FCRA संशोधन विधेयक JPC को भेजा गया, विपक्ष ने जताया विरोध
लोकसभा में बुधवार को FCRA संशोधन विधेयक 2026 को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के विचार के लिए भेजने का प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित हुआ। विपक्ष ने इसे NGO और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने वाला बताया, जबकि सरकार ने आरोप खारिज किए। गृह मंत्री अमित शाह ने NEET परीक्षा से जुड़े छात्र आंदोलन पर संसद में चर्चा की पेशकश की। हंगामे के बीच खान और खनिज संशोधन विधेयक भी बिना चर्चा पारित कर दिया गया। सरकार ने इसे खनन क्षेत्र में सुधार और निवेश बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
नयी दिल्ली : लोकसभा ने विदेशी अनुदान विनियमन संशोधन विधेयक (एफसीआरए), 2026 को दोनों सदनों की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के विचार के लिए भेजने का प्रस्ताव बुधवार को विपक्ष के विरोध के बीच पारित कर दिया।गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में विधेयक को जेपीसी को भेजने का प्रस्ताव रखा। विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह विधेयक गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) तथा अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर लाया गया है जिसे संसदीय कार्यमंत्री किरण रिजिजू ने पूरी तरह गलत बताया और कहा कि विपक्षी सदस्यों को विधेयक जेपीसी को भेजे जाने का समर्थन करना चाहिए ताकि वहां इस पर व्यापक विचार विमर्श हो सके।
विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे के बीच सदन ने प्रस्ताव को ध्वनि मत से मंजूरी दे दी।प्रस्ताव के अनुसार जेपीसी के लिए लोकसभा के 21 सदस्यों का नामांकन अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के 10 सदस्यों का नामांकन सभापति सी पी राधाकृष्णन द्वारा किया जाएगा। समिति को अगले सत्र के प्रथम सप्ताह के अंतिम दिन तक अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी।श्री राय के प्रस्ताव रखते ही विपक्षी सदस्यों ने विधेयक का विरोध शुरू कर दिया।
कांग्रेस के के.सी. वेणुगोपाल और समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि विधेयक अल्पसंख्यकों और गैर-सरकारी संगठनों को निशाना बनाने वाला है। श्री वेणुगोपाल ने कहा कि एफसीआरए में प्रस्तावित बदलावों का मकसद अल्पसंख्यकों तथा एनजीओ को निशाना बनाना है।श्री रिजिजू ने विपक्ष के आरोप को खारिज करते हुए श्री अखिलेश यादव को विधेयक में किसी भी ‘अल्पसंख्यक विरोधी’ प्रावधान को दिखाने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि विधेयक में किसी अल्पसंख्यक या समुदाय को निशाना बनाने वाला एक भी शब्द नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष को विधेयक के प्रावधानों पर आपत्ति है तो उसे जेपीसी में भेजा जा रहा है, जहां सदस्यों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिलेगा।
श्री यादव ने कहा कि पूरा विपक्ष विधेयक के मौजूदा प्रारूप का विरोध कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के विधेयक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर लाए जा रहे हैं। श्री रिजिजू ने इस आरोप को गलत बताते हुए कहा कि विधेयक देश के हर समुदाय की सुरक्षा के लिए है।इससे पहले जैसे ही सदन की कार्यवाही एक बार के स्थगन के बाद दो बजे दोबारा शुरु हुई तो विपक्षी सदस्यों ने फिर से सदन में गृहमंत्री अमित शाह के बयान तथा अन्य मांगों को लेकर भारी हंगामा शुरु कर दिया। पीठासीन जगदम्बिका पाल ने सदन को बताया कि कुछ सदस्यों के स्थगन प्रस्ताव आए हैं, लेकिन अध्यक्ष ओम बिरला ने इनमें से किसी को स्वीकार नहीं किया है। शोर-शराबे के बीच जरूरी कागजात सदन के पटल पर रखे गए। सदन में भारी हंगामे को देखते हुए श्री पाल ने सदन की कार्यवाही तीन बजे तक स्थगित कर दी।
शाह ने बिरला को पत्र लिखकर नीट परीक्षा पर छात्र आंदोलन पर चर्चा कराने का किया आग्रह
गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा-नीट के लीक होने से जुड़े आंदोलन के मुद्दे पर संसद में चर्चा कराने का आग्रह करते हुए कहा है कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है।श्री शाह ने पत्र में कहा कि इस विषय पर सर्वदलीय कार्यसमिति की बैठक में संसदीय कार्य मंत्री किरेण रिजिजू ने सरकार की ओर से चर्चा करने का अनुरोध किया था। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से विपक्ष के नेताओं से चर्चा कर उनकी सहमति से इस मुद्दे पर चर्चा के लिए उचित समय आवंटित करने का आग्रह किया।
गृह मंत्री ने कहा कि वह सदन में उपस्थित रहकर इस मुद्दे पर चर्चा में भाग लेने और विपक्ष के सदस्यों के प्रश्नों का उत्तर देने के लिए तैयार है। उनका कहना था कि लोकतंत्र में चर्चा और संवाद से ही समाधान निकलता है। गृहमंत्री ने कहा कि उनका लोकतंत्र और लोकतांत्रिक संस्थाओं में अटूट विश्वास है तथा संसद संवाद के लिए है।श्री शाह ने लोकसभा अध्यक्ष से विपक्ष के नेताओं से चर्चा कर इस महत्वपूर्ण विषय पर अच्छे वातावरण में चर्चा कराने का आग्रह किया, ताकि पक्ष और विपक्ष के सभी सदस्य अपने बहुमूल्य मत एवं विचार प्रस्तुत कर सकें।
श्री शाह ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से भी कहा कि यदि विपक्ष चर्चा के लिए तैयार हो तो वह सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा , “विपक्ष लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखकर दे कि वह चर्चा के लिए तैयार है। वह आज अपराह्न तीन बजे से लेकर गुरुवार शाम तीन बजे तक चर्चा के दौरान उठाये गये विपक्ष के सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं।”उन्होंने विपक्ष को निशाने पर लेते हुए कहा, ” वह भी चर्चा करूंगा कि आपको चर्चा क्यों नहीं चाहिए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार हर चीज पर चर्चा के लिए तैयार है, संसद वे चलने नहीं देते हैं।”उन्होंने कहा, “विपक्ष संसद के दोनों सदनों में कार्यवाही चलने ही नहीं दे रहा है, तो वहां जाकर क्या होगा? मैं किसी भी सवाल का जवाब संसद में देने के लिए तैयार हूं।
“श्री शाह ने कहा, ” आज तीन बजे से चर्चा शुरू हो जाएगी, कल दोपहर तीन बजे मैं जवाब दे दूंगा। मैं खुद चर्चा में बैठूंगा। अब विपक्ष को तय करना है कि उन्हें चर्चा करनी है, या हंगामा करना है। सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है। यह भी चर्चा करूंगा कि आपने सदन क्यों नहीं चलने दिया।”गृह मंत्री ने कहा, ” विपक्ष तो यही मांग कर रहा है, हमने ‘हां’ बोल दिया। मैं संसद में किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हूं। मगर वे चर्चा ही नहीं होने देना चाहते। अब जनता तय करे कौन भाग रहा है? आज भी मैं कहता हूं। मैं सदन में ही बैठूंगा, सबको सुनूंगा और सब चीजों का जवाब दूंगा।”
हंगामे के बीच लोक सभा में खान और खनिज संशोधन विधेयक बिना चर्चा के पारित
लोक सभा में बुधवार को हंगामे के बीच बिना चर्चा के खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।विद्यार्थियों के खिलाफ राजधानी में 20 जुलाई को पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही तय करने और अयोध्या के राममंदिर में चढ़ावा चोरी की जांच की मांग को लेकर विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच पीठासीन जगदम्बिका पाल ने कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी को चर्चा और पारित कराने के लिए विधेयक पेश करने की अनुमति दी।इसके बाद श्री पाल ने विधेयक पर संशोधन पेश करने की नोटिस देने वाले सदस्यों के नाम पुकारे।
रिवाेल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के एन के प्रेमचंद्रन इस पर व्यवस्था का प्रश्न उठाने का प्रयास किया, जिसकी श्री पाल ने अनुमति नहीं दी।किसी सदस्य के संशोधन पेश नहीं करने पर श्री पाल ने विधेयक पारित कराने का प्रस्ताव करने के लिए श्री रेड्डी का नाम पुकारा।इसके बाद विधेयक ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।यह विधेयक खनिज अधिकार, कराधान और खनन को नियंत्रित करने वाले मौजूदा फ्रेमवर्क में बदलाव करने की कोशिश करता है, जिसमें कुछ प्रावधान ज़्यादा केन्द्रीय निगरानी का प्रस्ताव करते हैं।
