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कोरोना काल में सुकून देने वाला भजन लॉन्च, पत्रकार से भजन गायक बने हरीश ने पूछा- तो क्या मेरा कोई कन्हैया नहीं

कोरोना के इस संकट काल में चारों ओर भय और निराशा का माहौल है। लोग डरे हुए हैं और डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं। कष्ट की इस घड़ी में ताजा हवा के झोंके की तरह है वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हरीश चंद्र बर्णवाल का नया भजन। भगवान कृष्ण की तरह खूबसूरत है यह भजन- ‘तो क्या मेरा कोई कन्हैया नहीं।’ इस भजन को सुनकर आप अपने सारे गम भूल जाएंगे। हरीश चंद्र बर्णवाल ने ना सिर्फ इस भजन को शब्दों की मोती से पिरोया है, बल्कि अपनी मखमली आवाज से भजन गायकी को एक नया आयाम भी दिया है। एक-एक शब्द हजारों अर्थ देने वाला है। इस भजन को सुनकर आपका दिल खुश हो जाएगा। मन को सुकून देने वाला यह एक ऐसा भजन है जो वर्षों बाद लोगों को सुनने के लिए मिल रहा है।

लेखक हरीश चंद्र बर्णवाल ने बड़ी खूबसूरती से इस भजन को लिखा है। इसका हर एक शब्द दिल को राहत देता है। मन को शांति प्रदान करता है। सबकुछ भूलकर मन प्रभु भक्ति में लीन हो जाता है। भजन का संगीत बेहतरीन है। राहत देने वाला है। इस भजन को आप बार-बार सुनना तो पसंद करेंगे ही साथ ही खुद को गुनगुनाने से भी रोक नहीं पाएंगे। इस भजन में गायक हरीश चंद्र बर्णवाल भगवान कृष्ण से खूबसूरत अंदाज में सवाल पूछते हैं। महाभारत की पूरी घटना को शब्दों से शानदार ढंग से सजा कर वे भगवान से पूछते हैं कि ‘ना तो राधा हूं मैं, ना तो मीरा हूं मैं। तो क्या मेरा कोई कन्हैया नहीं। सत्यभामा नहीं, न हूं मै रुक्मिणी। तो क्या मेरा कोई कन्हैया नहीं। हरीश बर्णवाल ने इसे अपने यूट्यूब चैनल पर लॉन्च किया है।

इस भजन के साथ हरीश ने पत्रकारिता से भजन गायिकी की तरफ अपना कदम बढ़ाया है। हरीश चंद्र बर्णवाल एक वरिष्ठ टीवी पत्रकार रहे हैं। एबीपी न्यूज, न्यूज 18 इंडिया, जी न्यूज और डीडी न्यूज में काम कर चुके हैं। इसके अलावा वो सात पुस्तकें भी लिख चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी पर चार पुस्तकें लिखने के अलावा हरीश ने कहानियों पर एक पुस्तक और टीवी पत्रकारिता की भाषा पर भी पुस्तक लिख चुके हैं। हरीश को भारत सरकार का भारतेंदु हरिश्चंद्र पुरस्कार और हिन्दी अकादमी पुरस्कार समेत कई सम्मान मिल चुके हैं।

 

 

 

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