
दिवाली से पहले ग्रहों का बड़ा खेल! सूर्य-मंगल का मिलन खोलेगा तुला समेत चार राशियों की तकदीर
17 अक्टूबर से 27 अक्टूबर तक तुला राशि में बनेगा सूर्य-मंगल का “आदित्य-मंगल योग” - दिवाली से पहले आसमान में बन रहा है दुर्लभ संगम, ज्योतिष के अनुसार मेष, वृषभ, तुला और धनु राशि वालों के लिए शुभ संकेत।
- जब आकाश में बदलता है समीकरण, तब धरती पर महसूस होती है हलचल
दिवाली से पहले का समय भारतीय परंपरा में केवल रोशनी और खुशियों का नहीं होता, बल्कि यह वह काल होता है जब लोग अपने जीवन, घर और मन – तीनों को नए आरंभ के लिए तैयार करते हैं। इस बार, 2025 की दिवाली (20 अक्टूबर) से ठीक पहले, आकाश में एक विशेष ग्रह-संयोग बनने जा रहा है, जिसे ज्योतिषाचार्य “सूर्य-मंगल युति*” या “आदित्य-मंगल योग” कह रहे हैं।
यह युति 17 अक्टूबर से 27 अक्टूबर 2025 तक रहेगी, जब सूर्य और मंगल दोनों तुला राशि में रहेंगे। वैदिक ज्योतिष में सूर्य को राजा और मंगल को सेनापति कहा गया है – यानी सत्ता और शक्ति का संगम। यही कारण है कि इस ग्रह-मिलन को कई पंडित “ऊर्जा और निर्णय-शक्ति का योग” बता रहे हैं।
कहा जा रहा है कि यह समय मेष, वृषभ, तुला और धनु राशि वालों के लिए अत्यंत शुभ रहेगा। कुछ इसे “दिवाली से पहले भाग्य खुलने का योग” बता रहे हैं। लेकिन सवाल यह भी उठता है – क्या यह दावा सिर्फ प्रचार है, या इसमें वास्तविक खगोलीय और ज्योतिषीय आधार है?
सूर्य और मंगल – दो अग्नि तत्वों का मिलन
वैदिक दृष्टि से सूर्य और मंगल दोनों ही “अग्नि-तत्व” ग्रह हैं। सूर्य प्रकाश, ऊर्जा, आत्मविश्वास और नेतृत्व का प्रतीक है, जबकि मंगल साहस, शक्ति, उत्साह और निर्णय-क्षमता का द्योतक है। जब ये दोनों एक राशि में आते हैं, तो वैदिक ज्योतिष में इसे सूर्य-मंगल युति (Sun-Mars Conjunction) कहा जाता है। यह युति दो विपरीत दिशाओं की शक्तियों का संगम होती है -जहाँ सूर्य शांति और धैर्य देता है, वहीं मंगल गति और आवेग का परिचायक है। इसलिए यह योग हमेशा “ऊर्जा का विस्फोट” मानी जाती है – किसी भी कार्य में तेजी, सफलता, और कभी-कभी उतावलापन भी बढ़ जाता है।
खगोलीय दृष्टि से – यह घटना वास्तविक है, कल्पना नहीं
अक्सर सोशल मीडिया या न्यूज़ पोर्टल्स पर ग्रह-योगों को बढ़ा-चढ़ाकर बताया जाता है। लेकिन इस बार जो कहा जा रहा है – “17 अक्टूबर से सूर्य और मंगल तुला राशि में साथ रहेंगे” – वह खगोलीय रूप से सत्य है।सूर्य हर वर्ष 17 अक्टूबर से 16 नवंबर तक तुला राशि में प्रवेश करता है। मंगल 13 अक्टूबर 2025 को तुला राशि में प्रवेश करेगा।इस प्रकार 17 से 27 अक्टूबर 2025 तक दोनों ग्रह तुला राशि में रहेंगे।इस अवधि में दोनों ग्रहों का आपसी कोणीय अंतर (angular distance) 10° से भी कम होगा, जिसे खगोल शास्त्र में “युति” कहा जाता है। यानी -यह कोई कल्पना नहीं, बल्कि एक वास्तविक खगोलीय घटना है।*
क्या यह “18 साल बाद” बन रहा योग है?
