
वाराणसी । सर्वाइकल कैंसर का अब दो मिनट की जांच में पता चल जायेगा। गर्भाशय का मुख एचपीवी से संक्रमित है या नहीं इसकी जांच वीआईए विधि से मात्र दो मिनट में होती है। संक्रमण का पता चलते ही उसी समय गर्भाशय के मुख की ठंडी सिकाई (क्रायोथैरेपी) की जाती है, जिससे संक्रमण के साथ ही सर्वाइकल कैंसर का खतरा खत्म हो जाता है। इस उपचार के लिए मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत भी नहीं होती। जांच व थैरेपी में लगे 20 मिनट से भी कम समय के बाद वह घर जा सकता है।
पं. दीन दयाल चिकित्सालय में स्थित ‘सम्पूर्णा क्लीनिक’ की प्रभारी डा. जाह्नवी सिंह बताती है कि गर्भाशय के मुख का कैंसर ह्यूमन पैपीलोमा वायरस (एचपीवी) के कारण होता है। शारीरिक सम्पर्क के दौरान यह वायरस गर्भाशय के मुख तक पहुंच जाता है और उसे धीरे-धीरे संक्रमित करना शुरू कर देता है। खास बात यह है कि गर्भाशय के मुख में एचपीवी से हुए संक्रमण को कैंसर में तब्दील होने में सामान्यतः दस से बीस वर्ष या इससे अधिक का समय लग जाता है। ऐसे में अगर समय रहते जांच कराकर संक्रमण का उपचार करा लिया जाए तो बच्चेदानी के मुंख के कैंसर से पूरी तरह बचा जा सकता है।
उन्होंने बताया कि 30 से 60 वर्ष तक की महिलाओं को समय-समय पर जांच अवश्य करानी चाहिए, ताकि उन्हें एचपीवी संक्रमण है तो उपचार कर उसे फौरन खत्म किया जा सके। डॉ जाह्नवी ने बताया कि रोग की निःशुल्क जांच व उपचार की सुविधा पं.दीन दयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय के एमसीएच विंग में बने ‘सम्पूर्णा क्लीनिक’ में उपलब्ध है। महिलाओं को इसका लाभ उठाना चाहिए। इसके अलावा अन्य सरकारी अस्पतालों में भी यह जांच करायी जा सकती है।
छह माह में 86 रोगियों को प्री कैंसर-कैंसर के खतरे से किया दूर
डा. जाह्नवी बताती हैं कि इस वर्ष अब तक 2206 महिलाओं की वीआईए जांच की गयी । इनमें संक्रमित 86 महिलाओं की क्रयोथैरेपी कर उन्हें सर्वाइकल कैंसर होने के खतरे से दूर कर दिया गया। जबकि चार केस ऐसे जिन्हें यह कैंसर हो चुका था, उन्हें उपचार के लिए उच्च संस्थानों में रेफर कर दिया गया।
सर्वाइकल कैंसर के लक्षण-
•मैनोपोज के बाद भी ब्लीडिंग
•पीरियड खत्म होने के बाद भी रक्तस्राव
•यौन सम्बन्ध के बाद रक्तस्राव
(हि.स.)



