
लखनऊ। वैश्विक महामारी कोरोना के बाद अब प्रदूषण जानलेवा बन रहा है। हल्की सर्दी बढ़ने के साथ प्रदूषण का ग्राफ भी तेजी से बढ़ गया है। ऐसे में श्वास रोगियों की संख्या जहां तेजी से बढ़ रही वहीं लंग इन्फेक्शन के भी मामले बढ़ रहे हैं । राजधानी लखनऊ ,वाराणसी समेत यूपी के कई शहरों में में एयर पॉल्यूशन संबंधी खतरे की घंटी बज चुकी है। जिस रफ्तार से एक्यूआई लेवल में इजाफा हो रहा है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में राजधानी लखनऊ समेत कई इलाके गैस चेंबर में तब्दील हो जाएगें। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की ओर से शुक्रवार को जारी किए गए आंकड़ों में राजधानी का एक्यूआई स्तर 447 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज किया गया है। इस आंकड़े से राजधानी देश के तीसरे सबसे प्रदूषित शहरों में है। वहीं राजधानी के कई इलाकों में भी एक्यूआई 400 के पार दर्ज किया गया है। वाराणसी में भी कई इलाके प्रदूषण की भीषण गिरफ्त में है। आशापुर में निर्माणाधीन फ्लाईओवर के आसपास पानी का छिड़काव न होने से उड़ रहे धूल व चंद्रा चौराहा – पहड़िया मार्ग बेहद खराब होने से धूल का गुबार लोगों की सेहत खराब कर रहा। मकानों दुकानों ही नहीं सड़क किनारे पेड़ों पर भी धूल की मोटी परत जम चुकी है। आशापुर, पंचकोशी से सारनाथ तक धूल से लोग आजकल बेहद परेशान हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सिर्फ कागजी खानापूर्ति करने में जुटा, नहीं हो रही कोई कार्रवाई। समय रहते यदि ध्यान नहीं दिया गया तो इन इलाकों के सैकड़ों लोग हो सकते हैं गंभीर रूप से बीमार।



