नई दिल्ली । हॉकी के बारे में दिलचस्प चर्चा में डॉ. एम.पी. गणेश ने कहा, भारत को अपना खेल खुद खेलने की जरूरत है। खिलाड़ियों के लिए निरंतर दीर्घकालिक खेल रणनीति बनाने के लिए भारत के पास अपने राष्ट्रीय कोच होने चाहिए। भारत में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि विशिष्ट कठिनाई का समाधान निकालने के लिए ही विदेशी प्रशिक्षकों को केवल छोटी अवधि के लिए बुलाया जाना चाहिए। न्होंने जोर देकर कहा कि माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में खेलों को अनिवार्य विषय बनाया जाना चाहिए, क्योंकि इससे भारत को अधिक से अधिक प्रतिभाओं का पोषण करने में मदद मिलेगी। प्रशासन में खिलाड़ियों की भागीदारी के बारे में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए डॉ. एम. पी. गणेश ने कहा, खेलों में पारंगत नागरिक प्रशासकों को खेल प्रशासन का दायित्व सौंपा जाना चाहिए और वह भी लम्बी अवधि के लिए। पत्र सूचना कार्यालय, चंडीगढ़ के सहायक निदेशक हिमांशु पाठक ने वेबिनार सत्र का संचालन किया। वेबिनार में विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों, भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के क्षेत्रीय केंद्रों के प्रशिक्षकों और प्रशिक्षु एथलीटों और क्षेत्र के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों ने भाग लिया।



