चुरावनपुर का प्राचीन तालाब अतिक्रमण मुक्त, नगर निगम ने शुरू किया पुनरुद्धार
वाराणसी नगर निगम ने चुरावनपुर स्थित ढाई बीघे के प्राचीन तालाब को अतिक्रमण से मुक्त करा लिया है। राजस्व और निगम टीम ने पैमाइश कर कब्जा हटाकर तालाब को अपने अधिकार में ले लिया। इसके बाद सफाई, पुनरुद्धार और सुंदरीकरण कार्य शुरू हो गया है। यह पहल जल संरक्षण, भूजल स्तर सुधार और पर्यावरण संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
- ढाई बीघे में फैले तालाब से हटाया गया अवैध कब्जा, पैमाइश के बाद निगम ने लिया कब्जे में; जल संरक्षण की दिशा में बड़ी पहल
वाराणसी : जलस्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन को लेकर वाराणसी नगर निगम ने सख्त रुख अपनाते हुए मंगलवार को चुरावनपुर स्थित प्राचीन तालाब को अतिक्रमण से मुक्त करा दिया। लगभग ढाई बीघे क्षेत्रफल में फैले इस विशाल तालाब के एक बड़े हिस्से पर अवैध कब्जा कर लिया गया था, जिससे इसका स्वरूप और जल संरक्षण क्षमता प्रभावित हो रही थी। शिकायत मिलने के बाद नगर निगम और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर पैमाइश कराई और अतिक्रमण को ध्वस्त कर दिया।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, तालाब की भूमि की विधिवत सीमांकन प्रक्रिया पूरी करने के बाद अवैध कब्जे को हटाया गया और पूरे परिसर को निगम के अधिकार में ले लिया गया है। कार्रवाई के दौरान निगम के दस्ते ने अतिक्रमणकारियों द्वारा किए गए अस्थायी निर्माण और अवरोधों को हटाते हुए तालाब क्षेत्र को पूरी तरह खाली कराया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अब इस भूमि पर किसी भी प्रकार की निजी गतिविधि या कब्जा पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
अतिक्रमण हटने के तुरंत बाद नगर निगम ने तालाब के पुनरुद्धार और सुंदरीकरण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। निगम की टीम ने मौके पर सफाई कार्य प्रारंभ कराते हुए कचरा, मलबा और झाड़-झंखाड़ हटाने का कार्य शुरू कराया। आने वाले दिनों में तालाब की गहराई बढ़ाने, किनारों को मजबूत करने और आसपास हरियाली विकसित करने की योजना है, जिससे यह तालाब पुनः अपने मूल स्वरूप में आ सके।
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि शहर के पारंपरिक जलस्रोतों को संरक्षित करना प्राथमिकता में शामिल है। कुएं, तालाब और अन्य जलस्रोत न केवल भूजल स्तर को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, बल्कि पर्यावरण संतुलन और स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए भी आवश्यक हैं। तालाबों के पुनर्जीवन से वर्षा जल संचयन को बढ़ावा मिलेगा और शहर में जल संकट की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।
नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि शहर के अन्य तालाबों और जलस्रोतों की भी पहचान कर उन्हें अतिक्रमण से मुक्त कराने का अभियान जारी रहेगा। इसके साथ ही सभी जलस्रोतों का संरक्षण, सौंदर्यीकरण और पुनरुद्धार सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इन प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सके।
स्थानीय लोगों ने नगर निगम की इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए इसे जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। नागरिकों का कहना है कि तालाब के पुनर्जीवित होने से क्षेत्र में जलस्तर में सुधार होगा और पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा। नगर निगम का लक्ष्य है कि शहर के सभी प्रमुख जलस्रोतों को संरक्षित कर वाराणसी को पर्यावरणीय रूप से अधिक सशक्त और जलसमृद्ध बनाया जाए।
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