प्रस्तावित बदलावों में से एक राज्य की खनिज वाली ज़मीन पर कुछ उपकर, कर या शुल्क लगाने की अधिकार से जुड़ा है। विधेयक में यह प्रावधान है कि राज्यों को खास लेवी लगाने से पहले केंद्र से मंज़ूरी लेनी पड़ सकती है। इसमें प्रस्तावित बदलावों से पहले लगायी गयी लेवी से जुड़े प्रावधान भी हैं, जिसमें एक ऐसा व्यवस्था भी शामिल है जिसके तहत कुछ ऐसी लेवी जो वापस नहीं मिली हैं, जो अमान्य हो सकती हैं।यह कानून खनन लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क को आसान बनाने और गहरे और ज़रूरी खनिजों के ब्लॉक्स की नीलामी और विकास में निजी कंपनियों और केन्द्रीय एजेंसियों की ज़्यादा भागीदारी को बढ़ावा देने की भी कोशिश करता है। ये प्रस्तावित बदलाव ऐसे समय में आये हैं, जब सरकार मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी ट्रांज़िशन और स्ट्रेटेजिक सेक्टर्स के लिए ज़रूरी माने जाने वाले मिनरल्स की घरेलू खनन और उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
विधेयक के उद्देश्यों के अनुसार संघ एमएमडीआर अधिनियम के अधीन केंद्र सरकार द्वारा विहित प्रावधानों के अनुसार खनिज सामग्री वाले खनिज धारक भू-क्षेत्रों के विनियमन को अपने नियंत्रण में लेगा। यह मौजूदा उपबंध के अतिरिक्त है, जो खानों के विनियमन और खनिजों के विकास पर संघ के नियंत्रण की घोषणा करता है। इसके अलावा एमएमडीआर अधिनियम में एक नयी धारा 9ख को अंतः स्थापित करना, जिसमें यह उपबंध है कि ऐसी शर्तों या निबंधनों के अनुसार, जो केंद्रीय सरकार द्वारा विहित किये जायें, के सिवाय, राज्य सरकार द्वारा खनिज अधिकार या खनिज धारक भू-क्षेत्र, या तो खनिज की मात्रा, खनिज के मूल्य या संदेश स्वामित्व पर या अन्यथा आधारित हो, पर कोई कर, उपकर या अन्य उद्ग्रहण (चाहे किसी भी नाम से ज्ञात हो) अधिरोपित नहीं किया जाएगा।
इस विधेयक के लागू होने से क्षेत्र में राजकोषीय व्यवस्था में निश्चितता, स्थिरता और पूर्वानुमान प्रदान करने का प्रयास करते हैं, जिससे राष्ट्रीय आर्थिक विकास को गति मिलेगी।प्रस्तावित बदलावों में से एक राज्य की खनिज वाली ज़मीन पर कुछ उपकर, कर या शुल्क लगाने की अधिकार से जुड़ा है। विधेयक में यह प्रावधान है कि राज्यों को खास लेवी लगाने से पहले केंद्र से मंज़ूरी लेनी पड़ सकती है। इसमें प्रस्तावित बदलावों से पहले लगायी गयी लेवी से जुड़े प्रावधान भी हैं, जिसमें एक ऐसा व्यवस्था भी शामिल है जिसके तहत कुछ ऐसी लेवी जो वापस नहीं मिली हैं, जो अमान्य हो सकती हैं।
यह कानून खनन लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क को आसान बनाने और गहरे और ज़रूरी खनिजों के ब्लॉक्स की नीलामी और विकास में निजी कंपनियों और केन्द्रीय एजेंसियों की ज़्यादा भागीदारी को बढ़ावा देने की भी कोशिश करता है। ये प्रस्तावित बदलाव ऐसे समय में आए हैं जब सरकार मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी ट्रांज़िशन और स्ट्रेटेजिक सेक्टर्स के लिए ज़रूरी माने जाने वाले मिनरल्स की घरेलू खनन और उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रही है।विधेयक के उद्देश्यों के अनुसार संघ एमएमडीआर अधिनियम के अधीन केंद्र सरकार द्वारा विहित प्रावधानों के अनुसार खनिज सामग्री वाले खनिज धारक भू-क्षेत्रों के विनियमन को अपने नियंत्रण में लेगा। यह मौजूदा उपबंध के अतिरिक्त है, जो खानों के विनियमन और खनिजों के विकास पर संघ के नियंत्रण की घोषणा करता है।
इसके अलावा एमएमडीआर अधिनियम में एक नयी धारा 9ख को अंतः स्थापित करना, जिसमें यह उपबंध है कि ऐसी शर्तों या निबंधनों के अनुसार, जो केंद्रीय सरकार द्वारा विहित किये जायें, के सिवाय, राज्य सरकार द्वारा खनिज अधिकार या खनिज धारक भू-क्षेत्र, या तो खनिज की मात्रा, खनिज के मूल्य या संदेश स्वामित्व पर या अन्यथा आधारित हो, पर कोई कर, उपकर या अन्य उद्ग्रहण (चाहे किसी भी नाम से ज्ञात हो) अधिरोपित नहीं किया जाएगा।इस विधेयक के लागू होने से क्षेत्र में राजकोषीय व्यवस्था में निश्चितता, स्थिरता और पूर्वानुमान प्रदान करने का प्रयास करते हैं, जिससे राष्ट्रीय आर्थिक विकास को गति मिलेगी।(वार्ता)
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