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वाराणसी में भाजपा का कांग्रेस नेतृत्व को अल्टीमेटम, माफी नहीं तो सड़क से संसद तक संघर्ष

वाराणसी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता पर कथित अमर्यादित टिप्पणी को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। कचहरी स्थित भाजपा जिला मुख्यालय पर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के पुतले फूंके गए। भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री जगदीश पटेल, महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि, मंत्री रविंद्र जायसवाल, डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ सहित कई जनप्रतिनिधियों ने कांग्रेस नेतृत्व से सार्वजनिक माफी की मांग की। भाजपा ने राजनीतिक मर्यादा बनाए रखने और विरोध जारी रखने की चेतावनी दी।

वाराणसी : कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्व. पिता पर कथित अमर्यादित टिप्पणी को लेकर काशी में भाजपा ने कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सोमवार को कचहरी स्थित भाजपा जिला मुख्यालय पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के पुतले फूंककर अपना आक्रोश जाहिर किया। भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री एवं उत्तर प्रदेश के सह प्रभारी जगदीश पटेल की मौजूदगी और महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में कांग्रेस के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। युवा मोर्चा, महिला मोर्चा और अनुसूचित मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने भी मोर्चा संभालते हुए कांग्रेस मुर्दाबाद, राहुल गांधी मुर्दाबाद और खड़गे मुर्दाबाद के नारे लगाए।

भाजपा ने इस प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस नेतृत्व को सीधे निशाने पर लेते हुए सार्वजनिक माफी की मांग उठाई। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोध के नाम पर अमर्यादित भाषा और व्यक्तिगत टिप्पणियों का इस्तेमाल कांग्रेस की राजनीतिक कार्यशैली का हिस्सा बनता जा रहा है। भाजपा नेताओं ने दो टूक कहा कि सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन आलोचना और अपमान के बीच की सीमा लांघने को राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं माना जा सकता। प्रदर्शन में कांग्रेस नेतृत्व से जवाबदेही तय करने की मांग के साथ आगे भी विरोध जारी रखने का ऐलान किया गया।

जगदीश पटेल बोले-विरोध विचारों से हो, अमर्यादित शब्दों से नहीं

भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री एवं उत्तर प्रदेश के सह प्रभारी जगदीश पटेल ने कहा कि राजनीतिक विरोध के नाम पर मर्यादा लांघना स्वीकार्य नहीं है। लोकतंत्र में विरोध करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन उसकी आड़ में अमर्यादित भाषा का सहारा लेना राजनीतिक संस्कारों पर सवाल खड़ा करता है। राजनीति में विचारों की लड़ाई विचारों से होनी चाहिए, न कि ऐसे शब्दों से जो सार्वजनिक संवाद का स्तर गिरा दें। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से टिप्पणी पर अपना पक्ष स्पष्ट करने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।

महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि ने कांग्रेस पर राजनीतिक मर्यादा भूलने का आरोप लगाते हुए कहा कि उसके नेता सार्वजनिक मंचों से लगातार अमर्यादित टिप्पणियां कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अब भाजपा कार्यकर्ता चुप नहीं बैठेंगे। कांग्रेस के खिलाफ सड़क से संसद तक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा और उसे राजनीतिक मर्यादा में रहने के लिए मजबूर किया जाएगा।

राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के सम्मान का सवाल करोड़ों देशवासियों की भावनाओं से जुड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ सार्वजनिक मंच से इस्तेमाल की जाने वाली भाषा महज राजनीतिक बयानबाजी का मामला नहीं, बल्कि देश के सर्वोच्च कार्यकारी पद की गरिमा से भी जुड़ा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को प्रधानमंत्री के नेतृत्व और नीतियों का विरोध करना है तो तथ्यों के आधार पर सवाल उठाने चाहिए। अमर्यादित शब्दों से राजनीतिक विमर्श को दूषित करना उचित नहीं है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से जवाबदेही तय करने और सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की

