पुत्र वियोग में पिता ने भी त्यागे प्राण, घर में मचा कोहराम
हृदय विदारक घटना से घरों में नही जले चूल्हे
दुद्धी, सोनभद्र- पिता के कंधे पर बेटे की जाये अर्थी,ये उन्हें मंजूर न था।कुदरत का यह फैसला रास न आया तो उसने भी दुनियां को कह दिया अलविदा। यह शायरी बेटे की गम में प्राण त्यागने वाले पिता पर बिलकुल ही सटीक बैठती है। जी हां हृदय विदारक यह घटना नगर पंचायत दुद्धी के वार्ड नम्बर दो की है।जहां के रहवासी बलवंत राम की सांस लेने में दिक्कत की वजह से मंगलवार की देर रात इलाज के दौरान राबर्ट्सगंज में मौत हो गयी थी। यह खबर सुन पिता विचलित हो उठे।उनका अश्रुधार रुकने का नाम ही नही ले रहा था।

जवान बेटे की मौत के गम में बेसुध पिता रामचन्द्र बस एक ही रट लगाये हुए थे कि हे भगवान इसी दिन के लिए हमें जिंदा रखे थे।इन बूढ़े कंधों पर बेटे की अर्थी का बोझ नही सहा जाता, इसी क्षण मुझे भी उठा ले।यह कहकर रोने लगते। उनका यह हाल देख पूरे घर वालों का रो-रो कर बुरा हाल था। रामचन्द्र के पोते सूर्यमणि ने बताया कि बाबा ने चाचा बलवंत की मौत की खबर सुनने के बाद अन्न जल त्याग दिया और केवल विलाप करते रहे। इसी बीच उनकी हालत बिगड़ी और गुरुवार की प्रातः 4 बजे अंतिम सांस ली। बेटे के गम में पिता की दुःखदायी मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। परिजनों के साथ ही पूरे मुहल्ले में गम का माहौल था।पिता-पुत्र की शोक में मुहल्ले के किसी भी घर में चूल्हे नही जले। लगातार दो दिन एक ही घर से उठने वाली अर्थी का दृश्य देख हर किसी की कलेजा कांप उठा।



