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कोरोना काल के बाद इस बार कान्हाजी के पोशाक बनाने का व्यापार में जबरदस्त मुनाफा

बाजारों में लड्डू गोपाल की पोशाक खरीदने वालों का जारी है क्रम

मथुरा । योगीराज श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर पूरे विश्व तैयारियों में जुटा हुआ है। हर ओर लड्डू गोपाल के आने का बेसब्री से इंतजार कर रह रहे है। इस बार मथुरा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 19 अगस्त को है, बाजारों में रंग बिरंगी पोशाकें खरीदने की होड़ सी लगी हुई है। ऐसा नहीं है कि बाजारों में सिर्फ मथुरावासी ही ठाकुरजी की पोशाक खरीद रहे है, अपितु विदेशों से आई डिमांड को भी यहां के दुकानदारों ने पूरा किया है। कान्हा जी की पोशाकों की बिक्री करने वाले दुकान स्वामियों ने बताया कि इस बार रूस, दुबई, कनाडा, पोलैंड, अमेरिका समेत 18 से ज्यादा देशों के ऑर्डर आए हैं।

बिजनेस 500 करोड़ तक पहुंचने के आसार हैं। सबसे बड़ी बात है कि विदेशों के बाजारों में मथुरा में बने ये कपड़े हाथों-हाथ बिकते हैं। यहां बनी पोशाकों की कीमत 10 रुपए से लेकर लाखों में होती है। भगवान की पोशाक बनाते समय मुस्लिम कारीगर उसकी पवित्रता का भी ध्यान रखते हैं।आपको ताज्जुब होगा कि मथुरा वृंदावन में मुस्लिम समुदाय से जुड़े लोगो सहित 20 हजार लोग कान्हा की पोशाक बनाने का काम करते है।

इनमें कारीगर, कच्चा सामान बेचने वाले और पोशाक व्यापारी शामिल हैं। वैसे तो साल भर पोशाक तैयार की जाती है। मगर, इस काम में जन्माष्टमी से 2 महीने पहले ज्यादा तेजी आ जाती है। इसका कारण है बड़े पैमाने पर मिलने वाले ऑर्डर। इसीलिए जन्माष्टमी से पहले इन दिनों मथुरा-वृंदावन में घर-घर में भगवान की पोशाक बनाने का काम किया जा रहा है। वहीं 19 अगस्त की जन्माष्टमी है, जिसको लेकर महिला कारीगर भी इस समय पोशाक के ऑर्डर पूरा करने के लिए 10 से 12 घंटे तक काम कर रही हैं। काफी भक्त तो मथुरा-वृंदावन पहुंच कर ही भगवान के लिए नई पोशाक खरीद रहे हैं। मगर, बड़ी संख्या उन ग्राहकों की भी है, जो किसी कारण यहां नहीं आ पाए हैं। ये भक्त चाहे देश में हों या विदेश में, अपने आराध्य के लिए नई पोशाक का ऑर्डर दे चुके हैं।

दो महीने पहले ही शुरू होता है पोशाक बनाने का काम

जन्माष्टमी पर भगवान की पोशाक से जुड़ा कारोबार 2 महीने पहले ही शुरू हो जाता है। इस काम में मथुरा-वृंदावन में करीब 20 हजार लोग जुड़े हैं। इनमें कारीगर, कच्चा सामान बेचने वाले और पोशाक व्यापारी शामिल हैं। इस कारोबार से जुड़े लोग 12 से 14 घंटे तक काम कर रहे हैं। पोशाक कारीगर दिन-रात एक कर ऑर्डर पूरा करने में लगे हैं। वहीं व्यापारी ऑर्डर को जन्माष्टमी से पहले ही भेजने में लगे हुए हैं।

अग्रवाल पोशाक उद्योग के मालिक जवाहर अग्रवाल ने बताया कि जन्माष्टमी से पहले बड़ी संख्या में ऑर्डर आते हैं। वह पोशाक का थोक में काम करते हैं। वह कहते हैं कि इन ऑर्डर को जन्माष्टमी से पहले ही पूरा कर दिया जाता है। जवाहर अग्रवाल के मुताबिक, जन्माष्टमी पर्व पर इस काम से करीब 500 करोड़ का कारोबार हो जाएगा। जन्माष्टमी पर भगवान की पोशाक लेने के लिए 2 साल बाद बड़ी संख्या में ऑर्डर आ रहे हैं। दो साल कोरोना के कारण विदेशों से तो ऑर्डर आए ही नहीं, देश से भी न के बराबर ऑर्डर मिले थे। मगर, इस बार देश के साथ विदेशों से भी ऑर्डर आ रहे हैं। इससे इस कारोबार को फायदा होने की उम्मीद है। पोशाक खरीदने आई पंजाब, दिल्ली, जयपुर, नोएडा, हरियाणा से मथुरा आईं।

बताया कि वह अपने भगवान के लिए पोशाक खरीदने आई हैं। दो साल कोरोना के कारण वह नहीं आ सकीं, लेकिन इस बार जन्माष्टमी अच्छे से सेलिब्रेट करेंगे। पोशाक व्यवसायी सुनील कुमार ने बताया कि भगवान के जन्म के बाद जब वासुदेव जी उनको सूप में रखकर गोकुल ले गए, तब शेषनाग ने छत्र बनाया था। उसी तरह से यह पोशाक बनाई गई है। जब भगवान इसे धारण करेंगे, तो शेषनाग छत्र के रूप में विराजमान नजर आएगा।(हि.स.)

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