आयुष मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके परिवार को लेकर बार-बार अमर्यादित टिप्पणियां करते हैं। उन्होंने कहा कि कभी प्रधानमंत्री को निशाना बनाया जाता है तो कभी उनकी दिवंगत माता और पिता के संदर्भ में आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया जाता है। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पर अभद्रता की सीमाएं पार करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि जब विपक्ष के पास देश के विकास, नीतियों और जनकल्याणकारी योजनाओं पर बहस के लिए ठोस मुद्दे नहीं बचते, तब वह व्यक्तिगत आक्षेपों का सहारा लेता है। उन्होंने कहा कि जनता कांग्रेस की इस राजनीति को देख रही है और समय आने पर जवाब देगी।

महापौर और विधायकों ने भी कांग्रेस को घेरा
महापौर अशोक कुमार तिवारी ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में भाषा ही राजनीतिक संस्कारों की पहचान होती है। प्रधानमंत्री का पद देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण संस्थागत पद है और उससे जुड़े संवाद में गरिमा बनाए रखना जरूरी है। राजनीतिक दलों को ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए, जिससे स्वस्थ बहस की परंपरा मजबूत हो, न कि कटुता और व्यक्तिगत टिप्पणियों को बढ़ावा मिले।

विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि नीतियों पर बहस होनी चाहिए, लेकिन शब्दों के जरिए राजनीतिक विमर्श का स्तर नहीं गिराया जाना चाहिए। लोकतंत्र में राजनीतिक मुकाबले का मजबूत आधार तथ्य, तर्क और जनहित के मुद्दे हैं। सरकार के फैसलों से असहमति होने पर उसे सदन, सार्वजनिक मंच और जनसंवाद में मजबूती से उठाया जाना चाहिए। अमर्यादित भाषा न तो तर्क को मजबूत करती है और न ही जनता के बीच किसी राजनीतिक दल की विश्वसनीयता बढ़ाती है। उन्होंने राजनीतिक आलोचना और व्यक्तिगत अपमान के बीच अंतर समझने की जरूरत बताई।

विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित अमर्यादित बयान को लेकर कांग्रेस नेतृत्व अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। उन्होंने टिप्पणी पर स्पष्टीकरण और सार्वजनिक माफी की मांग करते हुए कहा कि राजनीतिक बयान केवल सुर्खियां बटोरने का माध्यम नहीं होने चाहिए। जनप्रतिनिधियों की भाषा में गंभीरता, संयम और जवाबदेही दिखनी चाहिए। मजबूत विपक्ष की पहचान तथ्यपरक आलोचना से होती है, न कि विवादित शब्दों से।

इनकी रही प्रमुख उपस्थिति

प्रदर्शन में भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री एवं उत्तर प्रदेश के सह प्रभारी जगदीश पटेल, महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल, आयुष मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, महापौर अशोक तिवारी, विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी, विधायक सौरभ श्रीवास्तव, पूर्व महापौर रामगोपाल मोहले, क्षेत्र उपाध्यक्ष नवरतन राठी, अमित राय, अनूप जायसवाल, जगदीश त्रिपाठी, शैलेश राम, रजनीश कनौजिया, मधुकर चित्रांश, नवीन कपूर, पूजा दीक्षित, शैलेंद्र मिश्रा, अशोक जाटव, राहुल सिंह, चंद्रशेखर उपाध्याय, जगन्नाथ ओझा, प्रज्ञा पाण्डेय, प्रमिल पाण्डेय, सत्येंद्र सिंह, नेहा कक्कड़, शोभनाथ मौर्य, मनोज सोनकर, विवेक पाण्डेय, राकेश जायसवाल, सपना सिंह, योगेश सिंह ‘पिंकू’, साधना वेदांती, विभव सिंह, अनुराग शर्मा, मधुप सिंह और हीरा यादव सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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