
जौनपुर। मल्हनी विधानसभा सीट जीतने के लिए जी-जान से जुटी सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और उसकी सहयोगी पार्टियों ने जहां एक तरफ पूरी ताकत झोंक रखी है, वहीं दूसरी तरफ उन्हें नए खुलने वाली दूसरे मोर्चों पर भी जूझना पड़ रहा है। विरोधी पार्टियों और दूसरे प्रत्याशियों ने निर्वाचन आयोग से शिकायतों के जरिए भाजपा प्रत्याशी को परेशानी में डाल रखा है। अपने पिता की सीट पर दावेदारी कर रहे सपा प्रत्याशी लकी यादव और अपनी पुरानी सीट पर कब्जा करने में जुटे निर्दल प्रत्याशी धनंजय सिंह के सहयोगियों ने खास तौर पर यह मुहिम चला रखी है।
मल्हनी विधानसभा क्षेत्र के नौपेड़वा बाजार में स्थित श्री यादव इस इंटर कालेज को भारतीय जनता पार्टी ने मल्हनी उपचुनाव के लिए भाजपा प्रत्याशी मनोज कुमार सिंह का केंद्रीय चुनाव कार्यालय बना रखा था, जिसे आयोग के निर्देश पर रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा हटवा दिया गया। पता चला है कि निर्दल प्रत्याशी धनंजय सिंह की तरफ से निर्वाचन आयोग से शिकायत की गई थी कि नौपेड़वा में अनुमति के यह चुनाव कार्यालय खोला गया है, जिसके बाद यह कार्रवाई हुई। काफी तामझाम के बाद साथ बड़े नेताओं की मौजूदगी में यह कार्यालय खोला गया था लेकिन या महज 3 दिन ही काम आ सका। इसके साथ ही निर्वाचन कार्य में लगे अफसरों पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं यहां तक की जिला निर्वाचन अधिकारी पर सत्ता पक्ष के प्रत्याशी की तरफदारी कि आरोप लगाकर उन्हें उप चुनाव प्रक्रिया से अलग करने की कोशिशें भी शुरू हो गई हैं।
इसके पहले अपने जनसंपर्क अभियान के दौरान एक भजन गायक की गायन प्रस्तुति से प्रभावित होकर उसे नगद पुरस्कार देना भी भाजपा प्रत्याशी मनोज कुमार सिंह को भारी पड़ रहा है। दिलचस्प बात यह है उस गायक को ढंग से दिखाई नहीं देता और उसका कहना है कि उसे नहीं मालूम किसने पैसा दिया। उस मौके की एक फोटो के जरिए सोशल मीडिया समेत विभिन्न प्लेटफार्मों पर इसे ‘पैसा बांटने’ का मामला करार देकर खूब उछाला जा रहा है। शिकायतें भी हुई हैं। खास बात यह है की सभी प्रमुख प्रत्याशी चुनाव क्षेत्र में जिसको और जहां जरूरत महसूस कर रहे हैं वहां पैसा भी दे रहे हैं।
लेकिन पैसा बांटने का यह काम बहुत सावधानी से आंख बचा कर किया जा रहा है। धन के बल पर मतदाताओं को प्रभावित करने का यह काम बहुत ही गोपनीयता के साथ किया जाता है। लेकिन भाजपा प्रत्याशी खुलेआम सार्वजनिक रूप से पैसा देने के आरोप की गिरफ्त में है। दिलचस्प बात यह भी है की इस ‘करतूत’ की गवाह के तौर पर एक फोटो पेश की जा रही है, जिसे जनसंपर्क में साथ रहे किसी सहयोगी ने बेहद करीब से क्लोज फ्रेम में क्लिक किया है। निर्वाचन आयोग की आदर्श आचार संहिता का पूर्ण ज्ञान होने के बावजूद एक सुशिक्षित और राजनीतिक रूप से परिपक्व प्रत्याशी द्वारा ऐसा किया जाना हास्यास्पद ही है।




