बिजली बिल और डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से फर्नीचर कारोबार पर संकट, व्यापारियों ने जताई चिंता
वाराणसी फर्नीचर एवं फर्निशिंग व्यापार मंडल की बैठक में व्यापारियों ने बिजली बिल और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर चिंता व्यक्त की। व्यापारियों का कहना है कि उत्पादन एवं परिवहन लागत बढ़ने से कारोबार प्रभावित हो रहा है। संगठन ने सरकार से बिजली दरों और ईंधन कीमतों पर नियंत्रण तथा व्यापारियों को राहत देने की मांग की।
वाराणसी : बढ़ती महंगाई, बिजली दरों में लगातार हो रही वृद्धि और पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों के बीच फर्नीचर कारोबार पर मंडरा रहे संकट को लेकर वाराणसी फर्नीचर एवं फर्निशिंग व्यापार मंडल की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में शहर के प्रमुख फर्नीचर एवं फर्निशिंग व्यवसायियों ने वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बढ़ती लागत और घटती मांग के कारण व्यापार लगातार प्रभावित हो रहा है।
बैठक में उपस्थित व्यापारियों ने कहा कि फर्नीचर उद्योग सीधे तौर पर बिजली और परिवहन व्यवस्था पर निर्भर है। लकड़ी की कटाई, मशीनों के संचालन, पॉलिशिंग, फिनिशिंग और अन्य उत्पादन कार्यों में भारी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होती है। वहीं तैयार उत्पादों को बाजार और ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए परिवहन व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में बिजली दरों और ईंधन की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि ने उत्पादन और वितरण लागत को काफी बढ़ा दिया है।
व्यापारियों का कहना था कि बढ़ी हुई लागत का सीधा असर उत्पादों की कीमतों पर पड़ रहा है। हालांकि बाजार में मांग कमजोर होने के कारण व्यापारी पूरी लागत ग्राहकों पर नहीं डाल पा रहे हैं, जिससे उनके लाभ में लगातार कमी आ रही है। छोटे और मध्यम स्तर के व्यवसायी सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि उनके पास अतिरिक्त आर्थिक संसाधनों की कमी है।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए वाराणसी फर्नीचर एवं फर्निशिंग व्यापार मंडल के अध्यक्ष अजय गुप्ता ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियां व्यापारियों के लिए अत्यंत चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ती लागत और घटती बिक्री के कारण व्यापारी वर्ग मानसिक और आर्थिक दबाव में है। यदि यही स्थिति बनी रही तो अनेक छोटे व्यवसाय बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं।
उन्होंने कहा कि फर्नीचर उद्योग से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। ऐसे में इस क्षेत्र में मंदी का असर केवल व्यापारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे कारीगरों, मजदूरों, परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों और अन्य सहयोगी क्षेत्रों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
बैठक में यह भी कहा गया कि वर्तमान समय में बाजार में अपेक्षित ग्राहकी नहीं है। उपभोक्ता महंगाई के कारण खरीदारी को टाल रहे हैं, जिससे फर्नीचर कारोबार की गति धीमी पड़ गई है। व्यापारियों ने आशंका जताई कि यदि जल्द राहतकारी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले महीनों में स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।
बैठक में संगठन के महामंत्री रमेश यादव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजय अरोड़ा, उपाध्यक्ष सनी जायसवाल, उपेंद्र कुमार, दिलीप गुप्ता, गुड्डू, राजकुमार यादव, दिनेश खुराना, राजकुमार जी, नरेंद्र गर्ग, अरुण रूस्तगी, मनोज अग्रवाल, तनवीर भाई, अमीन खान, विवेक ग्रोवर, प्रहलाद यादव, अंकित सुनेजा, सतीश पाल, विशाल साहनी, अनिरुद्ध यादव, राजू यादव, अंकित गिनोदिया सहित बड़ी संख्या में व्यापारी उपस्थित रहे।
बैठक के अंत में सर्वसम्मति से सरकार से मांग की गई कि बिजली दरों में राहत प्रदान की जाए, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं तथा छोटे एवं मध्यम व्यापारियों को विशेष आर्थिक सहायता और प्रोत्साहन उपलब्ध कराया जाए। व्यापार मंडल ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो फर्नीचर उद्योग में व्यापक मंदी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिसका असर स्थानीय व्यापार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।
व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार और संबंधित विभागों को व्यापारियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र समाधान निकालना चाहिए, ताकि उद्योग और व्यापार की रफ्तार को फिर से गति मिल सके तथा रोजगार के अवसर सुरक्षित रह सकें।
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