81.35 करोड़ लोगों को पांच वर्ष तक निशुल्क अनाज को स्वीकृति
मंत्रिमंडल ने ‘ प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान ’को दी मंजूरी
नयी दिल्ली : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 11.80 लाख करोड़ रुपए के प्रावधान से 81. 35 करोड़ लोगों को अगले पांच वर्ष तक निशुल्क अनाज देने की प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) को स्वीकृति दी है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को यहां केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इससे आशय के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। इस योजना के विस्तार की घोषणा प्रधानमंत्री ने पिछले दिनों की थी। मूल रुप से यह योजना कोविड काल में आरंभ की गयी थी। नये रुप में यह योजना अगले वर्ष एक जनवरी से आरंभ होगी।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने बुधवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि यह एक ऐतिहासिक निर्णय है जो पीएमजीकेएवाई को दुनिया की सबसे बड़ी सामाजिक कल्याण योजनाओं में रखता है। इसका उद्देश्य पांच वर्ष की अवधि में 11.80 लाख करोड़ रुपए के प्रावधान से 81.35 करोड़ व्यक्तियों के लिए भोजन और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना है।पीएमजीकेएवाई के अंतर्गत निशुल्क खाद्यान्न (चावल, गेहूं और मोटा अनाज एवं बाजरा) खाद्य सुरक्षा को मजबूत करेगा और आबादी के गरीब और कमजोर वर्गों को मदद देगा।
मंत्रिमंडल ने ‘ प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान ’को दी मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 24,104 करोड़ रुपये के “प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम जनमन) ” को मंजूरी दी है।मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में में पारित प्रस्ताव के अनुसार इस 24104 करोड़ रुपये की राशि में केंद्रीय हिस्सेदारी: 15,336 करोड़ रुपये और राज्य हिस्सेदारी: 8,768 करोड़ रुपये तय की गयी है।इस अभियान की बजट भाषण 2023-24 में घोषणा की गयी थी।
मंत्रिमंडल के निर्णयों के बारे में बुधवार को दी गयी जानकारी के अनुसार देश भर में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) की सामाजिक-आर्थिक स्थितियों में सुधार के लिये, प्रधानमंत्री पीवीटीजी विकास मिशन शुरू किया जायेगा। यह पीवीटीजी परिवारों और बस्तियों को सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण तक बेहतर पहुंच, सड़क और दूरसंचार कनेक्टिविटी और स्थायी आजीविका के अवसरों जैसी बुनियादी सुविधायें मुहैया करायेगा।अनुसूचित जनजातियों के लिये विकास कार्य योजना (डीएपीएसटी) को अगले तीन वर्षों में मिशन मोड में लागू करने के उद्येश्य से 15,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि उपलब्ध करायी जायेगी।
गौरतलब है कि 2011 की जनगणना के अनुसार देश में अनुसूचित जनजाति की आबादी 10.45 करोड़ है। इसमें से 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश अंडमान-निकोबार द्वीप समूह स्थित 75 समुदायों को “ विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों” (पीवीटीजी) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इन पीवीटीजी को सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक क्षेत्रों मेंअसुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है।पीएम-जनमन (केंद्रीय क्षेत्र और केंद्र प्रायोजित योजनाओं को मिलाकर) जनजातीय मामलों के मंत्रालय सहित नौ मंत्रालयों के माध्यम से क्रियान्वित की जायेगी। (वार्ता)



