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प्रवासी पक्षियों के इस ठिकाने पर होगा बड़ा विकास, 6 हेक्टेयर जमीन पर्यटन विभाग को

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी स्थित समान पक्षी विहार के पर्यटन विकास को योगी सरकार ने बड़ी मंजूरी दी है। कैबिनेट ने पक्षी विहार के निकट 6 हेक्टेयर ग्रामसभा भूमि पर्यटन विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित करने का फैसला किया है। यह क्षेत्र मयंक ऋषि पक्षी विहार के नाम से विकसित किया जाएगा। रामसर साइट समान में प्रवासी पक्षियों की बड़ी संख्या आती है। नई सुविधाओं से बर्ड वॉचिंग, नेचर फोटोग्राफी और इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

लखनऊ :  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में प्राकृतिक और पर्यावरणीय स्थलों को पर्यटन की नई पहचान देने की दिशा में समान पक्षी विहार के निकट पर्यटन विकास के लिए 6 हेक्टेयर ग्रामसभा भूमि पर्यटन विभाग के पक्ष में निःशुल्क हस्तांतरित किए जाने को मंजूरी मिली है, यह स्थल मयंक ऋषि पक्षी विहार के नाम से जाना जाएगा। इस फैसले से पर्यटन सुविधाओं से जोड़ने और देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने का रास्ता साफ होगा।

मैनपुरी स्थित समान पक्षी विहार उत्तर प्रदेश का एक महत्वपूर्ण वेटलैंड और रामसर साइट है। यह बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों का प्रमुख आश्रय स्थल है। विशेष रूप से गंगा के मैदानी क्षेत्र में स्थित यह मौसमी झील पक्षी प्रेमियों, प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

प्रवासी पक्षियों का प्रमुख ठिकाना, पर्यटन की अपार संभावनाएं

वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि समान पक्षी विहार में देश के विभिन्न हिस्सों के साथ ही विदेश से भी अनेक प्रजातियों के पक्षी प्रवास के दौरान पहुंचते हैं। उत्तर प्रदेश में चंद्रशेखर आजाद पक्षी विहार, सैंडी पक्षी विहार, हरदोई, बखिरा पक्षी विहार, संत कबीरनगर, विजय सागर पक्षी विहार, महोबा, लाख बहोसी पक्षी विहार, हमीरपुर, समसरोवर पक्षी विहार, आगरा सहित कई महत्वपूर्ण पक्षी विहार हैं। इन स्थलों पर बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी विशेष रूप से शरद ऋतु में पहुंचते हैं। समान पक्षी विहार की प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता इसे बर्ड वॉचिंग, फोटोग्राफी और प्रकृति पर्यटन के लिए आदर्श स्थल बनाती है। यहां नाव से पक्षियों को नजदीक से देखने और वॉच टावर के माध्यम से पक्षियों का अवलोकन करने की संभावनाएं भी हैं।

इको-टूरिज्म को बढ़ावा, आधारभूत सुविधाओं से संवरेगा क्षेत्र

योगी सरकार की ओर से पक्षी विहारों के विकास के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बर्ड-वॉचिंग सर्किट में इन्हें शामिल करने, आधारभूत सुविधाओं का विकास, वॉच टावर, साइन बोर्ड, सोलर लाइटिंग और जैव विविधता अध्ययन केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही प्रवासी पक्षियों के संरक्षण और पर्यटकों की सुविधा के लिए कार्ययोजनाएं तैयार की जा रही हैं। समान पक्षी विहार के निकट 6 हेक्टेयर भूमि पर्यटन विभाग को हस्तांतरित होने से यहां पर्यटक सुविधाओं के विस्तार की संभावनाएं बढ़ेंगी।

योगी सरकार ने गन्ना किसानों को किया 3.25 लाख करोड़ रुपये का भुगतान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सर्वाधिक गन्ना मूल्य भुगतान करने वाला राज्य बना हुआ है। योगी सरकार ने अब तक गन्ना किसानों को 3.25 लाख करोड़ का भुगतान किया। उत्तर प्रदेश गन्ना उत्पादन, शीरा उत्पादन और एथेनॉल उत्पादन में देश में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। वर्तमान पेराई सत्र में भी 94 प्रतिशत से अधिक गन्ना मूल्य का भुगतान पूरा हो चुका है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग ने किसान कल्याण, चीनी उत्पादन और एथेनॉल में नए आयाम स्थापित किए हैं। योगी सरकार की दूरदर्शी नीतियों के कारण उत्तर प्रदेश गन्ना उत्पादन, शीरा उत्पादन और एथेनॉल उत्पादन में देश में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। सरकार ने न केवल गन्ना किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाना प्राथमिकता माना, बल्कि ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अब तक रिकॉर्ड ₹3.25 लाख करोड़ का गन्ना मूल्य भुगतान सीधे किसानों के खातों में हस्तांतरित भी किया।

वर्तमान पेराई सत्र में भी 94 प्रतिशत से अधिक गन्ना मूल्य का भुगतान पूरा हो चुका है, जबकि प्रदेश की 99 चीनी मिलों ने गन्ना मूल्य का 100 प्रतिशत भुगतान सुनिश्चित कर दिया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रदेश के गन्ना किसानों की औसत आय में ₹40,720 प्रति हेक्टेयर की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

गन्ना विकास विभाग ने बताया कि विगत नौ वर्ष में प्रदेश की चीनी मिलों ने रिकॉर्ड 9,220 लाख टन गन्ने की पेराई करते हुए 968.58 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। वर्ष 2016-17 से वर्ष 2025-26 के बीच गन्ने का उत्पादन 1486.57 लाख टन से बढ़कर 2362 लाख टन हो गया है, जबकि चीनी का उत्पादन भी 87.73 लाख टन से बढ़कर 89.52 लाख टन पहुंच गया है। औसत गन्ना उत्पादकता 72.38 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 82.56 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर हो गई है, जिससे किसानों को प्रति हेक्टेयर 10.18 मीट्रिक टन अतिरिक्त गन्ने की उपज प्राप्त हो रही है। इसी अवधि में औसत चीनी परता भी 10.61 प्रतिशत से बढ़कर 10.83 प्रतिशत तक दर्ज किया गया है।

गन्ना पेराई क्षमता को आधुनिक और सुदृढ़ बनाने के लिए 04 नई चीनी मिलों की स्थापना की गई। 07 बंद चीनी मिलों को पुनः चालू किया गया और 44 चीनी मिलों की क्षमता का विस्तार किया गया। इससे प्रदेश में 1,28,500 टी.सी.डी. की अतिरिक्त पेराई क्षमता का सृजन हुआ। इसके अतिरिक्त खांडसारी उद्योग में ऑनलाइन लाइसेंसिंग व्यवस्था लागू करने और सुलभ नीतियों के कारण 285 नई खांडसारी इकाइयां स्थापित हुई हैं, जिनसे 41,900 लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हुआ है।

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