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राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव: रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र बने CEO, महेश भागचंदका समेत 3 नये न्यासी नियुक्त

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया। महेश भागचंदका, मदन मोहन पांडे और डॉ. निर्मला यादव को नया न्यासी बनाया गया। भागचंदका को कोषाध्यक्ष और स्वामी गोविंददेव गिरि को महासचिव की जिम्मेदारी मिली। बैठक में तकनीक आधारित चढ़ावा गणना और वित्त वर्ष 2025-26 के वार्षिक लेखों को भी मंजूरी दी गयी।

  • पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र बने राम मंदिर के सीईओ, गोविंददेव गिरि को महासचिव का दायित्व

अयोध्या : श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की महत्वपूर्ण बैठक बुधवार को अयोध्या में संपन्न हुई, जिसमें ट्रस्ट के तीन रिक्त पदों पर नये न्यासियों की नियुक्ति के साथ ही मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के चयन को मंजूरी दी गयी। चयन समिति की अनुशंसा के बाद सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को ट्रस्ट का मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया है।सीईओ के चयन के लिए गठित समिति के समक्ष करीब पांच हजार आवेदन आये थे। आवेदनों की जांच और साक्षात्कार की प्रक्रिया के बाद समिति ने तीन नाम तय किये थे।

ट्रस्ट की बैठक में विचार-विमर्श के बाद श्री मिश्र को मुख्य कार्यकारी अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय लिया गया।देवरिया निवासी जितेंद्र मिश्र भारतीय वायुसेना में करीब 39 वर्ष तक विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। सैन्य एवं प्रशासनिक क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी दी गयी है। उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से भी सम्मानित किया जा चुका है। वह ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पश्चिमी कमान का नेतृत्व कर चुके हैं।मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में श्री मिश्र मंदिर की रोजमर्रा की प्रशासनिक व्यवस्थाओं, सुरक्षा, श्रद्धालुओं की सुविधाओं तथा ट्रस्ट से जुड़े विभिन्न कार्यों के समन्वय और क्रियान्वयन की निगरानी करेंगे।

बैठक में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तीन रिक्त पदों को भरने का भी निर्णय लिया गया। महेश भागचंदका, मदन मोहन पांडे और डॉ. निर्मला यादव को नया न्यासी नियुक्त किया गया है। महेश भागचंदका व्यवसायी और समाजसेवी हैं। वह ‘हिन्दुत्व के पुरोधा’ पुस्तक के लेखक हैं। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के भूमिपूजन और प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में वह यजमान की भूमिका में शामिल रहे हैं। इसके अलावा श्रीराम वन गमन यात्रा से जुड़े 292 तीर्थस्थलों पर श्रीराम स्तंभ की स्थापना के कार्य से भी उनका संबंध रहा है।मदन मोहन पांडे अयोध्या छावनी के अधिवक्ता हैं। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर मामले में वर्ष 1990 से 2019 तक उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में पैरवी की। वह उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त महाधिवक्ता के पद पर भी छह वर्ष तक कार्य कर चुके हैं। डॉ. निर्मला यादव परास्नातक और पीएचडी हैं। वह 19 वर्ष तक महाविद्यालय की प्राचार्य रही हैं। इसके अलावा उन्होंने विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की सदस्य के रूप में 15 वर्ष तक कार्य किया है।

बैठक में ट्रस्ट के पदाधिकारियों के दायित्वों में भी बदलाव किया गया। इसके तहत स्वामी गोविंददेव गिरि को महासचिव बनाया गया है, जबकि महेश भागचंदका को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गयी है। मंदिर में आने वाले नकद चढ़ावे की गणना प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाने पर भी बैठक में विशेष जोर दिया गया। नकदी की गणना में मानवीय हस्तक्षेप कम करने के लिए दो बैंकों और आईआईटी की ओर से प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। ट्रस्ट इन प्रस्तावों का मूल्यांकन कर तकनीकी व्यवस्था लागू करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।ट्रस्ट के अनुसार, इसका उद्देश्य नकद चढ़ावे की गणना और उसके प्रबंधन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है।

बैठक में वित्त वर्ष 2025-26 के वार्षिक लेखों को भी मंजूरी दी गयी। प्रस्तुत विवरण के अनुसार इस अवधि में ट्रस्ट की कुल आय 237 करोड़ रुपये रही, जबकि 91 करोड़ रुपये का व्यय दर्ज किया गया। इसके अलावा निर्माण आदि कार्यों पर 425 करोड़ रुपये खर्च किये गये।वार्षिक लेखों के अनुसार 31 मार्च 2026 को ट्रस्ट के पास कुल उपलब्ध राशि 1,882 करोड़ रुपये थी। बैठक में वार्षिक लेखों का अनुमोदन कर दिया गया।

