
मुख्यमंत्री के मठ में होती है पानी की खेती
दस हजार लीटर की क्षमता के चार टैंकों में होता है जलसंरक्षण
मंदिर के 50 एकड़ के रकबे में बारिश की हर बूंद पहुंचती है धरती के कोख तक
गिरीश पांडेय
गोरखपुर । चौंकिए मत। यह सच है। अपने मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगीआदित्यनाथ पानी की खेती (रेन हार्वेस्टिंग) भी करते हैं। वर्ष 2014 और 2015 में लगातार दो साल सूखा पड़ा था। गिरता जल स्तर और पानी के संरक्षण संबंधी खबरें अखबारों की सुर्खियां बनीं थी। उसी समय उनके दिमाग में आया कि क्यों न मंदिर में ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग के जरिए इसकी पहल की जाय। करीब चार साल पहले मानसून के सीजन में उन्होंने गोरखनाथ मंदिर के विशाल परिसर (करीब 50 एकड़) में उन जगहों को चिन्हित किया जहां बारिश होने के दौरान सर्वाधिक पानी लगता है। ऐसी कुल चार जगहें चिन्हित हुई।
इंजीनियर से इस बारे में सलाह ली गई। तय हुआ कि चिन्हित जगहों पर 10-10 फीट लंबा और गहरा और 9 फीट चौड़े गढ्ढे का निर्माण होगा। इसमें 20 फीट गहरी बोरिंग होगी ताकि इनके जरिए पानी बारिश का पानी सीधे भूगर्भ जल में पहुंच जाय। गढ्ढे की दीवारें नीचे से ऊपर तक पक्की होंगी। गढ्ढे की सतह से लेकर ऊपर तक मानक मोटाई के अनुसार क्रमश: महीन बालू, मोरंग बालू, ईंट और पत्थर के टुकड़े भरे जाएंगे।
निथर कर जाएगा टैंक में पानी
टैंक में आने वाला पानी शुद्ध हो इसके लिए पहले इसे एक चैंबर में एकत्र किया जाएगा। चैंबर की जो दीवार टैंक की ओर होगी, उस पर प्लास्टिक की मजबूत जाली लगी होगी। इससे निथरा पानी आठ इंच मोटी प्लास्टिक पाइप के जरिए टैंक तक पहुंचेगा और धरती की गोद में समा जाएगा। हर टैंक की लागत करीब 60 से 70 हजार रुपये की होगी। एक टैंक के पानी की संग्रह क्षमता करीब दस हजार लीटर की होगी।
अनिवार्य होना चाहिए
रेन वाटर हार्वेस्टिंग
उस समय योगी जी ने खुद मीडिया को यह काम दिखाने के लिए आमंत्रित किया था। तब उन्होंने कहा था कि हाल के वर्षों में गिरते जलस्तर के कारण मंदिर में लगे कई परंपरागत हैंडपंप सूख जाते हैं। इसके उलट चंद घंटों की मूसलाधार बारिश में कुछ जगहों पर इतना पानी लग जाता है कि उसे उलीचने में घंटों लग जाते हैं। बारिश के लगातार घटते औसत कम दिनों में अधिक बारिश के मद्देनजर आने वाले समय में जलसंकट और बढ़ेगा। ऐसे में हर आवासीय, व्यावसायिक इकाई आदि के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य होना चाहिए।
बतौर सीएम प्राथमिकताएं
बस फलक का विस्तार
अब मुख्यमंत्री के रूप में भी जलसंरक्षण, हर खेत को पानी सबको शुद्ध पेयजल योगीजी की प्राथमिकताओं में से हैं। दशकों से अधूरी पड़ी सिंचाई परियोजनाओं को पूरा कर, न्यूनतम पानी एवं समय में अधिकतम रकबे की सिंचाई के लिए स्प्रिंकलर और ड्रिप जैसी अपेक्षाकृत दक्ष विधाओं के प्रयोग और खेत-तालाब योजना के जरिए उन्होंने इस वित्तीय वर्ष में 25 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचन क्षमता का लक्ष्य रखा है।
सबको शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए बुंदेलखंड, विंध्य और अन्य संकटग्रस्त क्षेत्र के लिए 30 हजार करोड़ रुपए की योजना पर काम चल रहा है। इन सारी योजनाओं पर प्रभावी अमल के लिए जरूरी है। हर बूंद का संरक्षण। अब सीएम के रूप में भी उक्त योजनाओं के साथ नदियों को पुर्नजीवित करना, गंगा सहित बड़ी नदियों के किनारे बहुउद्देशीय तालाब आदि के पीछे उनकी यही सोच है।



