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कॉयर बोर्ड आईआईटी-मद्रास में कॉयर पर अनुसंधान और विकास कार्य में जुटा

कॉयर बोर्ड ने कॉयर अनुप्रयोगों के लिए “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” स्थापित करने के लिए आईआईटी-मद्रास के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

नई दिल्ली । कॉयर बोर्ड ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-मद्रास के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए है, जो कि “सिर्फ नारियल के रेशों के अनुप्रयोगों को या अन्य प्राकृतिक तंतुओं के संयोजन के साथ “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” की स्थापना करने के लिए है।

एमएसएमई के केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के कहने पर आईआईटी-मद्रास ने कॉयर बोर्ड और भारत की अन्य एजेंसियों द्वारा कॉयर जियो-टेक्सटाइल्स (सीजीटी) पर किए गए अनुसंधान अध्ययनों को पहले ही मान्यता दे दी है और सिफारिश की है कि सीजीटी का उपयोग ढलानों/ तटबंधों, नदी तटबंधों, खान के ढेर वाले ढलानों का स्थिरीकरण आदि में मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए सफलतापूर्वक किया जा सकता है। संस्थान ने कम मात्रा वाली ग्रामीण सड़कों में सीजीटी का इस्तेमाल पुन: प्रवर्तन सामग्री के रूप में करने की भी सिफारिश की है।

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) का उद्देश्य आईआईटी मद्रास के विशेषज्ञों की टीम के सहयोग से नारियल के रेशे के क्षेत्र में अब तक किए गए शोध कार्यों को आगे बढ़ाना है। यह प्रासंगिक प्रौद्योगिकी के विकास में भी सहायता प्रदान करेगा और विशिष्ट परियोजनाओं के माध्यम से उत्पादन और प्रसंस्करण के लिए मानक भी विकसित करेगा तथा अनुसंधान परियोजनाओं और कॉयर बोर्ड के अनुसंधान संस्थानों/ प्रयोगशालाओं के प्रतिपालकों की निगरानी भी करेगा। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बौद्धिक संपदा अधिकार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण करने में भी सहायता प्रदान करेगा।

शुरुआत में दो वर्ष की अवधि के लिए, कॉयर बोर्ड सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना और संचालन के लिए 5 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करेगा। मशीनरी विकास और सड़क परियोजनाओं में आईआईटी-मद्रास की 10-इन-हाउस परियोजनाओं के अलावा, कॉयर उद्योग में अनुसंधान और विकास के 27 क्षेत्रों की पहचान की गई है, जिसकी शुरुआत इस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस द्वारा की जा सकती है।

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