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कुष्ठ रोगी खोजी एवं नियमित निगरानी के लिए प्रशिक्षित की गयीं आशा कार्यकर्ता

प्रशिक्षण के दौरान रजिस्टर और प्रपत्र वितरित, भरने का तरीका बताया भी बताया गया

कुशीनगर। सक्रिय कुष्ठ रोगी खोजी तथा नियमित निगरानी के लिए आशा कार्यकर्ताओं को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हाटा पर शुक्रवार को प्रशिक्षित किया गया। डेटा भरने के लिए रजिस्टर और प्रपत्र वितरित किया गया। सभी को डेटा भरने का तरीका भी बताया गया। यह जानकारी देते हुए कुष्ठ रोग जिला परामर्शदाता डाॅ.विनोद कुमार मिश्र ने बताया कि विगत वर्षों में जनपद के जिन गाँवों में कुष्ठ रोगी मिले हैं,वहाँ पर आशा एवं उनके साथ सहयोगी की सहायता से सक्रिय कुष्ठ रोगी खोजी एवं नियमित निगरानी का कार्यक्रम चलाया जा रहा है।

कार्यक्रम में आशा कार्यकर्त्री एवं पुरुष सहयोगी द्वारा उनके क्षेत्र के दो वर्ष से ऊपर के सभी सदस्यों में कुष्ठ रोग की जांच की जानी है, जिससे समाज में छुपे हुए कुष्ठ रोगियों को शीघ्रातिशीघ्र ढूंढ कर उनका इलाज लिया जा सके। ताकि समाज कुष्ठ रोग मुक्त बन सके। डॉ.मिश्र ने आशा कार्यकर्ताओं को कुष्ठ रोग के बारे में संक्षिप्त जानकारी देते हुए बताया कि कुष्ठ एक रोग है जो माइक्रो बैक्टीरियम लेप्रे नामक जीवाणु द्वारा होता है। यह एमडीटी दवा से पूरी तरह ठीक हो जाता है। यह एक दूसरे को सिर्फ छूने या हाथ मिलाने से नहीं फैलता है। यदि किसी को कुष्ठ रोग के लक्षण दिखे तो तत्काल जांच कराकर दवा शुरू कर दें। यह दवा से ठीक हो जाता है। दवा न कराने से दिव्यांगता हो सकती है।

उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोग के बारे में अभी भी समाज में कुछ लोगों को अंधविश्वास है, यह पूर्णतया गलत जानकारी है। कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञ एसएन पांडेय ने कालाजार से बचाव के लिए भी लोगों को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी को लंबे समय से बुखार आ रहा हो।शरीर दुबला हो रहा हो। पेट बढ़ रहा हो उसे कालाजार की जांच जरूर करानी चाहिए। कालाजार बालू मक्खी के काटने से फैलता है। यह मक्खी नमी वाले स्थानों पर पायी जाती हैं। इस अवसर पर स्वास्थ्य निरीक्षक रामध्यान सिंह, एनएमएस विजय प्रताप सिंह प्रमुख तौर पर मौजूद रहे।

कुष्ठ रोग के लक्षणः

-चमड़ी बदरंग और चमड़ी में मोटापन हो।
-चमड़ी का दाग जिसमें सुन्नापन हो।
-दाग चकत्ता जिसमें पसीना न आता हो।
-हाथ पैर के नसों में मोटापन, सूजन तथा झनझनाहट हो।
-हाथ पैर की अंगूली में टेढ़ापन हो।
-हाथ तथा पैर के तलवों में सुन्नपन हो।
-घाव जो इलाज के बाद ठीक न होता हो।

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