विभिन्न विकास परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास समारोह में यह बात कही। इस अवसर पर उन्होंने देश के सबसे लंबे केबल-आधारित ब्रिज का उद्घाटन भी किया। राज्स के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी उनके साथ मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में आधुनिक सुविधाओं के विकास से विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है। वर्ष 2022 में 85 लाख विदेशी सैलानियों ने भारत की यात्रा की थी। इनमें से अकेले गुजरात में ही 15.50 लाख विदेशी पर्यटक आए थे। ई-वीजा के अलावा पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी में हुई वृद्धि और सुविधाओं के कारण विदेशों में भारत के पर्यटन स्थलों के प्रति आकर्षण बढ़ा है और इस वजह से गुजरात में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।उन्होंने कहा कि सुदर्शन सेतु ओखा और बेट द्वारका द्वीप को जोड़ने के साथ ही भगवान द्वारकाधीश के दर्शन को और अधिक आसान बनाएगा और उसकी दिव्यता को चार चांद लगाएगा। यह ईश्वर रूपी जनता-जनार्दन के सेवक मोदी की गारंटी है। उन्होंने कहा कि सुदर्शन सेतु केवल एक सुविधा नहीं है, बल्कि इंजीनियरिंग कौशल का अद्भुत उदाहरण भी है। स्ट्रक्चरलर इंजीनियरिंग का अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को इस सेतु का अध्ययन करना चाहिए। यह सुदर्शन सेतु भारत का सबसे लंबा केबल-आधारित पुल है। सुदर्शन सेतु के कारण ओखा एक बार फिर से दुनिया के नक्शे में चमकेगा। ओखा के भव्य भूतकाल की याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि किसी दौर में ओखा व्यापारिक बंदरगाह के रूप में प्रसिद्ध था।

ओखा की साख इतनी ज्यादा थी कि यहां से भेजी जाने वाली चीजों को उत्तम गुणवत्तापूर्ण माना जाता था। रशिया के अस्ट्राखान प्रांत में आज भी अच्छे से अच्छे स्टोर या मॉल के नाम से पहले ओखा लगाया जाता है। वहां ओखा शब्द उत्तम गुणवत्ता का पर्याय है।प्रधानमंत्री ने कहा , “पहले बेट द्वारका के लोगों और भगवान द्वारकाधीश के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को फेरी बोट पर निर्भर रहना पड़ता था। इस समस्या के निवारण के लिए यहां एक पुल बनाने के लिए उन्होंने तत्कालीन केंद्र सरकार से कई बार मांग की थी, लेकिन उस समय की केंद्र सरकार ने यह काम नहीं किया। शायद भगवान श्री कृष्ण ने सुदर्शन सेतु का निर्माण भी मेरे ही भाग्य में लिखा था। परमात्मा के आदेश का पालन करते हुए यह दायित्व मैंने निभाया है।” उन्होंने सुदर्शन सेतु की विशेषताओं की जानकारी भी विस्तार से दी। पुरानी सरकारों की कार्यशैली के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने केवल सत्ता बचाने के लिए ही शासन किया था। देश के हित के बारे में विचार करने के बजाय उन लोगों ने केवल एक ही परिवार को आगे बढ़ाने का काम किया है। नागरिकों की सुविधा बढ़ाने के लिए उनकी नीयत और निष्ठा में खोट थी। अतीत के शासकों ने केवल घोटाले ही किए।

श्री नरेन्द्र मोदी ने यह भी कहा कि देश में टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने का समय आया तो टू-जी घोटाला कर दिया, खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने का अवसर आया तो कॉमनवेल्थ घोटाला कर दिया, और जब डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की बारी आई तो हेलीकॉप्टर और सबमरीन घोटाला कर पुरानी सरकारों ने देश की जरूरतों के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने कहा, “ वर्ष 2014 में जब मैंने केंद्र में शासन की कमान संभाली तब यह वादा किया था कि मैं देश को लुटने नहीं दूंगा। पिछले 10 वर्षों में भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बनने के साथ ही नव्य और भव्य कार्य हो रहे हैं।”देश में हो रहे आइकॉनिक मेगा प्रोजेक्ट्स का गर्व के साथ उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा कि देश की चारों दिशाओं में विकास कार्य हो रहे हैं और उसका लाभ आम नागरिकों को मिल रहा है।

उन्होंने गुजरात के पर्यटन क्षेत्रों के विकास की पृष्ठभूमि में कहा कि द्वारका, सोमनाथ, पावागढ़, मोढेरा और अंबाजी जैसे तीर्थ स्थानों में पर्यटकों के लिए नई सुविधाएं विकसित की गई हैं। हेरिटेज सिटी अहमदाबाद, रानी की वाव (बावड़ी), चांपानेर और धोलावीरा को विश्व विरासत का दर्जा मिला है, तो कच्छ के धोरडो को यूनेस्को ने “सर्वश्रेष्ठ गांव “का सम्मान दिया है। द्वारका के निकट शिवराजपुर बीच को भी ब्लू टैग मिला है और वहां भी विकास कार्य किए जा रहे हैं। रणोत्सव, नडाबेट, गिर अभयारण्य, गिरनार, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और लोथल जैसे स्थलों का भरपूर विकास हुआ है।उन्होंने कहा,“ हमारी सरकार ‘विकास भी, विरासत भी’ के मंत्र के साथ आस्था के केंद्रों को संवार रही है।

किसी समय सौराष्ट्र में व्याप्त पानी की किल्लत की याद दिलाते हुए उन्होंने सौराष्ट्र नर्मदा अवतरण सिंचाई (एसएयूएनआई) योजना का उल्लेख किया और कहा कि इस योजना के माध्यम से सौराष्ट्र और कच्छ में सिंचाई तथा पीने के लिए मां नर्मदा का पानी पहुंचा है। इसके कारण किसान, पशुपालक और सागरखेड़ू (मछुआरे) आर्थिक रूप से संपन्न हुए हैं।” उन्होंने कहा कि सौराष्ट्र की धरती संकल्प से सिद्ध की प्रेरणा देती है। सौराष्ट्र और गुजरात समृद्धि के शिखर पर पहुंचेंगे तथा विकसित सौराष्ट्र से विकसित गुजरात और विकसित भारत का निर्माण होगा।प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर स्थानीय लोगों से यह आह्वान किया कि वे द्वारका तीर्थ स्थान को स्वच्छ बनाए रखें ताकि यह नगरी श्रद्धालुओं के मन में बस जाए।(वार्ता)

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