श्रीराम जन्म भूमि तीर्थक्षेत्र न्यास में दिल्ली के समाजसेवी, व्यवसायी महेश भागचंदका समेत तीन नये सदस्य नियुक्त

श्रीराम जन्म भूमि तीर्थक्षेत्र न्यास ने यहां बुधवार को हुई बैठक में तीन नये न्यासियों की नियुक्ति की जिसमें हिंदू संस्कृति और विरासत के संरक्षण संवर्धन के काम से जुड़े दिल्ली के 68 वर्षीय व्यवसायी, लेखक और समाजसेवी महेश भागचंदका भी शामिल हैं। उन्हें न्यास के कोषाध्यक्ष का दायित्व दिया गया है।नये सदस्यों में अयोध्या निवासी अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय और शिक्षाविद् तथा डिग्री कॉलेज की पूर्व प्राचार्या डॉ. निर्मला यादव भी शामिल हैं।

श्री भागचंदका का राम मंदिर निर्माण निर्माण के कुछ महत्वपूर्ण पड़ावों से जुड़े रहा हैं। वह सपत्नीक 22 जनवरी 2024 को नव निर्मित राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में यजमान के रूप में शामिल हुए थे और उस ऐतिहासिक समारोह के प्रारंभिक धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लिया था। वह व्यावसाय, सामाजिक सेवा और सांस्कृतिक क्षेत्र में अपने लम्बे अनुभव के साथ न्यास में आये हैं और उनकी नियुक्ति राम जन्मभूमि मंदिर आंदोलन की कड़ियों और मंदिर प्रशासन के अगले चरण की व्यवस्थाओं के बीच निरंतरता को दर्शाती है।

एक विज्ञप्ति के अनुसार स्नातक भागचंदका कई दशकों से समाजसेवा और हिंदू धर्म की विरासतों के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में लगे हैं। उन्होंने भगवान राम की वन यात्रा से जुड़े 292 तीर्थ स्थलों पर श्री राम स्तंभ स्थापित कराने में सहयोग किया है, जिससे अयोध्या से बाहर भी मंदिर की सांस्कृतिक पहुंच का विस्तार हुआ है। वह वर्ल्ड हिंदू इकोनॉमिक फोरम की कार्यकारी समिति के सदस्य भी हैं।श्री भागचंदका विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के तेज तर्रार नेता और राम मंदिर आंदोलन के नेतृत्वकर्ता दिवंगत अशोक सिंघल के निकट के संबंधी हैं। उन्होंने भागचंदका ने “पुरोधा ऑफ हिंदुत्वा” नामक पुस्तक लिखी है, जिसमें स्वर्गीय सिंघल के जीवन और उनकी विरासत का वर्णन किया गया है।

श्री भागचंदका अशोक सिंघल फाउंडेशन के संस्थापक ट्रस्टी हैं। यह संस्था स्वर्गीय सिंघल के कार्यों को आगे बढ़ाने और व्यापक सांस्कृतिक पहलों को समर्थन देने के लिए काम करती है। अशोक सिंघल फाउंडेशन ने राममंदिर के शिलान्यास के अवसर पर स्मृति सामग्री वितरित की थी। इसमें अशोक सिंघल की जीवनी, श्री राम स्तंभ से संबंधित एक पुस्तिका तथा भगवान राम को समर्पित एक चांदी का सिक्का शामिल था।न्यास के नये सदस्य विधिवेत्ता मदन मोहन पांडेय (74) अयोध्या के हैं और अयोध्या विवाद की कानूनी लड़ाई में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वह छह वर्ष तक उत्तर प्रदेश सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता रहे हैं ।

उन्होंने 1990 से 2019 तक राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद से संबंधित ऐतिहासिक कानूनी लड़ाई में रामलला विराजमान की ओर से पैरवी की थी।नयी महिला न्यासी डॉ. निर्मला यादव (66) उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के शिकोहाबाद की हैं। उन्होंने हिंदी और संस्कृत में मास्टर डिग्री प्राप्त की है और विश्वविद्यालय स्तर पर अध्यापन का 15 वर्षों का अनुभव रखती हैं। वह सामाजिक सेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय रही हैं। उन्होंने शिकोहाबाद में बीडीएम डिग्री कॉलेज, एमजी डिग्री कॉलेज प्राचार्या के के रूप में सेवाएं दी हैं।(वार्ता)

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