कई वेबसाइटों और न्यूज़ चैनलों ने लिखा -“18 साल बाद सूर्य और मंगल का तुला राशि में मिलन होगा।” यह दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है।
वास्तविकता:
सूर्य-मंगल की युति लगभग हर 2 साल में होती है, क्योंकि मंगल की सूर्य से एक परिक्रमा अवधि ~687 दिन की है।सूर्य और मंगल कभी कन्या, कभी तुला, कभी वृश्चिक राशि में मिलते रहते हैं।तुला राशि में यह युति लगभग हर 8–10 वर्ष में बनती है – ना कि 18 साल बाद।यानी – यह घटना महत्वपूर्ण तो है, पर दुर्लभ नहीं। हाँ, इस बार इसकी विशेषता यह है कि यह दिवाली से ठीक पहले बन रही है, जिससे इसका सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व बढ़ गया है।
तुला राशि में युति – संतुलन और शक्ति का मेल
तुला राशि का स्वामी शुक्र है – जो प्रेम, सुंदरता, और संतुलन का प्रतीक है। जब सूर्य और मंगल जैसे दो अग्नि ग्रह इसमें आते हैं, तो यह भावनात्मक और ऊर्जा दोनों स्तरों पर गहरी हलचल पैदा करता है।ज्योतिष के अनुसार: यह समय निर्णय-शक्ति, साहस और करियर में नई शुरुआत का संकेत देता है।लेकिन साथ ही आवेग और क्रोध से बचना जरूरी बताया गया है।जिन लोगों की कुंडली में सूर्य या मंगल पहले से मज़बूत हैं, उन्हें सफलता के नए अवसर मिल सकते हैं।
मेष राशि – मंगल का अपना घर, नेतृत्व में उछाल
मेष राशि के जातकों के लिए यह युति विशेष शुभ मानी जा रही है। क्योंकि मंगल स्वयं इस राशि का स्वामी ग्रह है। सूर्य के साथ उसका मेल राजकीय लाभ, करियर ग्रोथ, और सम्मान में वृद्धि करा सकता है। नई जिम्मेदारियाँ या नेतृत्व की भूमिका मिल सकती है। निवेश या बिज़नेस में लाभ संभव है। शारीरिक ऊर्जा बहुत अधिक रहेगी – इसलिए ध्यान रखें कि जल्दबाजी में कोई निर्णय न लें। “यह समय नेतृत्व और उपलब्धियों का है – बस क्रोध और आवेग पर नियंत्रण रखें।”
वृषभ राशि – धन और निवेश में अवसर
वृषभ राशि के लिए यह अवधि आर्थिक दृष्टि से अनुकूल बताई जा रही है। सूर्य-मंगल का यह योग आपके धनभाव को सशक्त करता है।रुका हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना।नौकरी बदलने या प्रमोशन का अवसर।
पारिवारिक मामलों में निर्णय आपके पक्ष में हो सकते हैं।खर्च बढ़ सकता है, इसलिए योजनाबद्ध खर्च करना बेहतर रहेगा।
तुला राशि – भाग्य के द्वार खुलने का समय
इस बार सूर्य और मंगल दोनों तुला राशि में रहेंगे – यानी युति उसी राशि में होगी।आत्मविश्वास में वृद्धि।सम्मान, प्रतिष्ठा और पहचान बढ़ने की संभावना।पुराने मतभेद सुलझ सकते हैं।दांपत्य जीवन में सामंजस्य बढ़ेगा, पर कभी-कभी वाणी में कठोरता से बचना होगा।“यह समय आत्म-सुधार और नई शुरुआत का है।”
धनु राशि – भाग्य और यात्रा के संकेत
धनु राशि वालों के लिए यह युति भाग्य और नई दिशा का समय लेकर आ सकती है।विदेश या लंबी यात्रा के योग बन सकते हैं।नौकरी या शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा अवसर।परिवार में प्रसन्नता और शुभ समाचार की संभावना।
अत्यधिक आत्मविश्वास से बचें – निर्णय सोच-समझकर लें।
जिन राशियों को सतर्क रहना चाहिए
ज्योतिषीय दृष्टि से, कर्क, कन्या और मकर राशि वालों को इस समय थोड़ा संयम रखना चाहिए।मानसिक दबाव या कार्यभार बढ़ सकता है।पारिवारिक विवाद या गलतफहमियों से बचें।स्वास्थ्य का ध्यान रखें, विशेषकर रक्तचाप और आँखों से जुड़ी समस्याएँ।
