देश में मोबाइल सबस्क्राइबर 128.79 करोड़ के पार, पहली बार टेली-डेंसिटी पहुंची 90 प्रतिशत
भारत में मोबाइल सबस्क्राइबरों की संख्या जुलाई 2026 में बढ़कर 128.79 करोड़ पहुंच गयी। TRAI की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश की मोबाइल टेली-डेंसिटी पहली बार 90 प्रतिशत के पार पहुंचकर 90.04 प्रतिशत दर्ज की गयी। एयरटेल ने सबसे अधिक 26.88 लाख नए ग्राहक जोड़े, जबकि रिलायंस जियो, BSNL और वोडाफोन के ग्राहकों की संख्या में भी वृद्धि हुई। ग्रामीण और शहरी कनेक्टिविटी में अंतर अब भी बना हुआ है।
नयी दिल्ली : देश में मोबाइल फोन कनेक्शनों की संख्या लगातार बढ़ रही है और जुलाई 2026 में यह बढ़कर 128.79 करोड़ के स्तर पर पहुंच गयी। इसके साथ ही देश में पहली बार मोबाइल टेली-डेंसिटी, यानी प्रति 100 लोगों पर मोबाइल कनेक्शनों की संख्या, 90 प्रतिशत के आंकड़े को पार कर 90.04 प्रतिशत हो गयी है।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की शुक्रवार को जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 के अंत में देश में मोबाइल सबस्क्राइबरों की संख्या करीब 128.24 करोड़ थी, जो जुलाई में बढ़कर 128 करोड़ 79 लाख से अधिक हो गयी। इस दौरान मोबाइल ग्राहकों की संख्या में 0.43 प्रतिशत की मासिक वृद्धि दर्ज की गयी।
मोबाइल कनेक्टिविटी में यह बढ़ोतरी देश में डिजिटल सेवाओं, इंटरनेट आधारित सुविधाओं और स्मार्टफोन के बढ़ते उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पहली बार 90 प्रतिशत के पार पहुंची मोबाइल टेली-डेंसिटी
ट्राई के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में देश की मोबाइल टेली-डेंसिटी बढ़कर 90.04 प्रतिशत हो गयी। जून में यह आंकड़ा 89.71 प्रतिशत था। इसका अर्थ है कि देश में प्रति 100 लोगों पर औसतन करीब 90 मोबाइल कनेक्शन मौजूद हैं। हालांकि, टेली-डेंसिटी का आंकड़ा वास्तविक मोबाइल उपयोगकर्ताओं की संख्या का सटीक प्रतिनिधित्व नहीं करता, क्योंकि एक व्यक्ति के पास एक से अधिक मोबाइल कनेक्शन भी हो सकते हैं। 90 प्रतिशत के स्तर को पार करना भारतीय दूरसंचार क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
शहरी क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्शनों की संख्या में तेज वृद्धि
रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में शहरी क्षेत्रों में मोबाइल सबस्क्राइबरों की संख्या बढ़कर 74.37 करोड़ हो गयी, जबकि जून में यह 73.94 करोड़ थी। इस प्रकार शहरी क्षेत्रों में मोबाइल ग्राहकों की संख्या में 0.57 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी।
शहरी भारत में मोबाइल टेली-डेंसिटी आबादी की तुलना में काफी अधिक बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, शहरों में प्रति 100 लोगों पर मोबाइल कनेक्शनों की संख्या लगभग 144 प्रतिशत के स्तर पर है। इसका प्रमुख कारण एक व्यक्ति द्वारा एक से अधिक सिम कार्ड का उपयोग, व्यक्तिगत और व्यावसायिक कनेक्शन तथा डेटा और अन्य सेवाओं के लिए अलग-अलग मोबाइल कनेक्शन लेना माना जा सकता है।
ग्रामीण भारत में बढ़े ग्राहक, लेकिन टेली-डेंसिटी अब भी कम
ग्रामीण क्षेत्रों में भी मोबाइल ग्राहकों की संख्या में वृद्धि हुई है। जून 2026 में ग्रामीण मोबाइल सबस्क्राइबरों की संख्या 54.30 करोड़ थी, जो जुलाई में बढ़कर 54.43 करोड़ हो गयी। ग्रामीण क्षेत्रों में यह वृद्धि 0.24 प्रतिशत रही। हालांकि, ग्रामीण भारत में मोबाइल टेली-डेंसिटी अब भी शहरी क्षेत्रों की तुलना में काफी कम है। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण टेली-डेंसिटी करीब 60 प्रतिशत रही।
इसका मतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति 100 लोगों पर औसतन लगभग 60 मोबाइल कनेक्शन हैं। यह आंकड़ा ग्रामीण डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार की संभावनाओं और चुनौतियों, दोनों को दर्शाता है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच मोबाइल कनेक्टिविटी का यह अंतर दूरसंचार क्षेत्र के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है।
एयरटेल के ग्राहकों में सबसे अधिक बढ़ोतरी
