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पांव-पांव गांव-गांव पहुंची भाजपा

ब्लॉक प्रमुख की 825 सीटों में से 648 भाजपा के हिस्से में आईं

गिरीश पांडेय

कभी शहरी लोगों की पार्टी मानी जाने वाली भाजपा पांव-पांव (धीरे-धीरे) गांव-गांव तक पहुंच गई है। सिर्फ पहुंची ही नहीं, बल्कि पूरी मजबूती से अपनी उपस्थिति भी दर्ज कराई है। हाल ही में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के तहत जिला पंचायत अध्यक्ष और क्षेत्र पंचायत ब्लॉक प्रमुख के चुनावों में भाजपा ने उत्तरप्रदेश में जिस तरह से समाजवादी पार्टी को धूल चटाकर क्लीन स्वीप किया,वह इसका सबूत है। जिला पंचायत अध्यक्ष की 75 में से 67 सीटें भाजपा के खाते में गईं। खास बात यह रही कि पहली बार सपा के गढ़ में भी भाजपा ने अपना परचम फहराया। कमोबेश यही स्थिति ब्लॉक प्रमुख चुनावों में भी रही। ब्लॉक प्रमुख की 825 सीटों में से 648 भाजपा के हिस्से में आईं।

ऐसा अकस्मात नहीं हुआ

मुख्यमंत्री योगी की अगुआई में गांवों में पैठ बढ़ाने के लिए नियोजित तरीके से काम किया। केंद्र सरकार ने भी इसमें पूरी मदद की। अगर हम 2011 की जनगणना को मानक मानें तो आबादी का करीब 80 फीसद हिस्सा गांवों में रहता है। प्रदेश में आबाद गावों की संख्या करीब 98 हजार है। गांवों में रहने वाले अधिकांश लोगों की जीविका खेती पर ही निर्भर है। इस लिहाज से किसानों की संख्या सर्वाधिक है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी पहली ही कैबिनेट में 84 हजार लघु सीमांत किसानों का 36 हजार करोड़ रुपए का कर्ज माफ कर दिया। प्रदेश में ऐसे किसानों की संख्या करीब 92 फीसद है।

फाईल फोटो -गुगल

न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की जो संस्तुति स्वामीनाथन आयोग ने वर्षों पहले की थी,उसे लागू कर दिया। इसके तहत फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य उनकी लागत का डेढ़ गुना कर दिया। धान, गेहूं की रिकॉर्ड खरीद, मक्का और अन्य कुछ फसलों को एमएसपी के दायरे में लाना, आजादी के बाद से अब गन्ने की रिकॉर्ड खरीद और भुगतान, (एक लाख 40 हजार करोड़ रुपए से अधिक) किसान सम्मान योजना, मिलीयन फार्मर्स स्कूल के द्वारा पांच लाख से अधिक किसानों को जोड़ना, पहली बार बटाईदारों को बीमा सुरक्षा देना आदि कुछ ऐसे कदम थे जिससे लगा कि सही मायनों में भाजपा गांव, किसान और गरीब की न केवल चिन्ता करती है,बल्कि उनका सम्मान भी करती है।

रही सही कसर प्रधानमंत्री आवास, प्रधानमंत्री किसान सम्मान, प्रधानमंत्री सिंचाई योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला और आयुष्मान भारत-पीएम आरोग्य योजना जैसी केंद्र की योजनाओं और प्रदेश सरकार द्वारा इनके सफल क्रियान्वयन ने पूरी कर दी। इन तमाम योजनओं के क्रियान्वयन में उत्तरप्रदेश नंबर एक है। गांवों में अपनी पकड़ बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने हर ग्राम पंचायत में पंचायत भवन, कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) सामूहिक शौचालय बनाने, इन शौचालयों के रख-रखाव के लिए तय मानदेय पर रोजगार देने, 58 हजार में बीसी ( बैंकिंग करेस्पोंडेंस)सखी बनाने जैसी योजनाओं से भाजपा की गांवों में पकड़ और मजबूत हुई। चूंकि प्रदेश में गावों और किसानों की संख्या सर्वाधिक है। लिहाजा ऐसी तमाम योजनओं का लाभ भी उत्तरप्रदेश को सर्वाधिक मिला।

कोरोना काल को भी इस बाबत योगी सरकार ने अवसर में बदला। कोरोना का संक्रमण गांवों में न फैले, इसके लिए 70 हजार से अधिक निगरानी समितियों के जरिए अपनी पूरी ताकत लगा दी और इसमें सफल भी हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री का लगातार दौरा इस दौरान गांवों में जाना और कोरोना से संक्रमित लोगों के बीच जाकर उनसे बातचीत करना सोने पर सुहागा साबित हुआ। कोरोना के पहले वेब के दौरान बड़ी संख्या (40 लाख) में घर वापसी करने वाले श्रमिकों की सरकार ने 1000 भरण-पोषण भत्ता और राशन किट दिया।उनकी स्किल मैपिंग कराकर उनको स्थानीय स्तर पर रोजगार दिया। इससे भी गांवों में सरकार की पकड़ और मजबूत हुई। इस पकड़ को और मजबूत करने के लिए केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार भविष्य में गांव और किसान को केंद्र में रखकर और भी योजनाएं ला सकती है। मसलन किसान मोर्चा हर गांव से 11 किसानों को जोड़ने की घोषणा कर चुकी है। पंचायत चुनाव के रूप में इन सारे प्रयासों का नतीजा सामने है।

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