
पोते की बारात का हसरत लिए दादा हुए दुनियां से रुखसत
शादी की शहनाई का धुन मातम में बदला
दुद्धी,सोनभद्र– पोते की शादी देखने की हसरत लिए दादा वाराणसी के एक निजी अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे थे। परिवार वाले भी उनके इच्छा का सम्मान करते हुए आनन फानन में शादी की तिथि नियत कर दी। लेकिन कुदरत को ये मंजूर न था।बारात के दिन ही दादा दुनियां छोड़कर रुखसत हो लिये और खुशियों का पल क्षण भर में ही मातम में बदल गया। यह दुःखदायी वाकया तहसील मुख्यालय स्थित नगर चेयरमैन राजकुमार अग्रहरि के घर घटी। चेयरमैन श्री अग्रहरि के चाचा सेवानिवृत्त लेखपाल मोतीलाल 82 वर्ष बीमार चल रहे थे और सप्ताह भर से वाराणसी के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था।
परिजनों से उन्होंने इच्छा प्रकट किया कि अपने जीवन काल में ही अपने पहले प्रिय पोते विवेक अग्रहरि का विवाह देख लें। उनके इच्छा का सम्मान करते हुए परिवार वालों ने रविवार 6 फरवरी को शादी का दिन रख दिया। रविवार को ही पोते की शादी व बारात देखने की बात कहकर दादा मोतीलाल अस्पताल से अपने घर आने की जिद करने लगे। परिजनों ने यहां भी उनके मन की बात को रखते हुए अस्पताल से छुट्टी करा ली और दुद्धी के लिए निकल पड़े। लेकिन कुदरत को ये मंजूर न था, दिन के करीब साढ़े ग्यारह बजे दादा मोतीलाल ने रास्ते में ही चोपन पहुंचते पहुंचते दम तोड़ दिया। उधर हंसी खुशी पोते की बारात निकालने की चल रही तैयारी व बज रही शहनाई की धुन अचानक मातम में बदल गई। उनके निधन की सूचना आते ही मांगलिक माहौल गमगीन हो गया।स्वजन समेत पूरे नगर में शोक की लहर दौड़ गई।लेकिन शादी की तैयारी और मेहमानों को दिये गए निमंत्रण को देखते हुए बड़े बुजुर्गों की मशविरा पर वर व वधू पक्ष सादगी से वैवाहिक कार्यक्रम संपन्न कराने के लिए बातचीत कर रहे थे।



