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मथुरा: कंस के पुतले को लाठियों से झूर झूर कर गिराया

श्रीकृष्ण बलदेव के जयकारों से गूंजा वातारण

मथुरा । छज्जू लाए खाट के पाए, मार-मार लट्ठन झूरी करि आए, याही कंस की दाड़ी लाए, याही कंस की मूंछे लाए के मधुर भजनों के बीच गुरुवार शाम चतुर्वेदी समाज ने कंस के पुतले को लाठियों से मार डाला। कंस वध मेले के सहभागी बनने के लिए देश और विदेश से चतुर्वेदी समाज के सैकड़ों लोग मथुरा पहुंचे।

श्री माथुर चतुर्वेद परिषद की ओर से गुरुवार शाम कंस के पुतले को डाकघर के सामने कंस टीले पर ले जाया गया। इसी बीच ठाकुर जी की सवारी गाड़ी में बैठकर कंस टीले के पीछे अंतापाड़ा पहुंची। ठाकुर जी के इशारे पर चतुर्वेदी समाज के लोगों ने कंस को लाठियों से झूरना शुरू कर दिया। चतुर्वेदी समाज के लोगों ने कंस्सा मार मधुपुरी आए, कंसा के घर के घबराए आदि गीत गाते हुए कंस टीले पर आनंद लिया। मेले को देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग होलीगेट से लेकर छत्ता बाजार में जमे रहे। इस बीच मथुरा पुलिस का विशेष सहयोग देखने को मिला।

श्री माथुर चतुर्वेद परिषद के मुख्य संरक्षक अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पाठक ने बताया कि असत्य पर सत्य की विजय, अत्याचार और अनाचार पर सदाचार की विजय का प्रतीक बना कंस मेला हजारों वर्ष बाद भी अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। मेले में देश-विदेश में रहने वाले चतुर्वेद समाज के लोग भाग लेने के लिए आते हैं, जिससे यह मेला चतुर्वेद समाज का समागम बना हुआ है।

मथुरा: कंस वध के बाद हुए कृष्ण-बलदेव के वाकयुद्ध के जज बने रंगेश्वर महादेव का मना प्राकट्योत्सव, काटा गया केक

भगवान कृष्ण और शेषावतार बलदेव के वाकयुद्ध के जज बने औघड़दानी भगवान रंगेश्वर महादेव का प्राकट्योत्सव गुरुवार रात्रि रंगेश्वर भक्त मंडल समिति के सदस्यों ने श्रद्धा भक्ति के साथ मनाया। इस दौरान रंगेश्वर महादेव का हैप्पी बर्थ डे केक कंस वध होने के बाद काटा गया। भक्तों ने भगवान का मंत्रोच्चारण के मध्य अभिषेक और मनोहारी श्रृंगार किया।

मान्यता है कि कृष्ण और बलदेव ने अपने-अपने रण कौशल से कंस का संहार किया। संहार के बाद बलदेव और कृष्ण दोनों भाइयों में विवाद हो गया। दोनों कंस को मारने का श्रेय लेने लगे। कृष्ण ने कहा मैंने मारा और बलदेव ने कहा मैंने मारा। इस वाकयुद्ध के बीच में रंगनाथ बाबा प्रकट हुए और कृष्ण एवं बलदेव दोनों से कहने लगे रंग है तुम्हारा रंग है। बाबा ने कृष्ण से कहा तुमने छल से कंस को मारा और बलदेव से कहने लगे तुमने बल से कंस को मारा है। इसके बाद कृष्ण बलदेव के बीच का वाकयुद्ध शांत हो गया।(हि.स.)।

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