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अखिलेश और सुब्रत ने नामांकन कर किया जीत का दावा

कन्नौज : इत्र नगरी के रूप में विश्व विख्यात कन्नौज संसदीय सीट से गुरुवार को समाजवादी पार्टी(सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मौजूदा सांसद और प्रत्याशी सुब्रत पाठक ने अलग अलग अपना पर्चा दाखिल कर अपनी जीत का दावा किया।चौथे चरण के लिए 13 मई को होने वाले चुनाव के लिए नामांकन का आज आखिरी दिन श्री अखिलेश यादव ने दोपहर 12 बजे कन्नौज संसदीय सीट के लिए अपना नामांकन चार सेट में दाखिल किया । इस दौरान उनके साथ पार्टी के राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव, सपा जिलाध्यक्ष कलीम खान, पूर्व विधायक कल्याण सिंह दोहरे और पार्टी के प्रदेश सचिव आकाश शाक्य प्रस्तावक के रूप में मौजूद थे।इससे पहले इस सीट से सपा ने अखिलेश के भतीजे और मैनपुरी से पूर्व सांसद तेज प्रताप यादव को उम्मीदवार घोषित किया था। अब अखिलेश यादव के कन्नौज सीट से उतरने से मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।

सपा का प्रमुख गढ़ रही कन्नौज सीट पर भाजपा ने वर्तमान सांसद सुब्रत पाठक को ही उतारा हुआ है। पाठक ने 2019 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव को मामूली अंतर से हराया था।अखिलेश यादव इस सीट से पहले भी सांसद रहे चुके है। वे 2012 में उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने से पहले तीन बार कन्नौज से सांसद चुने गए । साल 2000 में अखिलेश की सियासी पारी का आगाज इसी कन्नौज सीट से हुआ था,अखिलेश ने पिता मुलायम सिंह के इस्तीफे के बाद खाली हुई इस सीट से उपचुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। जब अखिलेश यादव साल 2012 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो यह सीट खाली हो गई जिसके बाद उपचुनाव में अखिलेश की पत्नी डिंपल की सियासी पारी की शुरुआत हो गई. यहां तक 2014 में मोदी लहर के बावजूद डिंपल ने कन्नौज सीट पर जीत हासिल की थी।

2019 में सपा बसपा गठबंधन के बाद भी हुए चुनाव में डिंपल भाजपा के पाठक के मुकाबले मामूली अंतर से हार गई।2024 में अखिलेश के फिर मैदान में आने से कन्नौज में भाजपा और सपा के बीच कड़ा होने की उम्मीद है। नामांकन के बाद अखिलेश ने कहा कि कन्नौज को अब और आगे बढ़ाना है। कन्नौज के विकास और सम्मान के लिए, कन्नौज के विकास के लिए। कन्नौज का कारोबार न केवल भारत में बल्कि विश्व में है, जो विकास यहां का थम गया उसे जानकर रोका बीजेपी ने क्योंकि यह सपा का गढ़ था। बीजेपी के लोगों ने ना जाने कितनी बार यहां के लोगों को अपमानित किया है।

उन्होने कहा कि कन्नौज की जनता ने विकास होते हुए देखा है, पुराने लोग जिन्होंने लोहिया जी को चुना था वह जानते हैं नेताजी ने सिद्धांतो को आगे बढ़ाया। मुझे एक बार फिर यहां आने का सौभाग्य मिला है, मैं यहां के विकास के लिए काम करूंगा, इसका नाम और हो जाए इसके लिए काम करूंगा। यहां जो बिजली में काम हुआ वह सपा का काम है। नदियों पर जो पुल बने, केवल कन्नौज ही नहीं बाकी जगह भी सपा ने बनवाए। यहां हवाई पट्टी बनी थी केवल एक बार हवाई जहाज उतरा, बीजेपी की नकारात्मकता उससे साफ साफ देखी जा सकती है। आठ लेन गंगा का पुल बनवाया सपा ने, जहां से शुरू हुआ आखिर तक, सबसे पहले हमने बनवाया. जो मंडी बनी थी आज भी आधी अधूरी है, किसान बाजार सब बन पड़ा है।

उधर भाजपा प्रत्याशी सुब्रत पाठक ने अपनी जीत का दावा करते हुये कहा “ कन्नौज की जनता बाहरी लोगों पर भरोसा नहीं करने वाली, और उन्हें वापस घर भेजेगी।”अखिलेश यादव 2012 में उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने से पहले तीन बार कन्नौज से सांसद चुने गए। साल 2000 में अखिलेश की सियासी पारी का आगाज इसी कन्नौज सीट से हुआ था। 1998 से यह सीट समाजवादी पार्टी के खाते में ही जा रही थी, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अखिलेश यादव के इस किले में सेंध लगा दी। सुब्रत पाठक चुनाव जीते और इस बार भी वे चुनावी रण में ताल ठोक रहे हैं। 1967 में कन्नौज को लोकसभा का दर्जा मिला।

कांग्रेस की दिग्गज नेता शीला दीक्षित यहां से चुनाव लड़कर सांसद रह चुकी हैं। 1998 में समाजवादी पार्टी के प्रदीप यादव चुनाव जीते और उसके बाद यह साीट सपा की हो गई। 1999 में मुलायम सिंह यादव सांसद बने। 2004 और 2009 में अखिलेश यादव यहां से सांसद बने। 2014 में अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव ने यहां चुनाव जीता। 2019 में यह सीट भाजपा के खाते में चली गई। अब 2024 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव फिर कन्नौज से किस्मत आजमा रहे हैं।भाजपा सांसद सुब्रत पाठक ने कन्नौज में बिछी चुनावी बिसात को लेकर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि मुद्दा केवल मोदी है, चाहे अखिलेश यादव चुनाव लड़े या कोई और, जीत सिर्फ भाजपा की होगी। सपाइयों ने बड़े-बड़े बंगले बनाए और भाजपा ने केवल विकास कार्य किए।(वार्ता)

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