जुलाई 2026 के दौरान प्रमुख दूरसंचार कंपनियों के ग्राहकों की संख्या में भी बदलाव दर्ज किया गया। भारती एयरटेल के सबस्क्राइबरों की संख्या में सबसे अधिक वृद्धि हुई। कंपनी ने जुलाई के दौरान 26.88 लाख नए ग्राहक जोड़े। इसके बाद रिलायंस जियो के ग्राहकों की संख्या में 24.47 लाख की वृद्धि दर्ज की गयी।
अन्य कंपनियों में भी ग्राहकों की संख्या बढ़ी। वोडफोन के सबस्क्राइबरों में 2.40 लाख का इजाफा हुआ, जबकि सरकारी क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल के ग्राहकों की संख्या में 16.89 लाख की बढ़ोतरी दर्ज की गयी।वहीं, एमटीएनएल के ग्राहकों की संख्या में 5.74 हजार की कमी आयी।
इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि देश के मोबाइल बाजार में एयरटेल और जियो की ग्राहक वृद्धि मजबूत बनी हुई है, जबकि बीएसएनएल ने भी जुलाई के दौरान उल्लेखनीय संख्या में नए ग्राहक जोड़े।
कुल टेलीफोन ग्राहकों की संख्या 135.43 करोड़ पहुंची
फिक्स्ड लाइन, फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस और मोबाइल सेवाओं को मिलाकर देश में कुल दूरसंचार सबस्क्राइबरों की संख्या जुलाई 2026 के अंत तक बढ़कर 135.43 करोड़ हो गयी।एक महीने पहले की तुलना में इसमें 0.46 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी।
कुल टेलीफोन ग्राहकों की संख्या में शहरी क्षेत्रों की हिस्सेदारी अधिक बनी हुई है। जुलाई के अंत में शहरी क्षेत्रों में कुल सबस्क्राइबरों की संख्या 79.67 करोड़ पहुंच गयी, जो जून में 79.21 करोड़ थी।
इस प्रकार शहरी क्षेत्रों में कुल दूरसंचार ग्राहकों की संख्या में 0.58 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में कुल सबस्क्राइबरों की संख्या 55.60 करोड़ से बढ़कर 55.76 करोड़ हो गयी। ग्रामीण क्षेत्रों में यह वृद्धि 0.28 प्रतिशत रही।
मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी का भी बढ़ा दायरा
जुलाई के दौरान बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने अपना मोबाइल नंबर बदले बिना सेवा प्रदाता बदलने के लिए मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) का विकल्प चुना। रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2026 में एक करोड़ 50 लाख 80 हजार से अधिक लोगों ने मोबाइल नंबर पोर्ट कराने के लिए आवेदन किया।
मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी के माध्यम से उपभोक्ता अपना पुराना मोबाइल नंबर बरकरार रखते हुए किसी दूसरे दूरसंचार सेवा प्रदाता की सेवाएं ले सकते हैं। बड़ी संख्या में पोर्टिंग आवेदनों को दूरसंचार क्षेत्र में ग्राहकों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा और बेहतर नेटवर्क, डेटा सेवाओं तथा ग्राहक सुविधाओं की मांग के रूप में देखा जा सकता है।
ग्रामीण कनेक्टिविटी बढ़ाना अब भी बड़ी चुनौती
जुलाई के आंकड़े एक ओर जहां देश में मोबाइल कनेक्टिविटी के तेजी से विस्तार का संकेत देते हैं, वहीं दूसरी ओर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच मौजूद अंतर को भी स्पष्ट करते हैं। शहरी क्षेत्रों में आबादी की तुलना में मोबाइल कनेक्शनों की संख्या अधिक है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में टेली-डेंसिटी अभी लगभग 60 प्रतिशत के स्तर पर बनी हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क का विस्तार, बेहतर गुणवत्ता की सेवाएं, डिजिटल साक्षरता और किफायती स्मार्टफोन की उपलब्धता आने वाले वर्षों में दूरसंचार क्षेत्र की वृद्धि के प्रमुख कारक हो सकते हैं।
देश में मोबाइल ग्राहकों की संख्या का 128.79 करोड़ तक पहुंचना और मोबाइल टेली-डेंसिटी का पहली बार 90 प्रतिशत के पार जाना भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल और दूरसंचार ढांचे का महत्वपूर्ण संकेत है।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दूरसंचार कंपनियां ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पहुंच कितनी तेजी से बढ़ाती हैं और उपभोक्ताओं को बेहतर नेटवर्क तथा उच्च गुणवत्ता की डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने में कितनी सफल होती हैं।(वार्ता)।
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