मेहसाणा : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को यहां कहा कि ‘गुजरात की तरह हर घर जल अभियान देश में करोड़ों लोगों का जीवन बदल रहा है।’श्री मोदी ने हर घर में पानी पहुंचाने की योजना का जिक्र करते हुए गुजरात में शुरू की गई जल संरक्षण योजना का भी उल्लेख किया। इसने अब देश के लिए जल जीवन मिशन का रूप ले लिया है। उन्होंने कहा, “ गुजरात की तरह हर घर जल अभियान देश में करोड़ों लोगों का जीवन बदल रहा है।” वह आज मेहसाणा में लगभग 5800 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास अवसर पर सभा को संबोधित कर रहे थे।
”प्रधानमंत्री ने उस समय को याद करते हुए जब पूरे उत्तरी गुजरात क्षेत्र में पीने और सिंचाई के लिए पानी की कमी के कारण जीवन कठिन था और एकमात्र डेयरी व्यवसाय को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। उन्होंने कहा कि किसान प्रति वर्ष केवल एक ही फसल काट पाते थे और उसमें भी कोई निश्चितता नहीं होती थी।श्री मोदी ने क्षेत्र के कायाकल्प के लिए किए गए कार्यों पर प्रकाश डाला और यहां जल आपूर्ति और सिंचाई के लिए किए गए कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने जोर देकर कहा, “ हमने कृषि क्षेत्र के साथ-साथ उत्तरी गुजरात के औद्योगिक क्षेत्र को विकसित करने के लिए काम किया। ”उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य उत्तरी गुजरात के लोगों के लिए कमाई के ज्यादा से ज्यादा नये रास्ते तैयार करना है।
उन्होंने सुजलाम-सुफलाम योजना पर प्रकाश डाला, जिसमें गुजरात के विकास के लिए नर्मदा और माही नदियों के पानी का उपयोग किया जाता है। उन्होंने कहा कि अधिकतम लाभ सुनिश्चित करने के लिए साबरमती पर छह बैराज बनाये जा रहे हैं। इनमें से एक बैराज का आज उद्घाटन किया गया है। इससे हमारे किसानों और दर्जनों गांवों को बहुत लाभहोगा।”प्रधानमंत्री ने कहा कि इन सिंचाई परियोजनाओं के कारण उत्तर गुजरात में सिंचाई का दायरा 20-22 वर्षों में कई गुना बढ़ गया है। सरकार द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूक्ष्म सिंचाई की नयी तकनीक उत्तर गुजरात के किसानों ने तुरंत अपनाई और संतोष व्यक्त किया कि बनासकांठा में 70 प्रतिशत क्षेत्र नई तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। किसान अब सौंफ, जीरा और अन्य मसालों के साथ-साथ गेहूं, अरंडी, मूंगफली और चना जैसी कई फसलें उगा सकते हैं।उन्होंने बताया कि देश का 90 प्रतिशत इसबगोल गुजरात में संसाधित होता है, जो इसे एक विशिष्ट पहचान देता है।
उन्होंने बढ़ती कृषि उपज पर भी गौर दिया और आलू, गाजर, आम, आंवला, अनार, अमरूद और नींबू का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि डीसा को आलू की जैविक खेती के केन्द्र के रूप में विकसित करने के भी प्रयास किये जा रहे हैं।श्री मोदी ने बनासकांठा में आलू प्रसंस्करण के लिए एक विशाल संयंत्र स्थापित करने का उल्लेख किया। उन्होंने मेहसाणा में बने एग्रो फूड पार्क का भी जिक्र किया और कहा कि बनासकांठा में भी ऐसा ही मेगा फूड पार्क बनाने का काम किया जा रहा है। उन्होंने यह टिप्पणी करते हुए कि महिलाएं पशुपालन और डेयरी क्षेत्र के विकास की सबसे बड़ी लाभार्थी रही हैं, कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तरी गुजरात में सैकड़ों नए पशु चिकित्सा अस्पताल बनाये गये हैं, जिसके परिणामस्वरूप पशुओं का स्वास्थ्य अच्छा हुआ है और जिससे दूध उत्पादन में वृद्धि हुई है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले दो दशकों में उत्तर गुजरात में 800 से अधिक नयी ग्राम डेयरी सहकारी समितियां भी बनायी गयी हैं। उन्होंने कहा, “ चाहे बनास डेयरी हो, दूध सागर हो, या साबर डेयरी हो, इनका अभूतपूर्व विस्तार किया जा रहा है। दूध के अलावा, ये किसानों की अन्य उत्पादों के लिए भी बड़े प्रसंस्करण केन्द्र बन रहे हैं। ”उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पशुओं के मुफ्त टीकाकरण के लिए एक बड़ा अभियान चला रही है, जिस पर 15,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने क्षेत्र के पशुपालकों से अपने पशुओं का टीकाकरण कराने का आग्रह किया। उन्होंने गोबरधन योजना के तहत अनेक संयंत्र लगाने का भी जिक्र किया, जहां गाय के गोबर से बायोगैस और बायो सीएनजी बनाई जा रही है।
उत्तर गुजरात में ऑटोमोबाइल उद्योग के विस्तार के बारे में, उन्होंने मंडल-बेचराजी ऑटोमोबाइल केन्द्र के विकास का उल्लेख किया, जिससे रोजगार के अवसर और लोगों की आय में वृद्धि हुई है।प्रधानमंत्री ने कहा, “ यहां उद्योगों से होने वाली आय केवल 10 वर्षों में दोगुनी हो गयी है। खाद्य प्रसंस्करण के अलावा, मेहसाणा में फार्मास्युटिकल उद्योग और इंजीनियरिंग उद्योग भी विकसित हुआ है। बनासकांठा और साबरकांठा जिलों में सिरेमिक से जुड़े उद्योग विकसित हुए हैं। ” (वार्ता)



