Varanasi

31 मार्च तक सरचार्ज माफी का आखिरी मौका, वाराणसी में 2.35 करोड़ टैक्स जमा

वाराणसी नगर निगम की सरचार्ज माफी योजना 31 मार्च को समाप्त हो रही है। अंतिम दिन से पहले रविवार को 2500 से अधिक लोगों ने 2.35 करोड़ रुपये टैक्स जमा किया। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने चेतावनी दी कि समयसीमा के बाद कोई राहत नहीं मिलेगी और अप्रैल से कुर्की-जप्ती अभियान शुरू होगा। ऑनलाइन भुगतान में भी तेजी देखी गई।

  • रविवार को भी खुले रहे काउंटर, अप्रैल से बकायेदारों पर कुर्की-जप्ती की कार्रवाई

​​वाराणसी : नगर निगम द्वारा जलकर और सीवर कर के बकाये पर दी जा रही सरचार्ज (ब्याज) माफी की समय सीमा 31 मार्च को समाप्त हो रही है। इसे देखते हुए रविवार को अवकाश के बावजूद जोनल कार्यालयों में गहमागहमी रही और करीब 2500 से अधिक भवन स्वामियों ने 2.35 करोड़ रुपये का राजस्व (गृहकर, जलकर व सीवर कर) जमा किया।

नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि सरचार्ज में छूट का लाभ केवल 31 मार्च तक ही मिलेगा। इसके बाद किसी भी स्थिति में कोई राहत नहीं दी जाएगी और अप्रैल से ही बकायेदारों के विरुद्ध कठोर व्यापक अभियान चलेगा । इसमें कुर्की व जब्ती का अभियान चलाया जाएगा। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने आज इस संबंध में सभी जोनल अधिकारियों को निर्देशित कर दिया गया है कि संपत्ति कर जमा नहीं करने वाले भवन स्वामियों को चिन्हित करने की कार्यवाही शुरू कर दी जाए।

​ऑनलाइन भुगतान की ओर बढ़ा रुझान

​डिजिटल इंडिया के प्रभाव और निगम की सुगम व्यवस्था के चलते टैक्स भुगतान के तरीकों में बड़ा बदलाव दिख रहा है। रविवार को जमा हुए कुल टैक्स में खास बात यह रही कि लगभग 40 प्रतिशत भवन स्वामियों ने घर बैठे ऑनलाइन माध्यम से भुगतान करना बेहतर समझा। नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट www.nnvns.org.in के जरिए लोग कतारों से बचकर अपना बकाया जमाकर रहे हैं।

​रात नौ बजे तक खुले रहेंगे काउंटर

नगर आयुक्त ने ​आम जनता की सुविधा के लिए 31 मार्च तक सभी जोनल कार्यालयों के टैक्स कलेक्शन सेंटर रात 9:00 बजे तक खोलने का निर्देश दिया है । यदि कोई स्वामी निर्धारित अवधि तक भुगतान नहीं करता है, तो अगले वित्तीय वर्ष (2026-27) में पिछले सभी ब्याज जोड़कर वसूली की जाएगी। इसके साथ ही, डिफाल्टरों की सूची बनाकर उनके खिलाफ कुर्की व अन्य विधिक कार्रवाई भी अमल में लाई जा सकती है।

​लाइसेंस शुल्क में देरी पर लगेगा 50 फीसदी विलंब शुल्क

​निगम ने करेत्तर मदों, जैसे दुकानों के किराये और लाइसेंस शुल्क को लेकर सबसे सख्त रुख अपनाया है। यदि इन मदों के भुगतान में देरी होती है, तो निगम ने मूल धनराशि पर सीधे 50 प्रतिशत विलंब शुल्क लगाने का निर्णय लिया है।

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