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कोविड महामारी के दौरान मधुमेह रोगियों को इस पर सख्त नियंत्रण रखने की आवश्यकता: डॉ. जितेंद्र सिंह

केंद्रीयराज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मधुमेह के रोगियों को कोविड महामारी के दौरान अपने मधुमेह पर सख्त नियंत्रण रखने की आवश्यकता है। हैलो डायबिटीज एकेडमिया 2020 की एक डिजिटल संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के बावजूद, भारत में रोजमर्रा की कार्य-गतिविधियों और शिक्षा दोनों को ही सर्वश्रेष्ठ तरीके से संचालित किया जा रहा है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कोविड ने हमें प्रतिकूल परिस्थितियों में नए मानकों की खोज करने के लिए प्रेरित किया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मधुमेह से पीड़ित लोगों में एक इम्युनो-युक्त स्थिति होती है, जो उनकी प्रतिरोधक क्षमता को कम करने और उन्हें कोरोना जैसे संक्रमणों के साथ-साथ परिणामी जटिलताओं के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है। उन्होंने कहा कि ऐसे रोगियों के लिए स्थिति तब और भी जटिल होती है जब वह मधुमेह के कारण गुर्दे से संबंधित बीमारी अथवा गंभीर डायबिटिक-नेफ्रोपैथी से भी ग्रस्त हों। डॉ. सिंह ने कहा कि इस तरह की स्थिति में, मधुमेह चिकित्सकों की अपने रोगियों को संक्रमण से बचाने के लिए उनके रक्त में शर्करा के स्तर पर कड़ाई से नियंत्रण रखने और साथ ही उन्हें इसके संबंध में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जानकारी देने की एक विशेष जिम्मेदारी बन जाती है।

उन्होंने कहा कि भले ही अन्य देशों की तुलना में भारत में कोविड से संबंधित मृत्यु दर कम रही हो, किन्तु यहां हुई अधिकतर मृत्यु उन कोरोना पॉजिटिव रोगियों की हुई, जो रोगी पहले से ही मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों के साथ सहरूग्णता से पीड़ित थे। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कोविड महामारी खत्म होने के बाद भी, सामाजिक दूरी और फैलने वाले संक्रमण से बचाव के उपाय अन्य कई संक्रमणों के खिलाफ सुरक्षाकवच के रूप में काम करेंगे। केंद्रीय मंत्री ने चेन्नई के प्रमुख चिकित्सक डॉ. वी. सेशैया, पुडुचेरी के डॉ. ए.के.दास, मुंबई के डॉ. शशांक जोशी, अहमदाबाद के डॉ. बंशी साबू, नागपुर के डॉ. सुनील गुप्ता एवं डॉ. कविता गुप्ता और आयोजकों की पूरी टीम को इस महत्वपूर्ण विषय पर विचार-विमर्श करने के लिए सर्वश्रेष्ठ सलाहकारों को एक मंच पर लाने के लिए सराहना की।

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