23 अगस्त को बाबा गणिनाथ जन्मोत्सव – भक्तों से छप्पन भोग के रूप में प्रसाद लाने की अपील
गणिनाथ चेतना और परंपरा के पुनरुद्धार का संकल्प, आरती-चालीसा पाठ और सामूहिक भोग का आयोजन
वाराणसी । मध्यदेशीय कान्दू समाज सहित देश-विदेश में फैले बाबा गणिनाथ भक्तों के लिए आगामी 23 अगस्त का दिन विशेष महत्व रखता है। बिहार में बाबा की जन्मभूमि पलवैया धाम पर इस बार पहली बार बिहार सरकार की ओर से राजकीय स्तर पर तीन दिवसीय जन्मोत्सव मेला भी आयोजित किया जा रहा है। बाबा गणिनाथ भक्त मण्डल के पदाधिकारियों ने सभी भक्तों से भावनात्मक अपील की है कि वे अपने-अपने घरों में बना हुआ प्रसाद मंदिर में लेकर आयें।
अपील में कहा गया है कि यदि प्रत्येक परिवार से एक व्यंजन लाया जाए तो बाबा को छप्पन भोग अर्पित कर परंपरा को जीवंत किया जा सकेगा। भक्त मण्डल के राष्ट्रीय संरक्षक राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने कहा कि परिवार की उन्नति, सुख-समृद्धि और जीवन की स्थिरता बाबा गणिनाथ जी की कृपा से संभव है। अब समय है कि समाज परंपराओं से फिर से जुड़े और सामूहिक भक्ति में भागीदारी करे।
छप्पन भोग और भक्ति का महत्व
* छप्पन भोग – अनेक व्यंजनों का अर्पण – आभार और कृतज्ञता की सर्वोच्च अभिव्यक्ति।
* सामूहिक प्रसाद परंपरा, मेल-जोल और सहयोग की भावना को जीवित रखती है।
* आरती और दीप प्रज्वलन – अंधकार से प्रकाश की ओर यात्रा और प्रभु की उपस्थिति का स्मरण।
* चालीसा व चालित का पाठ – भक्ति, एकाग्रता और संत परंपरा से जुड़ाव का साधन।
भक्त मण्डल के राष्ट्रीय संरक्षक राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने कहा कि परिवार की उन्नति, सुख-समृद्धि और जीवन की स्थिरता बाबा गणिनाथ जी की कृपा से संभव है। अब समय है कि समाज फिर से परंपराओं से जुड़े और भक्ति-भाव के इस उत्सव में सामूहिक रूप से भागीदारी करे।जन्मोत्सव के अवसर पर विशेष भोग, गणिनाथ चालीसा पाठ और आरती का आयोजन होगा। समिति ने भक्तों से अनुरोध किया है कि प्रसाद स्वच्छ ढके हुए बर्तनों में लाकर दें और यदि संभव हो तो बर्तनों पर परिवार का नाम व संपर्क अवश्य लिखें, ताकि व्यवस्था सुचारु ढंग से की जा सके।
भक्त मण्डल के राष्ट्रीय संरक्षक राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने यह भी कहा है कि छप्पन भोग केवल भोजन अर्पण की परंपरा नहीं, बल्कि यह भक्ति, सामूहिकता और समाज की साझा संस्कृति का प्रतीक है। इसी तरह आरती और चालीसा का पाठ श्रद्धालुओं में भक्ति, एकाग्रता और मनोबल को प्रबल करता है।मण्डल ने विशेष रूप से युवाओं और बच्चों से इस आयोजन में जुड़ने का आग्रह किया है, ताकि यह विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सके। इस अवसर पर वाराणसी के मुकीमगंज स्थित प्राचीन बाबा गणिनाथ मंदिर में सामूहिक पूजन का आयोजन होगा।संत शिरोमणि बाबा गणिनाथ मंदिर मंदिर समिति की ओर से सामूहिक पूजन और भव्य आरती का आयोजन किया जाएगा।
भक्त मण्डल का संदेश
भक्त मण्डल ने कहा कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि “गणिनाथ चेतना और सामाजिक संस्कृति के पुनरुद्धार” का माध्यम है। विशेष आग्रह किया गया है कि युवाओं और बच्चों को इस परंपरा से जोड़ें ताकि यह विरासत अक्षुण्ण बनी रहे।



