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सुरक्षित मातृत्व: पंजीकरण से प्रसव तक सतर्क रहें गर्भवती

समय से चेकअप कराएं, गर्भावस्था के दौरान लेती रहें पौष्टिक आहार

महराजगंज। सुरक्षित मातृत्व के लिए गर्भवती को पंजीकरण से लेकर प्रसव तक विशेष सतर्कता और जागरूकता की जरूरत है। गर्भावस्था के दौरान दौरान गर्भवती को चार एएनसी जांच के साथ-साथ पौष्टिक आहार भी लेते रहना चाहिए। यह कहना है जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सक डाॅ.एवी त्रिपाठी का। उन्होंने बताया कि गर्भवती होने का पता चलते ही सबसे पहले नजदीक के स्वास्थ्य केन्द्र पर अपना पंजीकरण करा लेना चाहिए। गर्भवती महिला को चार प्रसव पूर्व ( एएनसी) जांच बहुत जरूरी है। गर्भवती की प्रसव पूर्व जांच पीएमएसएमए दिवस, ग्राम स्वास्थ्य पोषण एवं स्वच्छता दिवस तथा सरकारी अस्पतालों पर निःशुल्क जांच होती है। प्रत्येक माह की 9 तारीख को हर सीएचसी, पीएचसी और जिला अस्पताल में पीएमएसएमए दिवस मनाया जाता है ।

हर प्रसव पूर्व जांच में खून व पेशाब की जांच, रक्तचाप, वजन और पेट की भी जांच कराना आवश्यक है। गर्भवती को यह भी ध्यान देना है कि वह आयरन फोलिक एसिड गोली का सेवन जरूर कर लें तथा टिटनेस डिप्थिरिया ( टीडी) के टीके जरूर लगवा ले। गर्भावस्था के दौरान गर्भवती को दिन में अतिरिक्त भोजन खाना जरूरी है। दूध और दही, पनीर, ताजा मौसमी फल और सब्जियां इस्तेमाल करें।इनसे विटामिन और खनिज मिलते हैं। हरा साग लौह तत्व और फोलिक एसिड से भरपूर रहता है। मांसाहारी गर्भवती मांस, अंडा, मुर्गा, मछली का भी सेवन कर सकती हैं। गर्भवती बाएं करवट लेटे क्योंकि इससे गर्भस्थ शिशु को खून की आपूर्ति बढ़ जाती है। भारी सामान उठाने व कड़ी मेहनत करने से बचें।

कब कब कराएं जांच

पहली जांच-माहवारी छूटते ही या माहवारी छूटने के पहले तीन महीने के अंदर
दूसरी जांच-गर्भावस्था के चौथे या छठें महीने में
तीसरी जांच- गर्भावस्था के सातवें या आठवें महीने में
चौथी जांच- गर्भावस्था के नवें महीने में

गर्भवती को मिले पारिवारिक सहयोग भी

-परिवार का व्यवहार खुशहाल
और उत्साहवर्धक हो।
– पौष्टिक आहार मिले, समय से अस्पताल ले जाएं
-प्रसव पीड़ा शुरू होने या कोई जटिलता होने पर तत्काल स्वास्थ्य केन्द्र से संपर्क करें।
– पर्याप्त धन, वाहन व खून देने वाले व्यक्ति की पहचान कर लें।

प्रसव पश्चात सावधानी:

-प्रसव के बाद 48 घंटे तक अस्पताल में रहें। कारण कि माँ और नवजात शिशु में ज्यादातर जटिलता उसी बीच होती है।
-नवजात शिशु को पहले पोलियो की खुराक, तथा हेपेटाइटिस बी और बीसीजी के टीके लगवा लेनी चाहिए।
-बच्चे को स्वस्थ रखने के लिए कंगारू मदर केयर देना ( केएमसी) जरूरी है।
-अगर माँ और शिशु को कोई दिक्कत हो तो चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
-जन्म के बाद बच्चे को मां का गाढ़ा पीला दूध अवश्य पिलाएं।

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