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चलते भी हैं बार्नेकल्स

बार्नेकल्स मज़बूती से चिपकने के लिए जाने जाते हैं। ये आम तौर पर चट्टानी तटों या नावों/जहाज़ों के पेंदे पर चिपके दिखते हैं। लंबे समय से ऐसा माना जाता रहा है कि बार्नेकल्स ज़रा भी नहीं चलते, एक ही जगह स्थिर रहते हैं। लेकिन एक नए अध्ययन में इस बात की पुष्टि हुई है कि बार्नेकल्स की कम से कम एक प्रजाति, जो समुद्री कछुए की पीठ पर रहती है, वह कछुए की पीठ पर उस स्थान की ओर थोड़ा सरकते हैं जहां से से भोजन आसानी से पकड़ सकें।

चेलोनिबिया टेस्टुडिनेरिया मुख्यत: समुद्री कछुओं की पीठ पर रहते हैं, और कभी-कभी अन्य समुद्री जीवों जैसे मैनेट और केकड़ों की पीठ पर भी सवारी करते हैं। जब ये लार्वा अवस्था में होते हैं तो स्वतंत्र रूप से तैरते रहते हैं। लेकिन वयस्क होने पर ये किसी सतह पर चिपक जाते हैं, और माना जाता था कि आजीवन चिपके रहते हैं। लेकिन 2000 के दशक की शुरुआत में शोधकर्ताओं ने देखा कि कई महीनों की अवधि में सी. टेस्टुडिनेरिया बार्नेकल जंगली समुद्री हरे कछुओं की पीठ पर अपनी जगह से खिसकते हैं, और अक्सर धारा के विपरीत सरकते हैं।

2017 में, अन्य वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में ऐक्रेलिक सतह पर 15 बार्नेकल के सरकने की गति पर नज़र रखी। एक साल के अवलोकन में उन्होंने पाया कि बार्नेकल अपनी पकड़ बनाने वाली सीमेंट ग्रंथि से स्राव के बढ़ते स्राव के माध्यम से स्थान परिवर्तन करते हैं। प्रोसीडिंग्स ऑफ दी रॉयल सोसाइटी में प्रकाशित नतीजों के अनुसार शोधकर्ताओं का अनुमान है कि बार्नेकल भोजन के लिए खिसकते हैं, क्योंकि वे उस तरफ आगे बढ़े जहां जल प्रवाह अधिक था। गौरतलब है कि बार्नेकल छन्ना विधि से भोजन प्राप्त करते हैं, इसलिए इन्हें वहीं ज़्यादा भोजन मिलने की संभावना होती है जहां पानी का बहाव अधिक हो।

प्रयोग के दौरान बार्नेकल बहुत धीमे और बहुत कम दूरी तक खिसके थे – उन्होंने 3 महीनों में औसतन 7 मिलीमीटर दूरी तय की, सिर्फ एक बार्नेकल साल भर में 8 सेंटीमीटर आगे सरका। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि स्थिर माने जाने वाले जीवों में इतनी गति देखा जाना भी एक उपलब्धि है।

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