विशेषज्ञों की राय – “यह ऊर्जा का समय है, पर संयम जरूरी है” ज्योतिषाचार्य कहते हैं -“सूर्य-मंगल की युति जहाँ साहस और निर्णय शक्ति देती है, वहीं अहंकार भी बढ़ा सकती है। इसलिए यह समय बहुत ऊर्जावान जरूर है, लेकिन उतना ही संतुलन भी मांगता है।”“तुला राशि में यह युति दिवाली के ठीक पहले बनना खास है। इसका असर सामूहिक चेतना पर भी होगा – लोगों में नए कार्यों की शुरुआत, व्यवसाय विस्तार और आर्थिक सुधार की लहर देखी जा सकती है।”
दिवाली से जुड़ाव – रोशनी से पहले प्रकाश की आहट
भारत की संस्कृति में ग्रह-नक्षत्रों और त्योहारों का गहरा संबंध है। दिवाली स्वयं “प्रकाश के आगमन” का पर्व है। इससे पहले सूर्य-मंगल का मिलन “ऊर्जा और प्रकाश” के दो प्रतीकों का संगम बनता है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि – “यह दिवाली केवल दीपों की नहीं, बल्कि आत्म-प्रकाश की दिवाली होगी।”
आस्था बनाम तर्क – ग्रहों से प्रेरणा लेने का अर्थ
वैज्ञानिक दृष्टि से ग्रहों की स्थिति हमारे निर्णय या भविष्य को प्रभावित नहीं करती।लेकिन मानव चेतना पर प्रतीकात्मक प्रभाव – यानी विश्वास, आत्म-नियंत्रण और उम्मीद – अवश्य डालती है। इसलिए यह मानना गलत नहीं कि – “ग्रह हमारे भीतर की दिशा दिखाते हैं, न कि भविष्य की गारंटी।” इस युति को अगर आस्था के साथ विवेक से जोड़ा जाए, तो यह अपने-आप में जीवन में एक नया संतुलन और ऊर्जा लाने वाला समय हो सकता है।
रोशनी के इस पर्व से पहले, भीतर की अग्नि को पहचानें
दिवाली से पहले तुला राशि में सूर्य और मंगल का यह मिलन केवल ग्रहों की स्थिति नहीं, बल्कि ऊर्जा और संतुलन का संदेश है। यह हमें याद दिलाता है कि प्रकाश केवल दीपों से नहीं, आत्मबल और संयम से आता है।जो उत्साह में संतुलन रखेगा, वही लाभ पाएगा। जो आवेग में निर्णय लेगा, उसे ठहराव की ज़रूरत पड़ेगी। और जो अपने भीतर की ऊर्जा को सही दिशा देगा – वही वास्तव में “दीपावली” का अर्थ समझेगा।
डिस्क्लेमर:इस रिपोर्ट और चित्र में दर्शाई गई ग्रह-स्थितियाँ एवं ज्योतिषीय विश्लेषण पारंपरिक वैदिक ज्योतिष के सिद्धांतों पर आधारित हैं।इनका उद्देश्य केवल सांस्कृतिक, धार्मिक एवं जानकारी के रूप में पाठकों को अवगत कराना है।यह किसी व्यक्ति विशेष की कुंडली या जीवन-निर्णयों से संबंधित भविष्यवाणी नहीं है। CMG TIMES इस विषय पर किसी प्रकार के आर्थिक, सामाजिक या व्यक्तिगत निर्णय हेतु पाठकों को सलाह नहीं देता।ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति एवं प्रभावों की व्याख्या आस्था और परंपरा का विषय है, जिसका वैज्ञानिक प्रमाण आवश्यक रूप से उपलब्ध नहीं है।
कार्तिक मास (8 अक्टूबर–5 नवम्बर 2025) – प्रमुख व्रत व त्योहार
* 8 अक्टूबर (बुध): कार्तिक मास स्नान
* 10 अक्टूबर (शुक्र): करवाचौथ
* 17 अक्टूबर (शुक्र): रमा एकादशी व्रत
* 18 अक्टूबर (शनि): प्रदोष व्रत, धन्वंतरी जयंती
* 19 अक्टूबर (रवि): हनुमान जयंती (कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी)
* 20 अक्टूबर (सोम): दीपावली (अमावस्या)
* 22 अक्टूबर (बुध): गोवर्धन पूजा, अन्नकूट
* 23 अक्टूबर (गुरु): भैयादूज, चित्रगुप्त पूजन
* 25 अक्टूबर (शनि): सूर्यषष्ठी/छठ की शुरुआत
* 27 अक्टूबर (सोम): छठ व्रत (संध्या अर्घ्य)
* 28 अक्टूबर (मंगल): छठ व्रत पारण (प्रातः अर्घ्य)
* 30 अक्टूबर (गुरु): अन्नपूर्णा अष्टमी, दुग्धाष्टमी और गोपाष्टमी
* 2 नवम्बर (रवि): देव प्रबोधिनी एकादशी
* 5 नवम्बर (बुध): कार्तिक पूर्णिमा, देव दीपावली
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